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Monday, May 31, 2010

पहेली 2 .........!


पहेली 2 के उत्तर देने में इस बार सिंह सदन के सदस्यों का बहुत ही सक्रिय योगदान रहा...... चूँकि पिछली बार पहेली का उत्तर देने में समस्त सदस्य असफल रहे थे........तो इस बार समस्त सदस्यों ने पहेली को बहुत गंभीरता से लिया. अधिकांश उत्तर दाताओं के उत्तर सही रहे ......वैसे यह शिकायत भी आ रही है की पहेली कुछ कठिन है !
हो सकता है, .......... मगर यह मैं जरूर कहूँगा कि थोडा सा दिमाग लगाने पर पहेली का उत्तर स्पष्ट हो जाता है.......!




इस बार की पहेली का उत्तर है.......महेश मौसा सराय वाले ( जालंधर वाले )




अब मैं ज़रा पहेली स्पष्ट कर दूं .......पहला संकेत था......."जहाँ शेख ठहरें, वही मेरा भी ठिकाना है........!" शेख ठहरतें है जहाँ.......ओ...ओ.....ओ....मतलब " सराय शेख" से कोई शख्स है यह.....इसके बाद पहेली आसान हो जाती है.......दूसरा संकेत था...... "मेरा साला कहता है कि मेरी "अंग्रेजी" राइटिंग या मैं खुद पढूं या फिर खुदा.....!" यहाँ अंग्रेजी शब्द को कामा में बंद किया गया था जो उत्तर के लिए "की वर्ड" था......चूँकि महेश मौसा के अलावा और कोई व्यक्ति अंग्रेजी से एम।ए. नहीं है, और उनकी राइटिंग पर कमेन्ट करने का दुस्साहस तो उनके साले अर्थात सिर्फ अपने वैद्य जी ही कर सकते हैं............तो यहाँ भी उत्तर स्पष्ट था.......तीसरे संकेत आने तक की तो जरूरत ही नहीं थी बहरहाल यह भी स्पष्ट कर दूं...की गाज़ियाबाद में एक क़स्बा है मुरादनगर वहीँ के एक हक़ीम जी उनके गुरु हैं, यह बात मुझे तब पता चली जब मैं गाज़ियाबाद में पोस्टेड था......! और अंत में मैं जब चौकी लगाने चल दिया था तो बात एक दम स्पष्ट हो गयी थी.......! चौकी तो सिर्फ महेश मौसा ही लगते है........!



अब आते हैं उत्तर दाताओं पर......कुल 8 उत्तर आये !
पहला उत्तर मिला था टिंकू और संदीप का जो मोबाइल पर था......जो सही था.....!
ब्लॉग पर पहला उत्तर आया पंकज सिंह का जो सही था......!

इस लिए इस पहेली के संयुक्त विजेता हुए टिंकू, पंकज और संदीप !




इनके अलावा अंजू, श्यामू के उत्तर भी सही आये मगर देर से आये सो वे विजेताओं की लिस्ट में शामिल नहीं होंगे.
हैरानी की बात जोनी और पिंटू के उत्तर रहे........जोनी ने तो अपना सर धुन लिया, और पिंटू ने उत्तर के तार गलत जोड़ लिए....!
बहरहाल आपकी सक्रियता और गंभीरता दोनों ने इस पहेली का लक्ष्य हासिल किया.....!
अगले शनिवार को फिर से नयी पहेली हाज़िर होगी .......इन्तिज़ार कीजिये......!

Sunday, May 30, 2010

सिंह सदन बुलेटिन















माह - मई 2010




ज़िन्दगी दो पल की ... इंतजार कब तक हम करेंगे भला ...



1. मई माह की समाप्ति ... और जून माह का स्वागत करते हुए मैं सभी प्रियजनों का आभार व्यक्त करता हूँ ! ये दो पल की जिंदगी आप के प्यार भरे साथ के बीच यूँ ही बीत जाये ... यही प्रभु से प्रार्थना है ! प्रियजनों आज का पल बड़ा कीमती है ... इसे जी भर के जी लो ... बाकी आनी जानी है !

2. ..... तो प्रियजनों इस तरह मई माह भी समाप्त हो गया ... समय का पहिया बिना आवाज़ किये आहिस्ता - आहिस्ता कितना लम्बा सफ़र तय कर लेता है .... इसका अंदाज़ा तो पीछे पलट कर देखने पर ही लगता है ! मई माह काफी गतिविधियों भरा साबित हुआ .....इस महीने सदस्यों ने काफी यात्राएँ भी की ....और परस्पर सानिध्य का मज़ा भी लिया ! तेज़ धूप और प्रचंड गर्मी उनके मज़बूत इरादों के आगे कमजोर साबित हुयी !

3. प्रिय श्यामू और प्रिया महीने भर परीक्षाओं में व्यस्त रहे ! प्रिया ने अपनी परीक्षाओं के बावजूद ईशी को ''बर्थ डे'' की बधाई देने के लिए गोरखपुर की यात्रा की ... इसके लिए वे बधाई की पात्र हैं !

4. ईशी की '' बर्थ डे पार्टी '' काफी शानदार रही .... उन्हें बधाई देने में ... और गोरखपुर में आयोजित दिलचस्प पार्टी में ''सिंह सदन'' कुनबे ने किसी प्रकार की कोई कसर न छोड़ी ! पार्टी में जिलाधिकारी श्री अजय शुक्ल , डी. आई. जी. श्री असीम अरुण , पूर्व डी. जी. पी. श्री श्री राम अरुण , श्री नवीन कुमार आई. ए. एस. ने पूरी रात सपरिवार भरपूर आनंद लिया.... और फिर बच्चों की धमा चौकड़ी तो थी ही .... कुल मिलाकर हर साल की तरह एक और शानदार बर्थ डे पार्टी .. !

5. सिंह सदन परिवार की गोरखपुर और कुशीनगर यात्राओं का ब्यौरा पहले ही कुछ लेखों और ट्रेव्लोग के रूप में आपके पेशे नज़र हो चुका है !

6. इस माह के दुसरे पखवाड़े से '' ब्लॉग लेखन '' ने काफी तेज़ रफ़्तार पकड़ी .... '' निरंतरता के साथ विविधता '' का नारा कारगर रहा ..... सदस्यों ने मेहनत भी की और ताज़ा तरीन सुझाव भी पेश किये ....कई पर तो फौरी अमल भी शुरू हो गया ! कुल मिलाकर ब्लॉग काफी हद तक गुलज़ार हो गया ..... पहेली बेहद हिट रही है !

