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Wednesday, June 2, 2010

सज्जनता की प्रतिमूर्ति.....महेश चन्द्र जी !


सिंह सदन के सदस्यों की परिचय श्रृंखला में इस बार हम परिचय करा रहे हैं, अपने प्रिय मौसा महेश चन्द्र जी से।


महेश चन्द्र जी अत्यन्त सरल, सहज और कर्मठ व्यक्ति हैं। वे ऐसे व्यक्ति हैं , जिन्होंने जीवन की सच्चाईयों से कभी मुँह नहीं मोड़ा। जीवन की आरम्भिक कठिनाईयों से लड़ते हुए उन्होने अपने जीवन को नयी दिशा दी और आज वे अपने जीवन से निष्चित रूप से संतुष्ट नज़र आते हैं। महेश चन्द्र जी का जन्म फिरोजाबाद (तत्कालीन मैनपुरी) जिले के सराय शेख ग्राम में 1958 में हुआ था। अपने तीन भाईयों में सबसे बड़े महेश चन्द्र का आरम्भिक जीवन काफी कठिनाईयों से गुज़रा। उनके पिता श्री पुत्तूलाल कृषि और कुटीर उद्योग से जुड़े हुए थे। पिता पुत्तूलाल सिरसागंज में रहकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। अब तो यह गाँव इटावा आगरा राष्ट्रिय राजमार्ग से जुड़ गया है, लेकिन अब से 40 साल पूर्व यह गाँव अत्यन्त पिछड़ा गाँव था जहाँ बुनियादी सेवाएं भी न थीं। न सड़क, न विद्युत, न विद्यालय, न अस्पताल............आदि। शिक्षा के प्रति ललक भी बहुत ज़्यादा न थी। अधिकांश बच्चे जब 10-12 साल के हो जाते थे तो गाँव में ही अपने पारिवारिक कार्यो में हाथ बटाने लगते थे। महेश चन्द्र को भी अंततः इसी परम्परा का निर्वहन करना था। गाँव के प्राइमरी स्कूल से आरम्भिक पढ़ाई के बाद उन्हें भी खेती-किसानी का कार्य करना था। लेकिन बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे महेश चन्द्र को पढ़-लिखकर सरकारी नौकरी में जाने की धुन सवार हो गयी।


गाँव की प्राइमरी शिक्षा के बाद भी वे रूके नहीं..........जूनियर हाईस्कूल किया। हाईस्कूल, इण्टर समीपवर्ती कस्बे सिरसागंज से किया। अपने परिवार की वास्तविकता से भागे बिना अपने पिता के कार्यो में हाथ बटाते रहे। खेतों में हल चलाने से लेकर घरेलू पशु भी चराये मगर ध्येय बरकरार रहा...............सरकारी नौकरी।


जब 10वीं कक्षा पास हुए तो मौसी शीतला देवी से उनका विवाह (1975) में हो गया। 17 वर्ष की आयु में वैवाहिक जीवन प्रारम्भ करने के बाद ज़िम्मेदारियां बढ़ने लगीं मगर इसके बावजूद वे अध्ययन में लगे रहे। सिरसागंज के जैन इण्टर कालेज से इण्टरमीडिएट, नरायण डिग्री कालेज से बी0ए0 और इसके बाद एन0डी0 कालेज भोगांव से राजनीति शास्त्र में एम0ए0 की डिग्री हासिल की।1982 में एम0ए0 करने के बाद भी वे नौकरी पाने का प्रयास करते रहे...................1984 में उनका प्रयास सफल हुआ। रेलवे में चयनित हुए।


विगत 25 वर्षों में रेलवे की नौकरी में उनका सफर काफी सफल रहा है । जालंधर, शाहकोट , जिन्दल पिण्डी, जमशेर खास तथा चिहडु रेलवे स्टेशनों पर उनकी पोस्टिंग रही। उनके तीन बच्चे भी हैं - रंजीत, संदीप और रानी। तीनों बच्चे उनकी तरह सीधे-सज्जन हैं। बनावट और अहंकार से दूर...........। अभी चार माह पूर्व फरवरी माह में रंजीत का विवाह भी हो गया है। फिलहाल वे पंजाब में हैं, लेकिन जैसे ही मौका मिलता है वे मैनपुरी चले आते हैं। परिवार में उत्सव का कोई भी अवसर हो............ महेश मौसा शायद ही कभी अनुपस्थित रहे हों। प्रत्येक शादी -विवाह शुभ अवसर पर वे हाजिर रहते हैं। इधर कुछ सालों से उनका रूझान आध्यात्म की ओर बढ़ा है....... पंजाबी डेरों का प्रभाव उनके दिमाग पर हावी हुआ है, सो वे जब भी गाँव आते हैं, तो आध्यात्म के किस्सों को सुनाते हैं। इन किस्सों को सुनने में गाँव वासी पर्याप्त रूचि लेते हैं। वे अब चौकी भी लगाते हैं। उनका दावा है कि वे किसी भी व्यक्ति का भविष्य -भूत बता सकते हैं। गाँव वालों के लिए वैसे भी इस तरह के व्यक्ति हमेशा ही श्रद्धा-कौतूहल और आश्चर्य का दूसरा रूप होते हैं............. सो उनके आस-पास ग्रामीणों की काफी भीड़ रहती है।


मौसा का मन अब पंजाब में नही लगता..................वे नौकरी समाप्त कर वापस अपने जिले मैनपुरी या फिरोजाबाद आना चाहता हैं , वे यह भी चाहते हैं कि उनके बच्चों का कैरियर भी यू0पी0 में ही कहीं बन जाय.............।


कई यादें उनसे जुड़ी हुई हैं.............जब हम उन्नाव-अचलगंज में थे तो वे हमारे घर आया करते थे। जब भी शादी -संस्कार होते थे.................महिलाओं के मजाक के प्रिय पात्र भी वही होते थे।


बहरहाल सिंह सदन के प्रत्येक सदस्य का सम्मान उन्हें प्राप्त है। उनकी सरलता, सहजता, आडंबर हीनता, सहृदयता को सिंह सदन प्रणाम करता है।


*****तआर्रुफ़ के लिए पकु

3 comments:

psingh said...

bhaiya
bahut hi mahan shksh se taruf karaya apne
fufa ji vakai sajjanta ki murti hai

pankaj said...

mausa ji is a great man with siplecity . we really love him . a very loving & supporting kind of person he is . he believes in god , spritualism & values . a true ideal family guardian. bhaiya hat's off to you for a marvelous post .

Ranjit said...

thanx for u bhai sahab , apne papa ki tareef mai itna kuch kila. i am so happy.