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Sunday, June 27, 2010

पापा तुस्सी ग्रेट हो....

मैंने लोगों को कई तरेह के शौक रखते हुए देखा है...लेकिन काम करने का शौक मैंने पापा में ही देखा है......उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा में उनको तीस साल से ज्यादा समय हो गया है.कहा जाए तो पूरी जिन्दगी उन्होंने नोकरी ही की....उनको देख कर लगता है जैसे पुलिस की नोकरी पापा जैसे लोगों के लिए ही बनायीं गयी है.वे चोबीस घंटे काम कर सकते है....और करते भी है.....नोकरी करते करते उनको मालूम ही नहीं पड़ा की हम चार भाई कब बड़े हो गए......पापा को नोकरी करते देख हम लोग बड़े हुए.....पापा बेहद कर्तव्य निष्ठ है....काम और नौकरी से उन्होंने कभी बेमानी नहीं की...ये गुण हम भाइयों को खून में मिला....पापा नौकरी में सफल है....''कसौली''जहां पापा पैदा हुए.कसौली आज भी मैनपुरी के पिछड़े गावं में शुमार है....पापा का बचपन इसी गावं में बीता.पापा को बचपन से है पढने का शौक था.सो पापा ने पढने के लिए मजदूरी भी की.गावं के ही पास बने एक भट्टे पर रोज़ पढाई से फुरसत पाने के बाद कड़ी मेहनत करते और उससे जो पैसा मिलता.पढाई पर खर्च करते.घर में पैसों के आभा में पांच भाइयों में सिर्फ पापा ही पढाई पूरी कर सके.बचपन के पढाई पूरी करने के लिए पापा सिरसागंज गए.यहाँ रह कर पापा ने कृषि विज्ञान की पढाई पूरी की.पापा की शादी चुकीं 15 -16 की उम्र में ही हो गयी थी.सो का खर्चा चलने के लिए पापा ने बच्चों की टयूशन देना का काम शुरू किया.इसी दौरान मैनपुरी से पुलिस की नौकरी निकली तो पापा ने फ़ौरन इसके लिए एप्लाई कर दिया...18 साल की उम्र में पापा पुलिस में गये.इसके बाद पापा ने नौकरी में कभी पीछे मुड के नहीं देखा,,,,सिपाही से ''डी वाई एसपी ''तक का सफर उन्होंने कब पूरा कर लिया पता ही नहीं चला.सरकारी नौकरी...खास तौर पर पुलिस सेवा में यहाँ तक आना फर्श से अर्श तक पहुचने जैसा है.पापा नेहम चारों भाइयों की तालीम पर खास ध्यान दिया,जिसका नतीजा ये रहा की हम भाइयों को नौकरी के लिए खास स्ट्रगल नहीं करना पड़ा.मुझे खूब याद है जब पापा रात में गश्त करके वापिस घर आते थे तो बड़े भैया को उठा कर रात में ही पढ़ना शुरू कर देते थे....कभी कभी तो पापा भैया से केस डायरी की रफ तक लिखवाते थे.इसका नतीजा ये रहा की भैया को बचपन में आई पी सी की जटिल से जटिल धाराएँ याद हो गयीं.भैया को इसका फायदा ''एलएलबी''की पढाई के दौरान तो मिला ही साथ ही आई. ए.एस.बनने के बाद फील्ड में काम करते समय इसका जबरदस्त लाभ मिला.पंकज भैया को भी पापा ने गणित खूब पढाई.भैया इतने तेज़ हो गए की गणित की कितनी ही बड़ी संख्या आप बोले भैया केलकुलेटर से जल्दी आंसर बता देते हैं.पापा की गणित और संस्कृत बहुत अच्छी है.हाई स्कूल तक हम चारो भाइयों को खूब पढाया.पापा ने मुझे भी पढाया..गणित और संस्कृत में उन्ही की वजह से में हाई स्कूल में पास हो सका.पापा के पढ़ाने स्टायल बड़ा ही रोचक है.पापा को बात बात पर गलियाँ देने की आदद है.पुलिस वालों के साथ अक्सर ये दिक्कत होती है...पापा के साथ भी हैं.पापा की इसी खास तरीके के चलते एक्साम के दिनों में सिंह सदन में बच्चों की भीड़ लगी रहती थी.पापा लिखने पढने में बेहद होशियार और तेज़ रहे है.एफ.आइ.आर.की भाषा लिखने में उन्हें महारत हासिल है.अपराधी उनकी लिखी फ़ाइनल रिपोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक में ज़मानत नहीं पा सके. पापा ने जो लिख दिया फिर दस्तावेज ही बन गया.एक वाक्या गाज़ियाबाद का पापा की वहाँ पोस्टिंग थी.एक ट्रेनी सब इंस्पेक्टर उनके साथ ट्रेनिग करने आये.ट्रेनिग के दौरान सब इंस्पेक्टर पापा को अक्सर बिना बताये चले जाते थे.पापा ने कई बार ऐसा न करने की हिदायात भी दी..लेकिन उन पर पापा की हिदायात का कोई असर नहीं हुआ.एक दिन पापा ने उनकी ट्रेनिग का रिपोर्ट कार्ड बनाया.जिसका मज़मून कुछ इस तरह से था कि''उक्त उप निरीक्षक सरकारी कार्य में कतई रूचि नहीं लेता है.अत भविष्य में उक्त उप निरीक्षक को जिम्मेदारी वाले पदों पर न रखा जाए...वो दिन है और आज का दिन है इस मज़मून को पढ़ कर अंदाज़ा लगा सकते है दरोगा जी का क्या हुआ होगा.पापा को रिश्तेदारों को परखने की ग़जब की क्षमता है. पापा बेहद अनुशासन पसंद है.गंदगी से नफरत है.हँसते नहीं है.अपनी धुन में रहना उनको पसंद है.दुनियादारी के मामले में पापा शुन्य हैं.पापा बेहद खुद्दार हैं.जो भी पाया अपनी मेहनत से हासिल किया.घर के बहुत से लोग उनको समझ नहीं पाए. आज भी उनका संघर्ष जारी है....लेकिन पापा मुझे मालूम है हार नहीं मानोगे....आप से हम भाइयों ने यही तो सिखा है.पापा तुस्सी ग्रेट हो....
****हृदेश सिंह ****