7.....नए लेखक नहीं आ पा रहे हैं यही एक बड़ी चुनौती है ! इससे जीतना ही होगा ! मई माह में ब्लॉग लेखन में जैसी तेज़ी आई है .....वह उत्साहवर्धक है ! '' सिल्वर जुबली '' हम मना ही चुके हैं .... आंकड़ों के हिसाब से जून के पहले हफ्ते में '' गोल्डन जुबली '' पोस्ट भी आ जानी चाहिए !

8. ....'' गोल्डन जुबली सेलेब्रेशन '' की तैयारियां पूरी हैं ..... '' बिग बॉस '' से डेट्स मांगी गयी हैं ... उनका कार्यक्रम तय होते ही घोषणा कर दी जायेगी !


माह की शख्सियत एवं '' सिंह सदन रत्न ''


9. .....इस महीने पुष्पेन्द्र का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा ..... उन्होंने काफी मेहनत भी की और काफी ठोस सुझाव भी रखे ! एक सुझाव यह भी था कि पहेली के जवाब मोबाईल फोन से या एस. एम. एस. से प्रतिबंधित कर दिया जाये .... और सदस्यों को ''ब्लॉग'' पर जाकर लिखने को '' बाध्य '' कर दिया जाये .... पिंटू की इस फौलादी सोच ने मुझे मुतास्सिर किया और बिग बॉस की सहमति / अनुमोदन के बाद ... जून माह से इस फैसले को लागू किया जा रहा है !

10. .....मज़बूत इरादों और समस्त सदस्यों को ब्लोगर बना डालने की अदम्य इच्छा शक्ति के लिए .... पुष्पेन्द्र सिंह ''पिंटू'' को इस माह का '' सिंह सदन रत्न '' घोषित किया जाता है ! उन्हें सभी सदस्यों की ओर से ढेरों शुभकामनायें ! !

* * * * * PANKAJ K. SINGH

Saturday, May 29, 2010

एक शाम ... चेतन के साथ..

सुबह-सुबह स्थानीय मित्र शोभित अग्रवाल ने मोबाईल पर फोन किया, पूछा आज शाम का क्या प्रोग्राम है ? प्रतिउत्तर में मैंने कहा कि वैसे तो कुछ खास नहीं......। शोभित ने कहा कि यदि शाम को कहीं किसी शासकीय कार्य में व्यस्त न हों तो शाम को एक डिनर पार्टी में आप को आमंत्रित करना चाहता हूँ। मैंने शोभित से इस पार्टी की वजह जाननी चाही तो शोभित ने कहा कि किसी कोचिंग संस्थान की लांन्चिग प्रोग्राम में मशहूर लेखक चेतन भगत आ रहे हैं, प्रोग्राम तो कल है, चूँकि चेतन भगत आज खाली हैं, तो यह कार्यक्रम बना है कि उनके साथ हम लोग डिनर पर चलंे।

शोभित ने बड़ी सहजता से यह कार्यक्रम बना लिया था, जबकि मैं जानता था कि चेतन भगत आज के समय के सबसे ज्यादा बिकने और पढ़े जाने वाले लेखक हैं। विगत 5-7 सालों में उनके लेखन की प्रसिद्धि चारों ओर फैली है। वे आज युवा वर्ग में सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले हिन्दुस्तानी अंग्रेजी लेखक हैं। युवाओं को उनकी किताबें सम्मोहित सी करती हैं। उनको हाल ही में मीडिया ने भी काफी प्रचारित व प्रसारित किया है। ‘‘थ्री इडियट्स’’ जैसी सफल हिन्दी फिल्म की कहानी लिखने वाले मामले में विधु विनोद चोपड़ा और उनकी कंट्रोवर्सी अभी जे़हन में ताजा बनी हुई है।

बहरहाल यह सारी वज़हें तो एक तरफ............ चेतन भगत से से मिलने की उत्कंठा ने मुझे सारे काम दर-किनार कर उनसे मिलने के लिए प्रेरित किया। मैंने शोभित से कहा कि शाम को मैं पार्टी में आ रहा हूँ। अपने तमिल मित्र नवीन कुमार जी0एस0 के साथ शाम 8:30 बजे निर्धारित स्थल पर मैं पहुँच गया। जिस होटल में यह डिनर पार्टी थी, उसी होटल में युवा लेखक चेतन भगत रूके हुए भी थे। तकरीबन 30-35 लोग इस डिनर पार्टी में आमंत्रित थे। इन आमंत्रित लोगों में भी अधिकांश वही थे, जिन्होंने अपनी कोचिंग की लॉन्चिग में चेतन भगत को बुलाया था। 10 मिनट बाद चेतन भगत डाइनिंग हॉल में आ गये। चेतन भगत बिल्कुल टीन एजर युवा की भांति हॉल में आये, नीली जीन्स पर काले रंग की शार्ट टी-शर्ट और रिमलेस चश्मा लगाये हुए चेतन भगत पहली मुलाकात में ही बिल्कुल अपने से लगे। ऐसा लगा ही नहीं कि चेतन भगत से हम पहली बार मिल रहे हैं।

हम लोग खाना भी लेते रहे और चेतन भगत से बात-चीत भी करते रहे, बात-चीत के दौरान उनकी जीवन कथा और उसके बाद उनके लेखन पर भी चर्चा हुई। बात-चीत के दौरान पता चला कि 22 अप्रैल 1974 को जन्मे चेतन भगत की आरम्भिक शिक्षा-दीक्षा दिल्ली के आर्मी स्कूल में हुई, उसके बाद उन्होंने आई0आई0टी0 दिल्ली से मैकेनिकल इन्जिीनियरिंग में बी0-टेक किया, तदोपरान्त आई0आई0एम0 अहमदाबाद से प्रबन्धन की डिग्री हासिल की। अहमदाबाद में प्रबन्धन की डिग्री लेने के दौरान ही दक्षिण भारतीय सहपाठी अनुशा से उन्हें लगाव हो गया जो बाद में उनकी पत्नी बनीं। 1997 में प्रबन्धन की डिग्री पाने के बाद वे कुछ दिनों सिटी बैंक में भी कार्यरत रहे, लेकिन उनकी असली इच्छा तो लेखन की थी, सो लेखन के मैदान में कूद पड़े। एक बार जब लेखन शुरू किया तो फिर पीछे मुड़कर नही देखा।

