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Thursday, February 2, 2012

रावण!रावण!रावण!

रावण के बारे में आप सभी लोग पर्याप्त ज्ञान रखतेहैं !
वह सदेव कुछ नया करने की कोशिश में रहता था
पर क्या आपको पता है कि रावण अपने समय से कई गुना आगे था
वह तीन ऐसे मुद्दों पर गहन मंथन कर रहा था ,
जिन  पर आज तीव्र बहस चल रही है
क्या आपको पता हैअगर नहीं तो
सोचिये !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
दिमाग पर जोर डालिए
और सारे ग्रन्थ पलट के देखिये
तो शायद आपको जवाब मिल जायेगा
कदम्ब रामायण में एक जगह रावण अपने अंत से पूर्व
भगवान् राम से इस बात का जिक्र करता है
और विभीषण को भी इस बावत आगाह करता है
                      अब सोचने वाली बात ये है कि क्या ये आज के दौर में पूरे हो पाए
जहाँ तक म्रतुन्जय का प्रश्न है आज के दौर में क्लोनिंग जैसे प्रयास हुए
पर ये मौत पर पूरी तरह विजय नहीं पाते !
दूसरा समुद्र के पानी को पीने योग्य बनाने के प्रयास हुए ,
सफल भी रहे पर महंगे होने के कारण पूरी तरह लागू न हो सके
भारत में लक्षदीप के कवरत्ती नमक स्थान पर समुद्र के पानी को पीने योग्य बनाया गया है
तीसरा प्रश्न तो आज सबसे बड़ा प्रश्न बना हुआ है
कि किस तरह सूर्य को उर्जा रूप में हम प्रयोग कर सकें
अब बताओ है न रावण कि सोच कई गुना आगे
श्यामकांत

5 comments:

Anonymous said...

....SINCE I WAS NOT A PART OF THAT ERA OR MAY BE I WAS.. BUT I HAVN'T REMEMBER EVEN NOW .
BY THE WAY ..IF REALLY RAVAN HAD THE SAME GREAT THOUGHTS & VISION AS YOU HAVE MENTIONED.. WE MUST GIVE HIM A STANDING OVATION.
VERY WELL WRITTEN... DEAR SUPAR COP
***** PANKAJ K. SINGH

Anonymous said...

ab tak ki achhi likhio poston main ek

hirdesh

psingh said...

bahut accha shyamu...
bat me dam hai ravan vakai ek vaigyanik tha ek gantagya bhya kyonki jyotish jisme use maharath asil tha bagair ganit ke nahi ho sakta aur charon vedon ka gyan tha use samjhana samudra me sui dhidhne ke barabar hai

Anonymous said...

रावण के विषय में नए नजरिये से सोचना पड़ेगा...... नया विश्लेषण अच्छा लगा.क्या इस पोस्ट की हार्ड कोपी "वैद्य" जी को प्रेषित की जा सकती है.......!!!!!!

PK

sachin singh said...

REALLY INCREDIBLE POST.
I SALUTE YOUR ATTITUDE AND STYLE
OF WRITTING.


SACHIN SINGH