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Thursday, July 22, 2010

RETRO PARADE - 1986



याद न जाए... बीते दिनों की... !


वर्ष 1986 का प्रारंभ - अचलगंज (उन्नाव)
वर्ष 1986 का समापन - अचलगंज (उन्नाव)

वर्ष1986 हमारे बालपन का स्वर्णकाल कहा जा सकता है ! स्कूल... वही.. पंडित अवध बिहारी ! प्रिंसिपल ... श्री कमल पाण्डे !

इस वर्ष भैया क्लास ७ से ८ में पहुँच गए... और मैं ४ से ५ में ! अध्ययन क्षेत्र में सुधार की द्रष्टि से हम दोनों भाइयों के लिए यह वर्ष बेहद महत्त्व का सिद्ध हुआ ! कई श्रेष्ठ गुरुजनों का आशीर्वाद और संरक्षण मिलने से मानो हम दोनों का जीवन ही बदल गया ! हर रोज ही हम कुछ न कुछ नया सीखते ! इंग्लिश , हिंदी , मेथ्स , विज्ञान सभी विषयों में हम शनै:- शनै: पारंगत होते चले गए !

कला क्षेत्र में भी हमारी रुचियाँ बेहद परिष्कृत हो रही थीं ! मुझे चित्रकला में आनंद मिलने लगा ! मेरी सभी कोपियाँ एतिहासिक चित्रों से रंगीन रहती थीं ! प्राचीन और मध्य कालीन भारत की एतिहासिक घटनाओं के चित्र बनाना मेरी परम रूचि का कार्य बन गया ! एक्साम में उत्तर लिखते समय चित्र मैं अवश्य ही बनाता था ! हाँ ...परन्तु मैं काफी शर्मीला था ! प्रत्येक शनिवार को होने वाला बाल दिवस मेरे लिए एक मुसीबत ही था ....जिसमे बच्चों को मंच पर परफोर्म करना होता था ! भैया जहां एक से बढ़कर एक गीत सुनाते ...वहीँ मैं बगलें झांकता मिलता ! एक बार मैं बड़ी मुश्किल से बड़ी तैयारी के बाद कुछ लाइनें गा पाया ! गीत था ... ''है प्रीत जहाँ की रीत सदा '' !

मुझे इस बात का बड़ा गर्व रहता था.... कि मेरे बड़े भाई क्लास ८ जैसी बड़ी कक्षा में पढ़ते हैं.... और काफी सीनिअर लड़के मेरे घर आते रहते हैं ! यही नहीं पिताश्री भी अक्सर स्कूल पहुँच जाते थे .... और अक्सर भैया की क्लास में पढ़ाते थे ! इससे पूरे स्कूल में हलचल रहती थी ! कुल मिलाकर स्कूल में मेरा ''सेलेब्रिटी स्टेटस'' स्थापित था ! बड़े आनंद और गौरव के दिन थे वह !

हमारे घर के नजदीक एक अत्यंत संवेदनशील कवि... श्री विशेश्वर जी रहते थे ....जिनकी कविताओं का पाठ भैया द्वारा अक्सर स्कूल में होता था ! उनकी इंदिरा गाँधी पर लिखी और भैया द्वारा स्वर बद्ध की गयी कविता ने तो मानो इतिहास ही रच दिया था ! पूरे क्षेत्र में दूर- दूर तक इस कविता की धूम मच गयी थी ...और हजारों लोगो ने इसे लाइव सुना था !

क्रिकेट और बाल साहित्य हमारी रूचि के नए क्षेत्र बने ! रोज शाम को एवं अवकाश के दिन क्रिकेट मैच होना तय था ! अधिक सुविधाओं का वह समय न था ! लकड़ी के हाथ से बने बैट का प्रयोग होता था ! मैच में विवाद बहुत अधिक होते थे ....और अधिकांश मैच ''अनिर्णय'' का शिकार हो जाते थे ! मुझे क्रिकेट की टेर्मिनालोजी समझने में साल भर लग गया ...मसलन मेंडन ओवर , वन डे और टेस्ट मैच में अंतर , एल. बी. डब्लू. , लिमिटेड ओवर आदि! बहरहाल क्रिकेट हमारी रग - रग में बस गया ! क्रिकेट की लाइव कमेंट्री भी अब हमे रुचिकर लगने लगी थी !

बाल साहित्य भी हमारा दूसरा ''पैसन'' था ! अचलगंज जगह छोटी थी पर हम दोनों भाई ढूंढ - ढूंढ कर पराग , बाल भारती , नंदन , लोट- पोट , मधु मुस्कान , चन्दा मामा और कोमिक्स ले ही आते थे ! प्रभात और नूतन कोमिक्स उस समय हम काफी चाव से पढ़ते थे ! खासकर राजा और राजकुमारों की कथाओं का तो मैं दीवाना था !

मनोरंजन के अन्य साधनों में उस समय केवल रेडियो ही था ....और रेडियो से हमारे पूरे परिवार को ही बड़ा प्रेम था ! सबकी पसंद की अलग - अलग कार्यक्रम होते थे ! सुबह माँ द्वारा भजन लगा दिए जाते ...और उसके बाद ''विविध भारती'' की रंगीन दुनिया में सभी खो जाते ! छाया गीत... भूले -बिसरे गीत ...मुझे बचपन से अच्छे लगते रहे हैं ! ''चित्रलोक'' तो सभी का प्रिय कार्यक्रम था ! इसी से नयी फिल्मों के विषय में जानकारी हम पाते थे ! अवकाश के दिनों में तो रेडियो ही हमारा साथी होता था ! ''जयमाला'' और सभी ''प्रायोजित कार्यक्रम'' हम पूरी तरह तन्मय होकर सुनते थे !

हमारे इंग्लिश के अध्यापक हमे रेडियो पर इंग्लिश समाचार सुनने के निर्देश देते... तो हम उनकी बुद्धिमत्ता का लोहा माने बिना न रह पाते ....और हाँ उस समय के हमारे आइकोन प्रमोद भैया के विषय में चर्चा बहुत आवश्यक है ! वे जब गाँव से आते थे तो हम उनके जादुई आकर्षण से निहाल रहते थे ! उनके लिखे पत्र जवाहर लाल नेहरु शैली के होते थे ! हमारे सभी टीचर उनके दोस्त होते थे ....इस बात से हम बहुत ही इम्प्रेस होते थे ! उनके पास जैसे ज्ञान का विशाल खजाना होता था ...और हम दोनों भाई उसे लूट लेने के लिए हर पल घात लगाये रहते थे !

* * * * * PANKAJ K. SINGH

2 comments:

amit said...

hi bhaiya charan sparsh,

kya bat hai bhaiya kya khub kaha.kash mai us pal ko aankho se dekh pata,kya maja aata hoga,jb sunne mai itna rochak hai to live mai kya hua hoga.
aur apka bgle dekhna kya bat hai.


chintoo

SINGHSADAN said...

हो हो .....मैं तो भूल ही गया था.....अच्छा याद दिलाया.....गीत था......सब याद करो मिल नमन करो......!
*****PK