उनकी पहली किताब Five Point Someone उनके अपने आई0आई0टी0 छात्र जीवन पर आधारित थी। यह किताब इतनी ज्यादा पसंद की गयी कि देश के अधिकांश अंग्रेजी दॉ युवक-युवतियों के लिए यह किसी आवश्यक ‘टेक्स्ट बुक’ सरीखी हो गयी। गत वर्ष की सबसे हिट हिन्दी फिल्म ‘‘थ्री इडियट्स’’ इसी रचना पर आधारित बतायी जाती है।


उनकी दूसरी किताब 2005 में One night@ the call center आयी। यह किताब कॉल सेन्टर में काम करने वाले ऐसे 6 व्यक्तियों के मनोभावों को प्रकट करती थीं, जिन्हें एक रात ‘‘भगवान’’ से कॉल आती है। चेतन भगत की इस किताब पर भी एक पिक्चर बनी, जिसका नाम था ‘‘हैलो’’, इस पिक्चर में सलमान खान, सुहेल खान आदि थे। लगभग 3 साल बाद 2008 में उनकी किताब The 3 Mistakes of My Life आयी। यह किताब क्रिकेट, राजनीति और प्यार के त्रिकोण पर आधारित थी और मजे की बात यह थी कि इस किताब पर भी फिल्म बनाये जाने की तैयारी है।

उनकी अभी तक के लेखन में अंतिम कृति 2 States – The Story of my marriage है जो उनके ही जीवन पर ही आधारित है। यह किताब मुझे इसलिए भी अच्छी लगी कि इस किताब में भारत के अखण्ड-एकता के स्वरूप के दर्शन होते हैं। चूँकि चेतन भगत की पत्नी दक्षिण भारतीय हैं, जाहिर है कि सांस्कृतिक-क्षेत्रीय विविधताओं से रोजाना वे दो-चार होते ही होंगे। इस किताब में उसी विरोधाभाषों का चित्रण बड़े ही रोचक ढंग से किया गया है। इस किताब में उत्तर भारतीय पात्र ‘वर्मा’ तथा दक्षिण भारतीय पात्र ‘स्वामीनाथन’ के बीच क्षेत्रीय विवादों का वार्तालाप बड़े ही दिलचस्प ढंग से लिखा गया है।


चेतन भगत आज-कल दैनिक भाष्कर और टाइम्स ऑफ इण्डिया में स्तम्भकार के रूप में भी लेखन कर रहे हैं। वे अपने ब्लाग पर भी कॉफी सक्रिय हैं। हमेशा चेहरे पर मुस्कान ओढ़े रहने वाले शान्तचित्त वाले चेतन भगत से अनौपचारिक बात-चीत करना बहुत अच्छा लगा। उनकी यह साफगोई मुझे बहुत प्रभावित कर गयी कि ‘‘मैं बहुत साधारण बोल-चाल वाली अंग्रेजी का इस्तेमाल अपनी रचनाओं में करता हूँ, ताकि बहुत ज्यादा गम्भीर हुए बिना अपनी बात आम आदमी तक पहुँचा सकूं।’’



वे युवाओं को अंग्रेजी सीखने के लिए भी प्रेरित करते हैं। अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि ‘‘हिन्दी और अंग्रेजी में सास-बहू का रिश्ता है और आज का प्रत्येक युवा एक ऐसा घरेलू लड़का है जिसे माँ भी चाहिए और पत्नी भी। भले ही सास-बहू में तकरार चलती रहे। ’’ मैंने जब चेतन से यह जानना चाहा कि आई0आई0टी0 और फिर आई0आई0एम0 से एम0बी0ए0 और उसके बाद लेखन........... क्या यह बदलाव कुछ ज्यादा नहीं है? चेतन भगत मुस्कुराते हुए बोले जिस काम में खुद को संतुष्टि मिले आदमी को वही काम करना चाहिए।



मैंने उनसे जब यह जानना चाहा तो अगला प्रोजेक्ट क्या है, तो वे बोले ‘‘भाई, अभी डिलीवरी प्रोसेस से बाहर आया हूँ और आप पूँछ रहे हैं कि अगला बेबी कब होगा? अभी 2 States – The Story of my marriage रिलीज हुई है, थोड़ा आराम कर लू तब नये प्रोजेक्ट के बारे में सोचूंगा।’’ और वे इतना कहकर खिलखिला कर हँस पड़ते हैं।



चेतन भगत से यह मुलाकात निश्चित रूप से इसलिए याद रहेगी कि एक 35-36 वर्षीय युवक किस तरह अपने लक्ष्य निर्धारित करता है और उन्हें पाता भी है। बौद्धिकता किसी जगह-काल की मोहताज नहीं होती। वे चाहे आई0आई0टी0 में रहे हों या आई0आई0एम0 में और अब लेखन में..........हर देशकाल-परिस्थिति में वे एक दम फिट हैं और अपने होने का पुख्ता सबूत भी देते हैं। दावे के साथ कहा जा सकता है कि चेतन भगत के लेखन की गम्भीरता को लेकर भले ही प्रश्न चिन्ह उठाये जाये, लेकिन आज के युवा दिमाग में वे एक शाइनिंग स्टार हैं, जिन्हें बहुत आगे तक जाना है।

* * * * * पकु

Friday, May 28, 2010

प्रतिभा के धनी "उमा रमन" यानी ( बबलू भइया )


बबलू भैया बेहद कर्मठ और लगनशील इन्सान है ............उनका जन्म आज से लगभग तीन दशक

पहले मेदेपुर ग्राम में हुआ बचपन से ही बे पढाई में बहुत तेज थे साथ ही साथ बे किवता और गायन में विशेष रूचि लेते थे मेरे चाचा जी जोकि बेहद प्रतिभावान व्यक्ति है हम सभी भाईयों को गायन और अभिनय की ट्रेनिग दिया करते थे

