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Tuesday, December 25, 2012

चिन्तक पिंटू सोच रहा हूँ क्या लिखा डालूं  ????

चक्कर चला के जायेंगे


मैं हूँ सीधा सादा बच्चा।।।

चलो ये भी अच्छा दौरा रहा


Friday, December 21, 2012


SINGH SADAN HALL OF FAME ..
VOLUME--- 32 



आहा मज़ा ही आ गया ... 
आहा कुकीज़ ..मीठी ..मीठी  
प्लीज  ... मुझे अकेला छोड़ दो ... तखलिया 

हम भी अगर बच्चे होते नाम हमारा होता ..चुन्न मुन्नू 

मैंने कहा न ... DON'T DISTURB ME .. 
हम आपकी भी सुनेंगे ..और उनकी भी सुनेंगे 
****** COMPILED & EDITED BY PANKAJ K. SINGH 

SINGH SADAN HALL OF FAME ...
VOLUME--- 31 
SINGH SADAN ROCKS......

                                                                  ......सिंह सदन ने बीती 14 दिसंबर को अपनी दो प्यारी प्यारी गुडिया  ...... लीची और श्रेया का बर्थ डे  सेलिब्रेट किया ... 500 से ज्यादा मेहमानों के साथ कार्यक्रम परवान चढ़ा ..गीत संगीत हुआ ... बेहतरीन डिनर  हुआ और खूब सारा खेल कूद और मस्ती ... तो आप भी मज़ा लीजिये उन खूबसूरत लम्हों का ... इन बोलती  तस्वीरों की जुबानी ...

शानदार लज़ीज़ केक 

केक नंबर -2

आओ झूमें गायें ....

मिलके धूम -2 मचाएं ...

मुझे देखने दो ... 

I M PRINCESS..

THE ONE & ONLY ... PRINCESS SHREYA 

दीपों सा जगमग हो इनका जीवन ...   

HAVE A HUGE ROUND OF APPLAUSE ...

HAVE A BITE SWEET HEART ...
***** COMPILED & EDITED BY PANKAJ K. SINGH ( EDITOR)

EDITORIAL ...



SINGH SADAN ... STARTS ROCKING ....

मित्रों .......
                                 काफी समय बाद आपसे मुखातिब हो रहा हूँ .. इधर व्यस्तताओं के कारण आपसे बातें न हो सकीं इसलिए माफ़ी चाहता हूँ .. अन्य सदस्यों से भी आवाहन करता हूँ की वो भी ब्लॉग पर सक्रिय हो जाएँ ... कुछ रचनाधर्मिता आवश्यक है .. जिन सदस्यों को जो कोलम्स  दिए गए थे बेहतर होगा की वे तत्काल उस पर काम शुरू कर दे ..    ब्लॉग की श्रेष्ठता और लोकप्रियता बनाये रखने के लिए सभी का सहयोग अपेक्षित है !                                                  
                                                   मैं आज से प्रतिदिन अपने सम्पादकीय और कोलम  के साथ स्वयं आपकी सेवा में  उपस्थित होऊंगा  ऐसा मेरा संकल्प है ..  यह शरद ऋतु  आपको और नयी प्रसन्नता और बौधिक सम्रद्धि दे ऐसी मेरी प्रभु से प्रार्थना है                     ..                                                                                                                             आपका अपना ......
                                                                                                                                           पंकज के . सिंह 
                                                                                                     ( संपादक )