5 comments:

psingh said...

जोनी भाई
बहुत ही अच्छा लिखा फूफा जी वाकई बहुत ही महान इन्सान है
पुलिस कि नौकरी में होने के बाबजूद एक बेहद न्याय प्रिय एवं इमानदार इन्सान है
एक छोटे से परिवार से उठकर आज वे और उनका परिवार प्रदेश में सबसे टॉप पर है
मै उनके जज्बे की क़द्र करता हूँ | और उन्हें दिल से सेलूट करता हूँ |

pankaj said...

papa is really an efficient personal.he gave his 80 percent life to govt. service . well done DAD.

amit said...

भैया क्या बात है बहुत खूब लिखा है अंकल जी क बारे मै -----------------------------
वास्तव मै अंकल जी का मिजाज तेज तर्रार है,और वो सीधी और सही बात के फेवर मै रहते है चाहे वो घर का हो या बाहर का.
उनके इसी शख्त फैसले से बहुत से लोग उन्हें गलत समझते है,लेकिन वो अपनी जगह बिलकुल सही है,
और रही बात गाली क़ी तो वो तो उनका तकिया कलाम है .जोकि उनपे खूब फबता है ,वो गाली के बगैर अधूरे है ,वो जहा जाते है वहा क़ी महफ़िल मै चार चाँद लगा देते है.


चिंटू

SINGHSADAN said...

पापा के बारे में ठीक लिखा तुमने.......! एक बात जरूर कहूँगा "यूकिलिप्टस पेड़ होने का दावा भले कर ले ..... छाया देना उसके बस की बात नहीं."

सादर
*****PK

ShyamKant said...

पापा के बारे में पढके बहुत अच्छा लगा .....
बेशक वे हमारे लिए कम समय निकाल पाते हों किन्तु हम सब उनको हर समय याद करते रहते हैं !!!!!
जोनी भैया उनकी यादों में ले जाने के लिए बहुत - बहुत धन्यबाद ........