वे अध्यापको के हमेशा चहीते रहे है सभी अध्यापक उन्हें बेहद प्यार करते थे मुझे बखूबी याद है जब भइया कक्षा ६ में थे तब उन्हें बेस्ट गायन का पुरुष्कार मिला था हम सभी भाई बहन बेहद खुश थे गाँव की श्री रात्रि रामलीला में बे शबरी का बेहद सुन्दर एवं मार्मिक रोल करते थे...............हमारे सभी रिश्तेदार दूर दूर से यह रोल देखनेआते थे ''राम वन गमन के दिन बहुत भीड़ होती थी पुरे क्षेत्र से आदमी एकत्र होता था लगातार ५ साल उन्हें बेस्ट एक्टर के अवार्ड से नवाजा गया

यूंतो भइया ने और भी रोल किये पर लोगों को लगा की बे सिर्फ लेडिज रोल ही कर सकते है

तब उन्होंने इस इमेज को तोड़ने के लिए "अंगद" रोल किया और एसा किया की यादगार बन गया लोगों ने कहा इस से अच्छा रोल स्वेम अंगद ही कर सकते है और उन्हें अंगद के रोल के लिए वर्ष २००२ का बेस्ट एक्टर अवार्ड मिला भइया ने जीवन का हर चेलेंज दिल खोलकर स्वीकार किया भइया बचपन से मिलन सर व्यक्ति है .............बहुत जल्द किसी भी माहौल में घुल मिल जाते है और लोगों को अपना बना लेते है ये उनके अन्दर एक विशेष गुण है भइया बचपन से ही डाक्टर बनना चाहते थे सबसे पहले उन्होंने वरेली में प्रक्टिस की उसके वाद वे मेरठ चले गये वहां उनहोंने काफी वक़्त दिया और आज वे वेहतरीन डाक्टर है

भइया ने जीवन में बहुत से उतर चढाव देखे पर कभी विचलित नहीं हुए वे कर्मठ और लगनशील इन्सान है भईया व्यव्हार कुशल भी है गाँव में सभी उनका सम्मान करते है और जब वे घर पहुँचते है तो सभी उनसे मिलने आते है भैया ने पारिवारिक जिम्मेदारियां बखूबी निभाई वे निहायत साफ दिल इन्सान है और इसी बजह से सबको प्रिय भी है जैसे वे थे वैसी ही सुन्दर शुशील पत्नी उनको मिली

भाभी खुश दिल इन्सान है और परिवार की सेवा में संलग्न है

हम सब को फक्र है की वे हमारे बड़े भाई है ..............!


पुष्पेन्द्र सिंह


सिंह सदन पहेली क्रमांक 2


बताइये मैं कौन हूँ.....!


1. जहाँ शेख ठहरें, वही मेरा भी ठिकाना है........! ( समझ गए न..... नहीं, तो दूसरा संकेत भी देख लें भाई.....!)
2.मेरा साला कहता है कि मेरी "अंग्रेजी" राइटिंग या मैं खुद पढूं या फिर खुदा.....! ( ओह गोड अब भी नहीं.......तो अंतिम संकेत भी देख लें)
3."गाज़ियाबादी हक़ीम जी " मेरे गुरु हैं.........!


इस पहेली का उत्तर आप सबसे सोमवार शाम तक अपेक्षित है........पिछली बार कि तरह अन्सीरियस मत लीजियेगा भाईयों.....! अब हम तो चले चौकी लगाने.......आप लोग पहेली का हल ढूँढिये.....!

Thursday, May 27, 2010

ख़ाली घर काटता है........!

इस हफ्ते प्रिया - जोनी का गोरखपुर आगमन बहुत ही शानदार रहा......! यह युगल अपनी शादी के बाद पहली बार सिंह सदन की दहलीज से बाहर निकला......! मैनपुरी से चलकर गोरखपुर आना हम सबको अच्छा लगा...........यद्दपि इस युगल ने गोरखपुर में चार-पांच दिन ही बिताये मगर ऐसा लगा कि कितना वक्त हमने साथ गुज़ारा......! इशिका के बर्थ'डे से एक दिन पूर्व जोनी-प्रिया का आगमन हुआ.....अगले दिन 24 मई को पंकज भी गाजीपुर से आ गए......फिर तो धमाल मचना ही था......!


24 को इशिका का बर्थ'डे स्थानीय क्लार्क-इन होटल में मनाया गया....केक कटा डांस किया.......पार्टी हुयी........रात का पता ही नहीं चला कब गुज़र गयी......इस अवसर पर आना तो वैसे पिंटू-श्यामू- चिंटू-दिलीप को भी था मगर वे अपनी परीक्षाओं की वजह से नहीं आ पाए......उनकी कमी तो खली मगर इस कमी को पूरा किया संदीप ने....हमारी कुशीनगर यात्रा........! 25 मई को हम 'नीर निकुंज' वाटर पार्क गए......गर्मी के इस मौसम में 'नीर निकुंज' वाटर पार्क जाना बहुत ही सुखद और राहत देने वाल रहा......पूरे परिवार ने पांच घंटे तक अलग अलग स्लाईडों का मज़ा लिया......रेन डांस किया.......ओपन एयर रेस्टोरेंट में छोले भठूरे-पाव भाजी का मज़ा लिया......और अंत में बम्बइया चुस्की का स्वाद के तो क्या कहने ........सचमुच मज़ा आगया........ ! शाम को ताश खेलने बैठे, दो तीन बाज़ी ही हो पाई थी की अंजू का प्रपोजल आया कि ताश बंद करो......नयी मूवी आयी है 'काईट' ......उसे देखने चलते हैं......तुरंत हम सब तैयार हुए.......पहुँच गए 'काईट' देखने.........फिल्म तो बेकार थी मगर हम सबने फिल्म हाल में एन्जॉय किया......रात में फिर खाना बाहर ही लिया गया ........! देर रात सोये इस वादे के साथ की सुबह कुशीनगर चलना है........!

26 को सुबह कुशीनगर में फिर हमारा जत्था पहुंचा, वहां भी फुल मज़ा किया गया............कुशीनगर की यात्रा रिपोर्ट की रिपोर्ट जस्ट नीचे है जो पंकज ने प्रस्तुत की है ........ !

इन तीन दिनों में लूटा गया मज़ा अब तक हमें रोमांचित कर रहा है........27 की सुबह सब विदा हो गए.......पंकज गाजीपुर के लिए तो जोनी-प्रिया -संदीप मैनपुरी के लिए ......... अब उनको मैं, अंजू और इशी-लीची मिस कर रहे हैं..........खाली घर टीस दे रहा है !
*****PK

हमारी कुशीनगर यात्रा.......!