Wednesday, December 12, 2012

शिष्टाचार

सिंह सदन से शीला देवी लिखती हैं कि  शिष्टाचार का महत्व क्या है!
शिष्टाचार मनुष्यता की सबसे बड़ी पहचान है। मनुष्य को मनुष्य की तरह ही रहना ही शोभा देता है। परमात्मा ने मनुष्य को विशेष रूप से बुद्धि विवेक का बल दिया है ताकि वह अपनी जड़ता का परिष्कार करके सुन्दर एवं सभ्य बन सकें। शिष्टाचार जीवन का वह दर्पण है जिसमे  हमारे व्यक्तित्व  का स्वरुप दिखाई देता है। इसके माध्यम से ही मनुष्य का प्रथम परिचय समाप्त होता है।  अच्छा हो या बुरा इसका दूसरों पर कैसा प्रभाव पड़ता है यह हमारे व्यव्हार पर निर्भर करता है। जो हम दूसरों से करते हैं वह व्यव्हार की रीति है, जिसमे व्यक्ति स्वयं समाज की आंतरिक सभ्यता एवं संस्कृति के दर्शन होते हैं।  परस्पर बातचीत से लेकर दूसरों की सेवा, त्याग, सम्मान , भावनाएं आदि तक शिष्टाचार में आ जाते हैं। शिष्टाचार व्यवहार का नैतिक मापदंड है। जिस पर सभ्यता एवं संस्कृति का भवन निर्माण होता है। एक दूसरे के प्रति सद्भावना सुहानुभूति सहयोग आदि शिष्टाचार के मूल आधार हैं। इन मूल भावनाओं से प्रेरित होकर दूसरों के प्रति  नर्म, विनयशील, उदार आचरण ही शिष्टाचार है। 
शिष्टाचार का क्षेत्र उतना ही व्यापक है जितना हमारे जीवन व्यवहार का समाज में! जहाँ - जहाँ  भी हमारा दूसरे व्यक्तिओं से संपर्क होता है वहां शिष्टाचार की जरूरत की जरूरत पड़ती है। घर में छोटे से लेकर बड़े सदस्यों के साथ सभी जगह हमें शिष्टाचार की आवश्यकता पड़ती है। आज कल समाज में अशिष्टता की व्यापक रूप से वृद्धि होती जा रही है। जोकि हमारे देश और समाज के लिए एक अभिशाप। आज समाज और परिवारों में व्यक्ति एक दूसरे के प्रति  सम्मान आदि का कोई ध्यान नहीं रखता। अधिकाँश व्यक्ति अपने स्वार्थ से प्रेरित होकर दूसरों के साथ मनमाना व्यवहार करते हैं। जो कि अशिष्टता की श्रेणी में आता है। अशिष्ट आचरण लोगों में सहज ही देखा जा सकता है। गुरुजनों तथा परिवार में वृद्धिजनों का सम्मान आदर करने और पैर छूने की परम्पराएँ समाप्त होती जा रही हैं। आज के शिक्षित और सभ्य कहे जाने वाले लोग इसमें अपना अपमान समझते हैं।  भौतिकता की चकाचौंध में स्वयं को आधुनिक कहलाने वाली पीढ़ी में यह सब देखने को मिल जाता है। यदि प्रत्येक अभिभावक अपने बच्चों में तथा स्वयं में शिष्टाचार लायें और शिष्टाचार के महत्व को समझे तो निश्चित रूप से समाज एवं परिवार का निर्माण हो सकेगा। 

Tuesday, September 4, 2012

Wednesday, August 15, 2012

चंदौली में स्वतंत्रता दिवस !




66 वें स्वतंत्रता दिवस पर जिलाधिकारी के रूप में चंदौली कलेक्ट्रेट में ध्वजारोहण करने का अवसर मिला. इस अवसर पर जिलाधिकारी आवास पर रात में रोशनी की गयी और दिन में विचार विनिमय और सेनानियों के साथ समय गुजरने का अवसर मिला. चंदौली जिला स्वतंत्रता संग्राम में इसलिए जाना जाता है कि इस जिले के एक कस्बे धानापुर में कुछ दिनों के लिए स्वतंत्र सरकार स्थापित हुयी थी जिसके एवज में कई लोगों को तत्कालीन अंग्रेजी बर्बरता का शिकार होना पड़ा था. 

*****PK

Monday, August 6, 2012

दोहे ................!


नजरों से नजरें मिलीं गढा प्रेम का गीत |
कोटि जन्म जब पुण्य हों, मिलता मनका मीत ||

 प्रेम का रस सबसे मधुर इससे मधुर न कोई |
जिन पाया इस स्वाद को स्वाद न जाना कोई ||

हंसी ठिठोली दिल्लगी करते हों जब लोग |
समझो दस्तक दे रहा दिल पर प्यार का रोग ||

माया बड़ी न जग बड़ा सबसे बढ़ कर प्यार |
इसके डूबे पार है, बाकी सब मजधार ||

पिया गए परदेश को नैना है अभिराम |
जोगन बाट निहारती सुबह से लेकर शाम ||

जुल्फों में काली घटा दिल मे है तूफान |
खुशबु में जिसकी मदहोशी क्या है उसका नाम ||

