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Saturday, May 29, 2010

एक शाम ... चेतन के साथ..

सुबह-सुबह स्थानीय मित्र शोभित अग्रवाल ने मोबाईल पर फोन किया, पूछा आज शाम का क्या प्रोग्राम है ? प्रतिउत्तर में मैंने कहा कि वैसे तो कुछ खास नहीं......। शोभित ने कहा कि यदि शाम को कहीं किसी शासकीय कार्य में व्यस्त न हों तो शाम को एक डिनर पार्टी में आप को आमंत्रित करना चाहता हूँ। मैंने शोभित से इस पार्टी की वजह जाननी चाही तो शोभित ने कहा कि किसी कोचिंग संस्थान की लांन्चिग प्रोग्राम में मशहूर लेखक चेतन भगत आ रहे हैं, प्रोग्राम तो कल है, चूँकि चेतन भगत आज खाली हैं, तो यह कार्यक्रम बना है कि उनके साथ हम लोग डिनर पर चलंे।

शोभित ने बड़ी सहजता से यह कार्यक्रम बना लिया था, जबकि मैं जानता था कि चेतन भगत आज के समय के सबसे ज्यादा बिकने और पढ़े जाने वाले लेखक हैं। विगत 5-7 सालों में उनके लेखन की प्रसिद्धि चारों ओर फैली है। वे आज युवा वर्ग में सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले हिन्दुस्तानी अंग्रेजी लेखक हैं। युवाओं को उनकी किताबें सम्मोहित सी करती हैं। उनको हाल ही में मीडिया ने भी काफी प्रचारित व प्रसारित किया है। ‘‘थ्री इडियट्स’’ जैसी सफल हिन्दी फिल्म की कहानी लिखने वाले मामले में विधु विनोद चोपड़ा और उनकी कंट्रोवर्सी अभी जे़हन में ताजा बनी हुई है।

बहरहाल यह सारी वज़हें तो एक तरफ............ चेतन भगत से से मिलने की उत्कंठा ने मुझे सारे काम दर-किनार कर उनसे मिलने के लिए प्रेरित किया। मैंने शोभित से कहा कि शाम को मैं पार्टी में आ रहा हूँ। अपने तमिल मित्र नवीन कुमार जी0एस0 के साथ शाम 8:30 बजे निर्धारित स्थल पर मैं पहुँच गया। जिस होटल में यह डिनर पार्टी थी, उसी होटल में युवा लेखक चेतन भगत रूके हुए भी थे। तकरीबन 30-35 लोग इस डिनर पार्टी में आमंत्रित थे। इन आमंत्रित लोगों में भी अधिकांश वही थे, जिन्होंने अपनी कोचिंग की लॉन्चिग में चेतन भगत को बुलाया था। 10 मिनट बाद चेतन भगत डाइनिंग हॉल में आ गये। चेतन भगत बिल्कुल टीन एजर युवा की भांति हॉल में आये, नीली जीन्स पर काले रंग की शार्ट टी-शर्ट और रिमलेस चश्मा लगाये हुए चेतन भगत पहली मुलाकात में ही बिल्कुल अपने से लगे। ऐसा लगा ही नहीं कि चेतन भगत से हम पहली बार मिल रहे हैं।

हम लोग खाना भी लेते रहे और चेतन भगत से बात-चीत भी करते रहे, बात-चीत के दौरान उनकी जीवन कथा और उसके बाद उनके लेखन पर भी चर्चा हुई। बात-चीत के दौरान पता चला कि 22 अप्रैल 1974 को जन्मे चेतन भगत की आरम्भिक शिक्षा-दीक्षा दिल्ली के आर्मी स्कूल में हुई, उसके बाद उन्होंने आई0आई0टी0 दिल्ली से मैकेनिकल इन्जिीनियरिंग में बी0-टेक किया, तदोपरान्त आई0आई0एम0 अहमदाबाद से प्रबन्धन की डिग्री हासिल की। अहमदाबाद में प्रबन्धन की डिग्री लेने के दौरान ही दक्षिण भारतीय सहपाठी अनुशा से उन्हें लगाव हो गया जो बाद में उनकी पत्नी बनीं। 1997 में प्रबन्धन की डिग्री पाने के बाद वे कुछ दिनों सिटी बैंक में भी कार्यरत रहे, लेकिन उनकी असली इच्छा तो लेखन की थी, सो लेखन के मैदान में कूद पड़े। एक बार जब लेखन शुरू किया तो फिर पीछे मुड़कर नही देखा।

उनकी पहली किताब Five Point Someone उनके अपने आई0आई0टी0 छात्र जीवन पर आधारित थी। यह किताब इतनी ज्यादा पसंद की गयी कि देश के अधिकांश अंग्रेजी दॉ युवक-युवतियों के लिए यह किसी आवश्यक ‘टेक्स्ट बुक’ सरीखी हो गयी। गत वर्ष की सबसे हिट हिन्दी फिल्म ‘‘थ्री इडियट्स’’ इसी रचना पर आधारित बतायी जाती है।