बुद्ध पूर्णिमा से ठीक एक दिन पूर्व कुशीनगर जाने का कार्यक्रम बन गया। यह कार्यक्रम दरअसल अनुज पंकज, हरदेश , अनुज वधू प्रिया और संदीप के आने पर बना। ये लोग पहली बार गोरखपुर आये थे, गोरखपुर और इसके आस-पास के दर्शनीय स्थलों को देखने की ललक ने कुशीनगर भ्रमण का कार्यक्रम बन गया। इस कार्यक्रम में मेरे मित्र स्वतंत्र गुप्ता का परिवार भी शामिल हो गया और इस तरह 15-20 लोगों का एक जत्था कुशीनगर के लिए रवाना हुआ।

सुबह 8:00 बजे हम सबने गोरखपुर आवास से कुशीनगर के लिए प्रस्थान किया। कुशीनगर, गोरखपुर से लगभग 50 किमी0 की दूरी पर स्थित है। तकरीबन एक-डेढ़ घंटे की यात्रा के बाद हम कुशीनगर पहुँचे। कुशीनगर के ‘पथिक गेस्ट हाउस’ में जलपान लेने के बाद हम लोग कुशीनगर के दर्शनार्थ निकल दिये।

कुशीनगर प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में से एक ‘मल्ल’ राज्य की राजधानी था। कुशीनगर में ही महात्मा बुद्ध ने परिनिर्वाण प्राप्त किया था। कहा जाता है कि मल्लों ने भगवान बुद्ध के अंतिम संस्कार का समुचित प्रबन्ध किया था। पाँचवीं शताब्दी में फाह्यान ने तथा सातवीं शताब्दी में ह्वेनसाँग ने कुशीनगर का भ्रमण किया था। इन यात्रियों ने अपने यात्रा विवरण में इस स्थान को निर्जन बताया।

कालान्तर में 1860-61 में कनिंघम द्वारा इस क्षेत्र की खुदाई की गई और इसके बाद कुशीनगर को महत्वपूर्ण बौद्ध स्थल माना गया। कनिंघम के उत्खनन के समय यहाँ पर 'माथा कुँवर का कोट' एवं 'रामाभार' नामक दो बड़े व कुछ अन्य छोटे टीले पाये गये। 1875-77 में कार्लाईल ने ,1896 में विंसेंट ने तथा 1910-12 में हीरानन्द शास्त्री द्वारा इस क्षेत्र का उत्खनन किया गया।

कुशीनगर के बौद्ध स्मारक वस्तुतः दो स्थानों में केन्द्रित है। शालवन जहाँ बुद्ध को परिनिर्वाण प्राप्त हुआ था और मुकुट बंधन चैत्य, जहाँ उनका दाह संस्कार हुआ था। परिनिर्वाण स्थल को अब ‘माथा कुँवर का कोट’ नाम से जाना जाता है, जबकि 'मुकुट बंधन चैत्य' का प्रतिनिधित्व आधुनिक रामाभार का टीला करता है। ‘माथा कुँवर का कोट’ के गर्भ में परिनिर्वाण मंदिर एवं मुख्य स्तूप छिपे हुए थे। ये दोनों स्तूप कुशीनगर के सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्मारक हैं। इनके चारों ओर समय-समय पर अनेक स्तूपों, चैत्यों तथा विहारों का निर्माण होता रहा। मुख्य परिनिर्वाण मंदिर की खुदाई कार्लाईल द्वारा 1876 में की गई थी। इस स्तूप में महात्मा बुद्ध की 21 फुट लेटी हुयी प्रतिमा स्थापित की गयी। इस प्रतिमा की विषेशता यह है कि तीन कोणों से देखने पर यह प्रतिमा अलग-अलग भाव प्रकट करती है।

बताया जाता है कि परिनिर्वाण प्रतिमा की स्थापना पाचवीं शताब्दी में हुयी किन्तु इसका रख-रखाव ऐसा है कि यह मंदिर बहुत ज्यादा प्राचीन नही लगता। इस मंदिर के चारों तरफ विहार बने हुए हैं। मंदिर के चारों तरफ बड़ी संख्या में वृक्ष इत्यादि भी लगाये गये हैं। पतली ईंटों और हरे-भरे वृक्षों से आच्छादित यह स्थल बहुत ही मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है।

परिनिर्वाण मंदिर से 200 मीटर आगे चलने पर माथा कुँवर का मंदिर मिलता है। इसका भी उत्खनन कार्लाईल ने किया था। यहीं बुद्ध ने परिनिर्वाण प्राप्त किया था। आगे चलने पर कुशीनगर-देवरिया मार्ग पर रामाभार नाम का स्तूप है। इस स्तूप के समीप एक नदी भी बहती है।कुशीनगर का पुरातात्विक महत्व यह भी है कि यहाँ से बड़ी मात्रा में पत्थर, मिट्टी तथा विभिन्न धातुओं की मूर्तियाँ, सिक्के, पात्र, नक्काषीदार ईंटें आदि प्राप्तु हुये हैं। कई मोहरें ऐसी भी है जिन पर धर्मचक्र तथा कुछ महत्वपूर्ण लेख अंकित है।

कुशीनगर में कई देशों के बौद्ध मंदिर भी हैं, जिनमें श्रीलंका, कोरिया, जापान, थाईलैण्ड आदि प्रमुख हैं। पर्यटकों की दृष्टि से यह ‘आफ सीजन’ था। इसलिए यहाँ पर विदेशी पर्यटक काफी कम संख्या में थे। थाईलैण्ड के ‘वाट थाई कुशीनारा छर्लभराज’ मंदिर का भी भ्रमण किया गया। यह मंदिर 1994 में बुद्धिस्टों द्वारा दिये गये दान से निर्मित हुआ है, इसका नामकरण थाईलैण्ड के 'महाराजाधिराज भूमिवोल अधुल्यादेज' के सिंहासनारूढ़ होने के स्वर्ण जयन्ती वर्ष के अवसर पर किया गया। यह मंदिर खूबसूरती के लिहाज से उत्कृष्ट है। इस मंदिर के प्रांगण में की गई बागवानी तो नयनाभिराम है।