सर ऊपर आकाश है आँखों में पाताल |
अधरों पर है मयकशी लट उलझी बेहाल ||

प्रेम प्याला जिन पिया पीवत होवत ज्ञान |
मिट जाता मन का तिमिर, दूर होत अभिमान ||

प्रेमपत्र पढ़ कर हुआ हम को यह अहसास |
इससे बढ़कर जगत में और नहीं कुछ खास ||

प्रेम सुधा बरसात है भीगत मानुष, संत |
प्रेम का ना प्रारब्ध है नहीं है कोई अंत ||

प्रेम का रस तो एक है, अलग अलग है रूप |
प्रेम राग पर थिरकते, बड़े बड़े सुर भूप ||

अपने हित को त्याग कर, जब ले निर्णय कोई |
गलती की सम्भावना रह जाती नहिं कोई ||

 पुष्पेन्द्र “पुष्प”

Thursday, August 2, 2012

बधाई.....!


रक्षा बंधन की सिंह सदन के सदस्यों को बहुत बहुत शुभकामनाये. आज बहुत याद आ रही है उषा दी, गीता दी, भारती और सभी बहनों की जो रक्षा बंधन पर कलाई  पर राखी बांधती थीं . सरकारी व्यस्तताओं के चलते अब मिलना जुलना कम हो गया है.... मगर स्नेह और प्यार की डोरी अभी भी उतनी ही मज़बूत है. आज भी गीता दी का प्यार, उषा दी की रंगीन मिठाईयां याद आती हैं. 
रक्षा बंधन की सबको बहुत बहुत प्यार, बधाई.....!

Tuesday, July 31, 2012

हाथ आपका काँधे पर ........


हाथ आपका काँधे पर 
महसूस हमेशा होता है 
इसीलिए  ये जर-जर मन
हर बारिश तूफान सहता है  
तुम हो शक्ति पुंज सूरज का 
मै अंधकार का कतरा हूँ 
ऊँगली पकड के बड़ा हुआ हूँ 
साये में अब जीता हूँ 
आपके अहसानों का अमृत 
सर से बहता रहता है 
हाथ आपका काँधे पर 
महसूस हमेशा होता है 
जब भी गिरा कहीं धरती पर 
तुमने आकार थामा हाथ 
नाम तुम्हारा लेने भर से 
बन जाती है बिगड़ी बात 
सदा आप है साथ हमारे 
दिल ये कहता रहता है 
हाथ आपका काँधे पर 
महसूस हमेशा होता है |

Monday, July 30, 2012

हैदराबाद सेमिनार




हैदराबाद के NIRD में आयोजित एक सेमीनार में LWE Districts के  जिला अधिकारियों  के साथ एक कार्यशाला. इस कार्यशाला में इन जनपदों के विकास के बारे में गहन विचार विमर्श हुआ.

Wednesday, July 25, 2012

'धान का कटोरा'....!


चंदौली को पूर्वी उत्तर प्रदेश का 'धान का कटोरा' (Bowl of Rice)  कहा जाता है. इस क्षेत्र में धान की पैदावार काफी होती है. जनसंख्या का बहुत बड़ा हिस्सा कृषि कार्यों से जुड़ा हुआ  है, ज़ाहिर है इसमें महिला श्रम शक्ति का बहुत बड़ा योगदान है. इसी  योगदान की कहानी कहती हैं यह तस्वीरें .....!

Monday, July 23, 2012

राग दरबार vol-13


पुरवा आवत देखि के अकुलावें जे खेत |
जैसे रेगिस्तान में पवन उड़ावे रेत ||

पछुआ है मनभावनी मन मीठा कर जाय |
फसलें सब लहला उठें शीतलता पहुंचाय ||

चढ बसंत की बेल पर फूल सभी खिल जाय |
ज्यों त्योहारी मिलन से दिल से दिल मिल जाय ||

ग्रीष्म ऋतु मायूस सी हाथ पैर झुलसाय |
झिलमिल करती धूप में चित्त नहीं टिक पाय ||

रिमझिम बरसे मेघ रस धरती को नहलाय |
स्वाति नक्षत्र की बूंद पी पपीहा प्यास बुझाय ||

धनवानों की शरद ऋतु निर्धन की है ग्रीष्म |
करते सब है प्रतिज्ञा बना कोई भीष्म ||

ऋतुओं में ऋतुराज है निर्मल ऋतु बसंत |
मानुष मौज मानत है ध्यान लगावत संत ||


                                                पुष्पेन्द्र “पुष्प”

Sunday, July 22, 2012

नया ठिकाना

प्रियजनों.....
अमिताभ बच्चन के  "टंबलर" पर जाने के बाद मैंने उनका नया ठिकाने को तलाशा.... वाकई अच्छा ठिकाना है....! मैंने भी इस पर नया अकाउंट बनाकर अपनी तस्वीरें लगा कर एक प्रयोग किया है ज़रा गौर फरमाएं. 

