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Monday, January 2, 2012

अरे दीवानों मुझे पहचानो ..............

दुनियां की नज़रों ने मुझको यहाँ जो भी माना है वो मै नहीं .........
दुश्मन की दुश्मन हूँ मै दुश्मन के जो छक्के छुड़ा दे जो .............
मै हूँ वोही .........
बहूओं को तितर बितर कर दे जो मै हूँ वोही ............................
अरे मै हूँ मै हूँ मै हूँ अम्मा डोन
.......................................................................................
.........................................................................................
इसी के साथ अब आप लोग गन (कलम) हाथों में लेकर ,
लिख भेजिए की अम्मा डोन अपने गुर्गों  पर क्या हुक्म  फरमा रहीं हैं
और गुर्गों के मन में क्या चल रहा है ...........................................
जरा जल्दी करिए  बात सोलिड और संवाद शैली  में हो तो मज़ा ही कुछ और है
अच्छा चलता हूँ बीडू  हायं साला
श्यामकांत

3 comments:

SINGHSADAN said...

टिंकूटेंशनफ्री( पहला गुर्गा)-- अम्मा भाई.. आपके ऑर्डर पे अपुन, बिंदास, रापचिक, आईडिया लेके आईला है.. बिंदास आपकी स्टाइल के माफिक!

अम्मा डोन-- ऐ चल चल ज्यादती मस्का मार के मगज माजी नहीं करने का.. तेरे आईडिया से अपुन की कंपनी पहलेइच लोस उठा रहेली है! ऐ चास्मिस सांडो.. तू बोल ना रे !

चास्मिस सांडो--- अम्मा भाई, टेंशन नहीं लेने का अपुन है ना! अबकी बार बिना आईडियाइच के बैंक लूटेगा और पुलिस के आने के पहलेइच कलती मार लेगा ! एक दम मस्त, बिंदास, रापचिक आईडिया है ना अम्मा भाई !
***** PANKAJ K. SINGH

psingh said...

(अम्मा द डोन की विचारधारा समय के साथ बदल गयी है क्यों की अम्मा द डोन समय के साथ चलती है पीछे नहीं )
अम्मा द डोन का फरमान है अपने गुर्गों के लिए -पढ़ लेउ नाइ तो कहूं ठिकाना नाइ तुमाओ
अगर पढ़ लिख न पाए तो जा घर में घुस नाइ सकत समझे |
गुर्गे बेचारे मुर्गे बन कर इतना ही बो पाए - जी अम्मा जी

psingh said...

गुर्गा सेक - अम्मा डोन सुना है अपने सब पर राज किया है |
अम्मा डोन - हाँ अक्खा........... मेदेपुर पे |
गुर्गा टेंक - लेकिन अम्मा सबराय जा खबर है की अम्मा डोन अपनी छोटी बहु से डर गई |
अम्मा डोन - अरे चुपकां रहो..........किन्ने कही जा बात ....... सही इशारा होए श्रीकिशन आन्देव
लेकिन जा बात सही भी है बहु को काबू में करने की तमन्ना मन में रहगयी....
काबू में तो कर लेते लेकिन मेरो लड़का ही बेकार निकरगाओ | लेकिन जा बात घर के बहार न जाने पाए
समझे |