इस ऐतिहासिक स्थल को देखना बहुत ही संतुष्टि दायक रहा। परिजनों को यह स्थल बहुत पसन्द आया। ‘आफ सीजन’ होने के कारण होटल्स में निष्क्रियता फैली पड़ी थी। पर्यटकों के अभाव में होटल भी अनुत्पादक इकाईयों की तरह बेजान से दिखे। सबसे अच्छे बताये जाने वाले होटल में हम लोग लंच के लिए पहुँचे तो वहाँ के मैनेजर ने बताया कि लंच तैयार नहीं है, खाने में हमें बमुश्किल चायनीज नूडल्स तथा क्रिस्पी चिली पनीर ही मिल सका। कुशीनगर में कोई बाजार भी नहीं है। यहाँ होटल और रेस्टोरेन्ट भी बड़ी संख्या में नहीं है। कहा जा सकता है कि इस नगर को पर्यटन की दृश्टि से और भी विकसित किये जाने की आवष्यकता है। बहरहाल इन कमियों के बावजूद हमारी कुशीनगर यात्रा अत्यन्त मनोरंजक और स्मरणीय रही।

''बुद्ध पूर्णिमा'' का पावन अवसर .. और कुशीनगर यात्रा





बुद्धं शरणम् गच्छामि ...

...इससे बेहतर और क्या हो सकता था कि '' बुद्ध पूर्णिमा '' के पावन अवसर पर हम पवित्र बौद्ध स्थल '' कुशीनगर '' में थे ! गोरखपुर से कोई एक घंटे की सड़क यात्रा के बाद भैया , भाभी , मैं , जोनी , प्रिया , ईशी और लीची इस पावन स्थल पर पहुंचे !

... हम सभी ने बुद्ध की आदम कद लेटी हुई दुर्लभ प्रतिमा के दर्शन किये ! सुरम्य प्राकृतिक वातावरण में चारों ओर '' धम्म चर्चा '' हो रही थी .....चारों ओर बिखरी प्राकृतिक सुन्दरता और आध्यात्मिक पवित्रता हमारे ह्रदय को निर्मल कर रही थी !

बुद्ध के व्यक्तित्व ..कृतित्व एवं दर्शन ने मेरे जीवन पर अमिट प्रभाव छोड़ा है ! निश्चय ही पूरे विश्व में आज तक उनसे बड़ा दार्शनिक ...महामानव ... आध्यात्मिक ... साहसी .. और न्यायप्रिय चिन्तक कोई नहीं है... वे ही थे जिन्होंने हमे दुखों से पूर्ण मुक्ति का सहज मार्ग दिखलाया !

... यहीं कुछ ही दूरी पर थाईलैंड के सहयोग से निर्मित खूबसूरत मंदिर भी हमने देखा ! सुनहरे रंग में लिपटे यह बौद्ध मंदिर बेहद भव्य थे ! यहाँ एक विशिष्ट शैली में वृक्षों को काटकर उन्हें ऐसा सुन्दर रूप दिया गया है ...जिसे हम अपलक बहुत देर तक निहारते ही रह गए ! भैया ने बताया कि कुशीनगर में एक विशाल बौद्ध स्मारक एवं संग्रहालय का प्रोजेक्ट प्रस्तावित है !

...हम सभी ने ये दुआ की कि कुशीनगर की पवित्रता एवं सुन्दरता ...सदैव यूँ ही अक्षुण रहे ! भगवान बुद्ध के चरणों में शीश रखकर हमने प्रभु का आशीर्वाद माँगा ! ... इस यात्रा में हमारे करीबी प्रिय मित्र श्री जयंत सिंह , श्री संजय राय एवं श्री स्वतंत्र कुमार भी साथ थे ! इस आनंद पूर्ण यात्रा की सुनहरी यादें हमारे दिलों में सदैव सुरक्षित रहेंगी ! !

* * * * * PANKAJ K. SINGH

Tuesday, May 25, 2010




सफर बांसगावं का.....

कु अधिकारी ऐसे होते हैं जो जनता के दिल से उतर जाते है...कुछ ऐसे भी होते हैं जो जनता के दिल में उतर जाते है...पवन भैया जनता के दिल में बसे हुए है....इस बात का अहसास २४ मई २०१० को मुझे तब हुआ जब में उनके साथ पहली बार बांसगावं पहुंचा....बांसगावं गोरखपुर की सबसे चर्चित और प्रदेश के सबसे बड़ी तहसील है.आई.ए.एस. की ट्रेनिग के दौरान ही उनको इस तहसील की जिम्मेदारी सौंपी गयी.



बांसगावं गोरखपूर की सबसे चर्चित...प्रशासनिक तौर पर कहें तो जिले की एक बिगडेल तहसील है ....इस तहसील में जाने पर मुझे पता चला की इस तहसील से कई नामबर राजनेता और माफियाँ का नाम जुड़ा है. इस तहसील का चार्ज लेने के बाद भैया ने तहसील स्तर पर कई यादगार काम किये ऐसा वहाँ की जनता ने मुझे बताया.



२४ मई को भैया का इस तहसील में बतौर एसडीएम आखिरी दिन था . आज वे इस तहसील का चार्ज छोड़ने आये थे...इस बात की जानकारी कुछ लोगों को ही थी लेकिन जैसे ही लोगों की मालूम हुआ की एसडीएम साहब चार्ज छोड़ कर जा रहे है ...लोग तहसील की और रुख करने लगे. देखते ही देखते भैया का ऑफिस लोगों की भीड़ से भरने लगा.जितनी भीड़ ऑफिस में थी उसकी चार गुनी भीड़ बाहर थी.नेता, इलाके के सभ्रांत नागरिक, किसान और तहसील का छोटा-बड़ा हर कर्मचारी उनसे मिलने आ रहा था. किसी अधिकारी की विदाई के समय के साथ मेरा ये पहला अनुभव था.



भीड़ में यही चर्चा थी की ''साहब ने ई तहसील को चम्कादीन " उनकी बात का मजमून यही था की एसडीएम के तौर पर उनका जनता से बेहद संवेदनशील और दिली रिश्ता था। भैया ने इस तहसील में अवेध कब्ज़े हटवाए.अराजक तत्त्वों को जेल भेजा..जनता की समस्या को निपटाया...इस तहसील में रहते हुए उन्होंने एक काम ऐसा किया जो इतिहास बन गया....सोहगौरा ताम्र पाषण बस्ती को फिर से पूरी दुनिया के सामने ला कर अपनी कुशल प्रशासनिक योग्यता का परिचय दिया.