******PK 

Friday, July 20, 2012

राग दरबार vol-12

रिश्तों में दरार आयी


रिश्तों में दरार आयी
याद वो दिन जब हाथ मिले थे
तुम भी खुश थे हम भी खुश
फिर लुलाकात का दौर चला
घर आना जाना शुरू हुआ
तुम अलग लगे कुछ खास लगे
विश्वास के पालन हार लगे
सब कुछ कितना मनभावन था
फिर दिलों के प्यार की छाँव तले
खुशियों में रिश्ते फूले फले
कुछ वक्त की एसी हवा चली
एक दूजे से उम्मीद बढी
फिर तेरा मेरा शुरू हुआ
लालच सर चढ कर बोल उठा
एक दूजे की कमियां दिखने लगीं
पैसे का काला रंग दिखा
नजरों से नजरें दूर हुई
उम्मीदें टूट के बिखर गयी
अब वो भी नजर नही आते
हम खुद भी वक्त नहीं पाते
खुशियों की फसल है मुरझाई
रिश्तों में दरार आयी |

                                                            पुष्पेन्द्र “पुष्प”

Saturday, June 16, 2012

राग दरबार vol-11


                मुझे दूर कहीं तू ले चल मन


मुझे दूर कहीं तू ले चल मन
जहाँ मानवता का त्रास न हो
किसी राम को फिर वनवास न हो
हो दिव्य जहाँ का वातावरण
मुझे दूर कहीं तू ले चल मन |

हर दिल में प्यार की ज्योति जले
भंवरे मुस्काएं फूल खिले
हर आंगन में किलकारी हो
महफूज जहाँ  की नारी हो
जहाँ आखें हों दिल दर्पण
मुझे दूर कहीं तू ले चल मन |

जहाँ समता का अधिकार मिले
हर दिल में प्यार ही प्यार पले
फूलों से सजी हर डाली हो
कोयल कूके मतवाली हो
पपीहा छेड़े मीठी सरगम
मुझे दूर कहीं तू ले चल मन |

छल दम्भ का कोई नाम न हो
बस सच के सिवा कोई काम न हो
जहाँ जाति धर्म का बैर न हो
कोई अपना कोई गैर न हो
दिल निर्मल हो मन अति पावन
मुझे दूर कहीं तू ले चल मन |


                                                पुष्पेन्द्र “पुष्प”

Saturday, June 9, 2012

स्ट्रेट ड्राइव के नए अंक में संपादक पंकज के सिंह आपको रूबरू करा रहे हैं अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त दिग्गज ब्रोडकास्टर अमीन सायानी की बेजोड़ शख्सियत से ,संपादक पंकज के सिंह बता रहे हैं की कैसे काउंट डाउन परेड के उनके नए अंदाज़ को पूरी दुनिया में फैले करोड़ों संगीत प्रेमियों ने हाथों हाथ लिया और गीतमाला के रूप में दुनिया का सार्वाधिक लोकप्रिय साप्ताहिक रेडियो प्रोग्राम तैयार हुआ !


स्ट्रेट ड्राइव

VOLUME -- 21

पद्म श्री अमीन सायानी 

                                             