उनकी दूसरी किताब 2005 में One night@ the call center आयी। यह किताब कॉल सेन्टर में काम करने वाले ऐसे 6 व्यक्तियों के मनोभावों को प्रकट करती थीं, जिन्हें एक रात ‘‘भगवान’’ से कॉल आती है। चेतन भगत की इस किताब पर भी एक पिक्चर बनी, जिसका नाम था ‘‘हैलो’’, इस पिक्चर में सलमान खान, सुहेल खान आदि थे। लगभग 3 साल बाद 2008 में उनकी किताब The 3 Mistakes of My Life आयी। यह किताब क्रिकेट, राजनीति और प्यार के त्रिकोण पर आधारित थी और मजे की बात यह थी कि इस किताब पर भी फिल्म बनाये जाने की तैयारी है।

उनकी अभी तक के लेखन में अंतिम कृति 2 States – The Story of my marriage है जो उनके ही जीवन पर ही आधारित है। यह किताब मुझे इसलिए भी अच्छी लगी कि इस किताब में भारत के अखण्ड-एकता के स्वरूप के दर्शन होते हैं। चूँकि चेतन भगत की पत्नी दक्षिण भारतीय हैं, जाहिर है कि सांस्कृतिक-क्षेत्रीय विविधताओं से रोजाना वे दो-चार होते ही होंगे। इस किताब में उसी विरोधाभाषों का चित्रण बड़े ही रोचक ढंग से किया गया है। इस किताब में उत्तर भारतीय पात्र ‘वर्मा’ तथा दक्षिण भारतीय पात्र ‘स्वामीनाथन’ के बीच क्षेत्रीय विवादों का वार्तालाप बड़े ही दिलचस्प ढंग से लिखा गया है।


चेतन भगत आज-कल दैनिक भाष्कर और टाइम्स ऑफ इण्डिया में स्तम्भकार के रूप में भी लेखन कर रहे हैं। वे अपने ब्लाग पर भी कॉफी सक्रिय हैं। हमेशा चेहरे पर मुस्कान ओढ़े रहने वाले शान्तचित्त वाले चेतन भगत से अनौपचारिक बात-चीत करना बहुत अच्छा लगा। उनकी यह साफगोई मुझे बहुत प्रभावित कर गयी कि ‘‘मैं बहुत साधारण बोल-चाल वाली अंग्रेजी का इस्तेमाल अपनी रचनाओं में करता हूँ, ताकि बहुत ज्यादा गम्भीर हुए बिना अपनी बात आम आदमी तक पहुँचा सकूं।’’



वे युवाओं को अंग्रेजी सीखने के लिए भी प्रेरित करते हैं। अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि ‘‘हिन्दी और अंग्रेजी में सास-बहू का रिश्ता है और आज का प्रत्येक युवा एक ऐसा घरेलू लड़का है जिसे माँ भी चाहिए और पत्नी भी। भले ही सास-बहू में तकरार चलती रहे। ’’ मैंने जब चेतन से यह जानना चाहा कि आई0आई0टी0 और फिर आई0आई0एम0 से एम0बी0ए0 और उसके बाद लेखन........... क्या यह बदलाव कुछ ज्यादा नहीं है? चेतन भगत मुस्कुराते हुए बोले जिस काम में खुद को संतुष्टि मिले आदमी को वही काम करना चाहिए।



मैंने उनसे जब यह जानना चाहा तो अगला प्रोजेक्ट क्या है, तो वे बोले ‘‘भाई, अभी डिलीवरी प्रोसेस से बाहर आया हूँ और आप पूँछ रहे हैं कि अगला बेबी कब होगा? अभी 2 States – The Story of my marriage रिलीज हुई है, थोड़ा आराम कर लू तब नये प्रोजेक्ट के बारे में सोचूंगा।’’ और वे इतना कहकर खिलखिला कर हँस पड़ते हैं।



चेतन भगत से यह मुलाकात निश्चित रूप से इसलिए याद रहेगी कि एक 35-36 वर्षीय युवक किस तरह अपने लक्ष्य निर्धारित करता है और उन्हें पाता भी है। बौद्धिकता किसी जगह-काल की मोहताज नहीं होती। वे चाहे आई0आई0टी0 में रहे हों या आई0आई0एम0 में और अब लेखन में..........हर देशकाल-परिस्थिति में वे एक दम फिट हैं और अपने होने का पुख्ता सबूत भी देते हैं। दावे के साथ कहा जा सकता है कि चेतन भगत के लेखन की गम्भीरता को लेकर भले ही प्रश्न चिन्ह उठाये जाये, लेकिन आज के युवा दिमाग में वे एक शाइनिंग स्टार हैं, जिन्हें बहुत आगे तक जाना है।

* * * * * पकु

2 comments:

psingh said...

भैया
बहुत खूब ये मुलाकात लाजबाब रही
चेतन भगत जी इतने बड़े लेखक होने के
साथ साथ एक अच्छे इन्सान है भी है
जानकर अच्छा लगा
चेतन जी की नई पुस्तक के लिए बधाई .....
आपको मेरा प्रणाम ................

शिवम् मिश्रा said...

बहुत बढ़िया लगी यह मुलाकात ............... बस २-४ तस्वीरें भी होती पार्टी की तो और भी आनंद आ जाता !!
लगे रहिये !! शुभकामनाएं !!