देश भर की मीडिया ने उनके इस प्रयास को प्रमुखता से प्रसारित और प्रकाशित किया..लोगों से मिलने के बाद भइया ऑफिस से बहार निकल कर तहसील कोर्ट के बहार आगये.बहार लोगों की भीड़ देख कर वे थोड़े से भावुक होने लगे तो इसे तोड़ने के लिए मुझे कुछ दिखाने का इशारा किया...तहसील की एक दीवार पर उनका इशारा रुका...दीवार पर १९०५ लिखा था...भैया ने बताया कि १९०५ में अंग्रेजों ने इस तहसील को बनवाया था.....अब ये जर्जर नजर आने लगी है..भैया ने जानकारी दी कि इस तहसील को संरक्षित करने का एक प्रस्ताव उनके द्वारा शासन को भेजा जा चूका है...मुझे उनकी क़ाबलियत और दूरदर्शिता पर नाज़ हुआ.



लोगों की भीड़ लगातार बड रही थी...भैया बार बार चलने की कोसिस करते लोग उन्हें रोक लेते.आखिर में भैया ने एक नजर में पूरी तहसील को नजरों में भरने के बाद लोगो से चलने की अपील की...लोग भावुक होने लगे..इस दौरान भैया गाड़ी में बैठ गए..ड्राइवर को चलने का इशारा किया...गाड़ी चलने लगी...मैंने अपनी कर के शीशे से देखा की तहसील की जनता हाथ हिला रही थी....अलविदा कहने के लिए नहीं..... वे दुआ कर रहे थे अपने साहब को हमेशा दिल में बसाये रखने की.....


इस बारे में "आज" की एक रिपोर्ट देखने लायक है........!

***हृदेश सिंह

Monday, May 24, 2010

HAPPY BIRTHDAY ISHIKA.......


जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाये ..............................प्यारी प्यारी इशिका
तितली की तरह तुम कोमल हो
पानी की तरह तुम निर्मल हो

तुम पारी हो या जादूगरनी
तुम सब के दिल पर छाई हो

जब से आयी इस आँगन में
खुशियों ही खुशियाँ लाई हो

तुम हंसती रहो यूँ ही "इशिका"
तुम्हे जन्म दिवस की बधाई हो


"पिंटू चाचा एवं परिवार"

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इशिका.....जन्म दिन की शुभकामनाएँ........!
पिंटू चाचा ने तो तुम पर बहुत खूब लिखा ही है, इसके बाद कुछ और लिखने नहीं रह जाता.......!
इस ब्लॉग पर तुम्हारे बारे में कई पोस्ट आ चुकी हैं.....कमाल है......!

चाचाओं की ग़ज़ल हो, दादी- मम्मी की रुबाई हो,
प्यारी बेटी ईशिका जन्म दिन की बधाई हो !!


मेरी और तुम्हारी मम्मी- दादी की तरफ से भी मुबारक बाद....!

तुम्हारा पापा......!

ब्लॉग नोट


आज सभी ब्लोगर बंधुओं से अनुरोध है कि आज जो भी पोस्ट लिखी जाये वो
सिर्फ इशिका पर ही लिखी जाये आज का ब्लॉग इशिका के नाम...............
............HAPPY BIRTHDAY ISHIKA.........

उप संपादक - पुष्पेन्द्र

Sunday, May 23, 2010

पहेली-1 ....अब उत्तर हाज़िर है !


पहेली-1

अपने घरेलू ब्लाग की पहेली-1 पर समस्त पाठकों की प्रतिक्रियाएं उत्साह वर्धक रहीं। इस पहेली में पहला उत्तर ब्लाग के उप सम्पादक पिंटू का आया लेकिन यह उत्तर गलत था। इसके बाद परिवार के सदस्यों ने काफी माथापच्ची की और अपने-अपने उत्तर ब्लाग तथा मोबाईल पर भेजे। जैसा कि पहेली से स्पष्ट था कि पहेली के तीनों संकेत वाक्य अपने आप में कुछ न कुछ छिपाये हुए थे, किन्तु उत्तर दाताओं ने बहुत जल्दबाजी में सरसरी तौर पर पढ़ते हुए उत्तर दिये और इसका परिणाम यह हुआ कि सात उत्तर प्राप्त हुए जिनमें कि एक भी उत्तर सही नही मिला।

पहेली की पहली पंक्ति थी कि मेरा ताल्लुक एक ‘गाँव’ से है। यहाँ गाँव शब्द इनवर्टेड कामा में बन्द किया गया था, जिससे स्पष्ट था कि यह शब्द पहेली बुझाने में महत्वपूर्ण होगा, किन्तु पाठकों ने इस शब्द पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया। पाठक सिर्फ ‘ज्ञान’ और ‘चिकित्सकों को खुराक देने’ तक ही सीमित रहे। पहेली का उत्तर है- हमारी छोटी मामी।

उनका ताल्लुक एक गाँव अर्थात ‘पिपर गाँव’ से है। जो ज्ञान उनके पास है वह है- ज्ञान सिंह और अंतिम संकेत था कि वे चिकित्सकों को भी खुराक देने में भी उनकी कोई सानी नही है, तो स्पष्ट है कि वैद्य जी और डॉ0 रमन जैसे दो चिकित्सकों को भी वे अच्छी खुराक देती हैं।

बहरहाल आप सबका सक्रिय होना इस पहेली का अंतिम लक्ष्य था, जो सफल हुआ। सही उत्तर न मिला .............न सही .............अगली पहेलियों में यह कमी भी पूरी हो जायेगी।

Saturday, May 22, 2010

दुनिया पूरी लगती है.....!


लीजिये मैं भी हाज़िर हूँ......
इससे पहले कि मैं सिंह सदन के ब्लॉग पर "घर" के बारे में कुछ लिखूं .....शुरुआत अपनी एक नज़्म से कर रही हूँ.....यह नज़्म सिंह सदन के हरेक सदस्य के नाम समर्पित है.

आड़ी -तिरछी
रेखाओं के हेर फेर से
कितनी शक्लें
बन जाती हैं.
कुछ इनमें
जानी पहचानी सी लगती हैं,
इन शक्लों से ही तो
मेरी जीस्त सँवरती है
बेहतर होता
सबको ये सारी सूरतें
अपनी लगतीं
और
दुनिया आधी अधूरी नहीं पूरी अपनी सी लगती.


*****अंजू

सिल्वर जुबली सफलता ....एक और पड़ाव



... पर मंजिलें और भी हैं ..