                                                १९५० से लेकर आज तक ब्रोडकास्टिंग की दुनिया में तीन पीढ़ियों की एक ही सर्वमान्य पसंद बने हुए हैं  दिग्गज ब्रोडकास्टर अमीन सायानी ! १९५२ में अमीन सायानी गीतमाला के रूप में दुनिया का सार्वाधिक लोकप्रिय साप्ताहिक रडियो प्रोग्राम जो हिंदी फ़िल्मी गीतों की काउंट डाउन परेड के रूप में था लेकर पेश हुए !
                                                 छोटे  छोटे  प्रयोगों के बाद इसे १९५३ से अमीन सायानी ने इसे अपना मनचाहा अंतिम रूप दिया और इसे जनता और श्रोता संघों की राय रिकार्ड्स की बिक्री तथा लोकप्रियता के आंकड़ों से जोड़ कर इसे एक हिंदी फ़िल्मी गीतों की काउंट डाउन परेड के रूप में प्रस्तुत किया !
                                                   अपने मोहक अंदाज़ में वे जब फ़िल्मी दुनिया की तमाम जानकारियाँ देते हुए रेडियो प्रोग्राम पेश करते तो गली गली गाँव  गाँव  शहर शहर रेडियो के इर्द गिर्द दर्जनों लोग सांस रोककर उनकी गीतमाला को सुनते थे ! ऐसी अद्भुत लोकप्रियता की आज कल्पना भी नहीं की जा सकती और यदि मुमकिन हो भी जाये तो उसके कोमर्सियल सक्सेज़ का अंदाजा आप लगाइए !
                                                      आज भी एच. एम्. वी .उनके कार्यक्रम की सी डी की रिकार्ड बिक्री कर रही है !
                                                  २१ दिसंबर १९३१ को अमीन सायानी का जन्म हुआ था और मुंबई के सेन्ट जेवियर कोलेज से उनको शिक्षा हुयी ! कई मशहूर  फ़िल्मी हस्तियाँ भी इसी  सेन्ट जेवियर कोलेज में उस समय पढ़ती थीं !
                                                   २००९ में उन्हें भारत सरकार ने पद्म श्री से नवाज़ा !

गीतमाला ----
                                                   रेडियो सीलोन से प्रस्तुत होने वाले इस लाजवाब साप्ताहिक रेडियो प्रोग्राम की हर साल एक वार्षिक हिट परेड भी होती थी जिसमे पॉइंट्स के आधार पर उस साल की वार्षिक हिट परेड तैयार होती थी और उसमे साल का चोटी का गीत चुना जाता था ! आपके लिए ख़ास तौर पर हम यहाँ १९५३ से लेकर १९९३ तक के हर साल के  चोटी के  गीत का पूरा विवरण यहाँ दे रहे हैं ..उम्मीद है ये आपकी जानकारी को बढ़ाएगा और आप इसे पसंद करेंगे !


Lists of top songs per year

The first countdown show's toped by Nagin with the song mera man dole by Lata Mangeshkar.


Top songs from 1953 to 1993:

Year -Song -Film -Music Director - Lyricist - Singer(s)

1953 -Too Ganga Ki Mauj -Baiju Bawra (film)- Naushad -Shakeel Badayuni- Mohd. Rafi