'' ब्लॉग '' की '' सिल्वर जुबली '' पोस्ट पूरी होने पर सबसे पहले तो मेरी ओर से समस्त '' सिंह सदन '' परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं ! इससे बेहतर और क्या हो सकता था कि सिल्वर जुबली पोस्ट भी उसी महान शख्स को समर्पित थी जिसने सिंह सदन परिवार की बाकी सभी उपलब्धियों की तरह इस ब्लॉग की भी नींव डाली .... जी हाँ ....नन अदर देन .... द ग्रेट बड़े भैया ... श्री पवन कुमार !

अप्रैल को ब्लॉग की नींव पड़ी .... और २० मई को सिल्वर जुबली पोस्ट ..... वास्तव में यह एक बड़ी खुशनुमा यात्रा रही है ! इसके माध्यम से अपने दिल की बातें .... अपनों के दिलों तक ...बड़े प्यार और सम्मान के साथ पहुंचाई गयी हैं ! मैं इस माध्यम और सभी सुधी रचनाकारों एवं पाठकों का ह्रदय से
आभार व्यक्त करता हूँ !

..... हर्ष के इस अवसर पर ब्लॉग की सक्रियता और सफलता को लेकर जारी बहस आवश्यक भी है .... और अपरिहार्य भी ! आवश्यक ...इसलिए है कि रचनाधर्मिता का यह मंच मेम्बरान के लिए बेहद जरुरी है और अपरिहार्य ... यों कि बिना आवाज़ किये एक इतिहास रच जा रहा है !

ब्लॉग में दो तत्वों का होना अहम् है - निरंतरता एवं विविधता ! इन दोनों ही जरूरतों की पूर्ति के लिए यह नितांत आवश्यक है कि लेखकों कि संख्या बढे ..... हमारे तरकश में अभी कई तीर हैं .... इन्हें प्रेरित करने .... एवं प्रशिक्षण देने की जरूरत है !

'' सिंह सदन '' स्टेयरिंग कमेटी की कई दौर की ऑन लाइन मीटिंग इस दिशा में एक गंभीर कदम हैं ! .... भैया मेरे और पिंटू के बीच कई बार इस बिंदु पर चर्चा हुयी है ..... और कतिपय ठोस निर्णय लिए गए हैं... यथा -

. लेखकों की संख्या जो अभी मात्र ४ है इसे एक माह के अन्दर बढाकर १० किया जायेगा !

. पहले चरण में नए लेखक होंगे .... भाभी श्रीमती अंजू सिंह ... अनुज श्याम कान्त .... बड़े भाई श्री प्रमोद रत्न ....दिलीप कुमार ..... मामा श्री हरी कृष्ण ..... प्रिया .... ईशी ... एवं माँ श्रीमती शीला देवी !

. इन नए लेखकों को तकनीकी प्रशिक्षण देने के लिए एक '' वर्क शॉप '' का आयोजन किया जायेगा ...इस वर्क शॉप के प्रभारी जाने - माने '' आई. टी. गुरु '' हमारे प्रिय अनुज पुष्पेन्द्र सिंह होंगे !

. लेखकों को सूचना तकनीक के सभी आवश्यक संसाधन एवं जानकारियां नियमित रूप से उपलब्ध कराई जायेंगी !

. सीधे ब्लॉगर होने तक लेखक हस्त लिखित सामग्री भी उपलब्ध कराएँगे !

. बच्चे .. फोटो , कविता , कहानी , पहेली , चित्र भेजेंगे !

. '' पहेली प्रतियोगिता '' शुरू हो ही चुकी है ... कुछ और नई ज्ञान वर्धक मनोरंजक प्रस्तुतियां इसी माह से पोस्ट की जायेंगी !

. सिंह सदन के सभी सदस्य अपनी कामकाजी या सामाजिक - पारिवारिक यात्राओं को ''ट्रेव्लोग'' के रूप में लिखकर पेश करेंगे ! इन्हें शामिल करने से ब्लॉग में विविधता एवं नवीनता आएगी !

. '' बिग बॉस '' की भूमिका अति वांछनीय है .... उनके निर्देश समय - समय पर पारित होंगे .... इससे ब्लॉग और धारदार बनेगा !

१० . प्रत्येक माह सर्वश्रेष्ठ लेखकों - रचनाकारों को सम्मानित किया जायेगा !

११ . सिल्वर जुबली समारोह '' सिंह सदन- २ '' में आयाजित किया जाएगा !

१२ . '' फोटो गैलरी '' तैयार करने का दायित्व जोनी एवं पुष्पेन्द्र पर होगा ..... दो सप्ताह के अन्दर ये फोटो गैलरी लोंच की जाएगी !

१३ . पुष्पेन्द्र सिंह महीने वार महत्वपूर्ण तिथियों की सूची बनाकर एक सप्ताह के अन्दर पोस्ट करेंगे .... जिसमे सभी सदस्यों की जन्म तिथि ....विवाह तिथि अन्य उपलब्धियों का तिथि बार ब्यौरा होगा ताकि घटनाओं व शख्सियतों पर समयानुकूल पोस्ट प्रकाशित की जा सकें !

पुन: आप सभी प्रियजनों को '' सिल्वर जुबली '' पोस्ट पूरी होने पर ढेरों बधाइयाँ !!

* * * * * PANKAJ K. SINGH

Friday, May 21, 2010

पहेली क्रमांक - 1

पहेली क्रमांक 1
इस ब्लाग पर इस बार से ‘पहेली’ प्रतियोगिता का आरम्भ किया जा रहा है। पहेली किसी घटना अथवा किसी व्यक्ति पर आधारित होगी। पहेली संकेतों के रूप में रहेगी। इन संकेतों के आधार पर ही पहेली का उत्तर दिया जायेगा........... तो हाजिर है पहेली नं0-1
बताईये मैं कौन हूँ ?
1। मेरा ताल्लुक एक 'गाँव' से है। (यदि नही समझे तो संकेत संख्या 2 भी देख लें।)
2। मेरे पास जो ज्ञान है वो किसी और के पास कहाँ ? (उफ्फ अभी भी नही समझे तो अंतिम संकेत भी देख लें।)
3। चिकित्सकों को खुराक देने में मैं माहिर हूँ !
दिमाग लगाईये मेरे बारे में और बताइये कि मैं कौन हूँ ?