1954 Mera Man Dole mera Tan Dole Nagin Hemant Kumar Rajinder Krishan Lata Mangeshkar


1955 Mera Joota Hai Japani Shri 420 Shankar Jaikishan Shailendra Mukesh


1956 Ae Dil Hai Mushkil Jeena Yaha CID O. P. Nayyar Majrooh Sultanpuri Mohd. Rafi, Geeta Dutt


1957 Zara Saamne Toh Aao Chhaliye Janam Janam Ke Phere S N Tripathi Bharat Vyas Mohd. Rafi, Lata 
Mangeshkar


1958 Hai Apna Dil Toh Awara Solva Saal S D Burman Majrooh Sultanpuri Hemant Kumar


1959 Haal Kaisa Hai Janaab Ka Chalti Ka Naam Gaadi S D Burman Majrooh Sultanpuri Kishore Kumar, Asha Bhosle


1960 Zindagi Bhar Nai Bhoolegi Wo Barsaat Ki Raat Barsaat Ki Raat Roshan Sahir Ludhianvi Mohd. Rafi, Lata Mangeshkar


1961 Teri Pyaari Pyaari Surat Ko Sasural Shankar Jaikishan Hasrat Jaipuri Mohd. Rafi


1962 Ehsaan Tera Hoga Mujh Par Junglee Shankar Jaikishan Hasrat Jaipuri Mohd. Rafi, Lata Mangeshkar


1963 Jo Wada Kiya Woh Nibhana Taj Mahal Roshan Sahir Ludhianvi Mohd. Rafi, Lata Mangeshkar


1964 Mere Man ki Ganga aur tere man ki Jamuna ka Sangam Shankar Jaikishan Shailendra Mukesh, 
Vyjayanthimala


1965 Jis dil mein basa tha pyaar tera Saheli Kalyanji Anandji Indeevar Mukesh, Lata Mangeshkar


1966 Baharon phool barsao mera mehboob aaya hai Suraj Shankar Jaikishan Hasrat Jaipuri Mohd. Rafi


1967 Saawan ka mahina pawan kare sor Milan Laxmikant-Pyarelal Anand Bakshi Mukesh, Lata Mangeshkar


1968 Dil wil pyar vyar main kya jaanu re Shagird Laxmikant-Pyarelal Majrooh Sultanpuri Lata Mangeshkar


1969 Kaise rahoon chup ki meine pee hi kya hai Inteqam Laxmikant-Pyarelal Rajendra Krishna Lata Mangeshkar


1970 Bindiya chamkegi choodi khankegi Do Raaste Laxmikant-Pyarelal Anand Bakshi Lata Mangeshkar


1971 Zindagi ek safar hai suhana Andaaz Shankar Jaikishan Hasrat Jaipuri Kishore Kumar, Asha Bhosale


1972 Dum Maro Dum Hare Raama Hare Krishna R. D. Burman Anand Bakshi Asha Bhonsle, Usha Iyer


1973 Yaari hai imaan mera yaar meri zindagi Zanjeer Kalyanji Anandji Gulshan Bawra Manna Dey


1974 Mera jeewan koraa kaagaz koraa hi rah gaya Kora Kagaz Kalyanji Anandji M. G. Hashmat Kishore Kumar


1975 Baaki kuchh bacha to mahangaai maar gayee Roti Kapada Aur Makaan Laxmikant-Pyarelal Varma Malik Lata Mangeshkar, Mukesh, Jaani Babu Qawwal, Narendra


1976 Kabhi kabhi mere dil mein khayaal aataa hai Kabhi Kabhi Khayyam Sahir Ludhianvi Lata Mangeshkar, Mukesh


1977 Husn haazir hai mohabbat ki sazaa paane ko Lailaa Majnu Madan Mohan Sahir Ludhianvi Lata Mangeshkar


1978 Ankhiyon ke jharokhon se, mainen dekha jo Ankhiyon Ke Jharokhon Se Ravindra Jain Ravindra Jain Hemlata


1979 Khaike Paan Banaras Wala Don Kalyanji Anandji Anjaan Kishore Kumar


1980 Dafli Wale Dafli Baja Sargam Laxmikant-Pyarelal Anand Bakshi Lata Mangeshkar, Mohd. Rafi


1981 Mere Angane Mein Laawaris Kalyanji Anandji Anjaan Amitabh Bachchan, Alka Yagnik


1982 Angrezi Mein Kehte Hain Khuddar Rajesh Roshan Majrooh Sultanpuri Kishore Kumar, Lata Mangeshkar


1983 Shayad Meri Shaadi Souten Usha Khanna Saawan Kumar Kishore Kumar, Lata Mangeshkar


1984 Tu Mera Hero Hai Hero Laxmikant-Pyarelal Anand Bakshi Anuradha Paudwal, Manhar Udhas


1985 Sun Sahiba Sun Ram Teri Ganga Maili Ravindra Jain Ravindra Jain Lata Mangeshkar


1986 Yashoda Ka Nandlala Sanjog Laxmikant-Pyarelal Anjaan Lata Mangeshkar


1987 Chitthi Aayi Hai Naam Laxmikant-Pyarelal Anand Bakshi Pankaj Udhas


1988 Papa Kehte Hain Qayamat Se Qayamat Tak Anand-Milind Majrooh Sultanpuri Udit Narayan


1989 My Name Is Lakhan Ram Lakhan Laxmikant-Pyarelal Anand Bakshi Mohd. Aziz


1990 Gori Hai Kalaiyaan Aaj Ka Arjun Bappi Lahiri Anjaan Lata Mangeshkar, Shabbir Kumar


1991 Dekha Hai Pehli Baar Saajan Nadeem-Shravan Sameer Alka Yagnik, S P Balasubramaniam


1992 Maine Pyar Tumhi Se Phool Aur Kaante Nadeem-Shravan Sameer Kumar Sanu, Anuradha Paudwal


1993 Choli Ke Peechhe Khalnayak Laxmikant-Pyarelal Anand Bakshi Alka Yagnik, Ila Arun

                      ******* PANKAJ K. SINGH