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Saturday, January 21, 2012

स्ट्रेट ड्राइव..

एक दार्शनिक.. देव आनंद 

volume...1 
                        ये रात.. ये चांदनी फिर कहाँ ...
                        ....... पीछे ३ दिसंबर २०११ को एक महान कर्मयोगी और दार्शनिक देव आनंद साहब हमें छोड़ कर चले गए मैंने उन्हें  एक महान कर्मयोगी और दार्शनिक इसलिए कहा है क्योंकि ज्यादातर लोग उन्हें मात्र एक लोकप्रिय अभिनेता मात्र ही मान कर समाधान कर लेते हैं ! वास्तव में देव आनंद साहब का पूरा जीवन ,पूरा कैरियर इस बात का गवाह है की वे कितनी ऊँची सोच और दर्शन से युक्त  और जीवन के सभी वास्तविक सत्यों का पूर्ण बोध प्राप्त एक महान कर्मयोगी थे ! 

 जीवन के सभी वास्तविक सत्यों का पूर्ण बोध....
                                          
                         वे अपने बेहतरीन अतीत की नास्टेल्जिया से पुर्णतः मुक्त थे और सदैव एक सच्चे  कर्मयोगी और दार्शनिक की भांति निरंतर आगे की और देखते थे !उन्होंने अपने जीवन काल में अपनी आँखों के सामने अपने सार्वाधिक प्रिय सगे भाइयों चेतन आनंद और विजय आनंद (गोल्डी साहब )अपने प्रिय  मित्र गुरु दत्त साहब ,मोहम्मद रफ़ी, हेमंत कुमार, किशोर कुमार, आर डी बर्मन   और एस डी बर्मन  जैसे बेहद करीबी हमराहों को अपना साथ छोड़ते देखा ! काम उनके लिए नशा था जिसमे वे अपनी सभी फिक्रों को धुएं की तरह उड़ा डालते थे !
                        
          कर्म क्षेत्रे .....                                     
                             देव आनंद काम की तलाश में मुंबई आये और उन्होंने मिलट्री सेंसर ऑफिस में १६० रुपये प्रति माह के वेतन पर काम की शुरुआत की! शीघ्र ही उन्हें प्रभात टाकीज़ एक फिल्म हम एक हैं में काम करने का मौका मिला! और पूना में शूटिंग के वक़्त उनकी दोस्ती अपने ज़माने के सुपर स्टार गुरु दत्त से हो गयी! कुछ समय बाद अशोक कुमार के द्वारा उन्हें एक फिल्म में बड़ा ब्रेक मिला! उन्हें बॉम्बे टाकीज़ प्रोडक्शन की फिल्म ज़िद्दी में मुख्य भूमिका प्राप्त हुई, और इस फिल्म में उनकी सहकारा थीं कामिनी कौशल, ये फिल्म १९४८ में रिलीज़ हुई और सफल भी हुई! १९४९ में देव आनंद ने अपनी एक फिल्म कम्पनी बनाई, जिसका नाम नवकेतन रखा गया, इस तरह अब वो फिल्म निर्माता बन गए! देव आनंद साहब ने अपने मित्र गुरुदत्त का डाइरेक्टर के रूप में चयन किया और एक फिल्म का निर्माण किया, जिसका नाम था बाज़ी, ये फिल्म १९५१ में प्रदर्शित हुई और काफी सफ़ल हुई!
      नए स्टाइल के जनक ...                                               
                                         देव साहब नें कुछ भूमिकाएं निभाई जो कुछ नकरात्मक शेड लिए थीं! जब राज कपूर की आवारा पर्दर्शित हुई, तभी देव आनंद की राही और आंधियां भी प्रदर्शित हुईं! इसके बाद आई टेक्सी ड्राईवर, जो हिट साबित हुई! इस फिल्म में इनके साथ थीं कल्पना कार्तिक, जिन्होंने देव साहब के साथ विवाह किया, और १९५६ में इन्हें एक पुत्र हुआ, जिसका नाम सुनील आनंद रखा गया!
     नौजवानों के रोल मॉडल  ....                                 
                                      इसके बाद उनकी कुछ फिल्में आयीं जैसे, मुनीम जीसी आई डी और पेइंग गेस्ट, उसके बाद तो हर नौजवान उनके स्टाइल का दीवाना हो गया और उनका स्टाइल अपनाने की कोशिश करता! १९५५ में उन्होंने उस ज़माने के एक और सुपर स्टार दिलीप कुमार के साथ काम किया, और फिल्म का नाम था इंसानियत. १९५८ में उनको फिल्म काला पानी के लिए बेहतरीन कलाकार के पुरस्कार से नवाज़ा गया !
  रोमांस के खुदा  ....       
                                         ५० के दशक में  उनके जीवन में सुरैय्या आईं, जिनके साथ उन्होंने ६ फिल्मो में काम किया! एक बार देव आनंद ने शूटिंग के दौरान सुरैया को पानी में डूबने से बचाया तब से वो उन्हें प्यार करने लगीं, लेकिन सुरैया की दादी धार्मिक कारणों से इनके रिश्ते के खिलाफ थीं! सुरैय्या आजीवन कुंवारी ही रहीं! देव आनंद ने अभी कुछ ही समय पहले स्वीकार किया, की वो उनसे प्यार करते थे, यदि उनकी शादी सुरैया के साथ हो गयी होती तो उनका जीवन शायद कुछ और ही होता!
  एक दार्शनिक का जन्म ...                                    
                     १९६५ में उनकी पहली रंगीन फिल्म प्रदर्शित हुई, जिसका नाम था गाइड, ये एक मशहूर लेखक आर के नारायण के अपन्यास पर आधारित थी, जिसका निर्माण उनके छोटे भाई विजय आनंद ने किया था, इस फिल्म में देव आनंद के साथ थीं वहीदा रहमान! ये फिल्म देव साहब ही बेहतरीन फिल्मों में से एक है, जिसके बारे में कहा जाता है की अब दुबारा गाइड कभी नहीं बन सकती, ऐसी फिल्म सिर्फ एक बार ही बनती है!
   विजय आनंद के साथ मिल मचाया तहलका                      
                                           देव आनंद के साथ उनके प्रिय भाई विजय आनंद की जोड़ी खूब जमी दोनों ने मिलकर इतिहास रच दिया !काला बाज़ार, पेइंग गेस्ट, तेरे घर के सामने खासी मकबूल हुयीं !  उसके बाद उन्होंने विजय आनंद के साथ मिल कर एक और फिल्म का निर्माण किया, जिसका नाम था ज्वेल थीफ, इसमें उनके साथ थीं, वैजयंती मालातनूजाअंजू महिन्द्रू और हेलेन! इसके बाद उनकी अगली फिल्म थी जॉनी मेरा नाम, जो उस समय सफलतम फिल्मों में से एक थी!
 एक समाज शास्त्री ...                                    
                     १९७० में बतौर निर्देशक उनकी पहली फिल्म आई प्रेम पुजारी, जो सफल नहीं हुई, लेकिन अगले ही वर्ष उनके द्वारा निर्देशित फिल्म हरे राम हरे कृष्णा ने सफलता का स्वाद चखा इस फिल्म में उनकी खोज ज़ीनत अमान ने "जेनिस" नाम की लड़की का किरदार निभाया, जो माता पिता के तनाव से तंग आ कर हिप्पियों के समूह में शामिल हो जाती है!खराब वैवाहिक संबंधों और भटके नौजवानों को दिशा देने का काम हरे राम हरे कृष्णा ने किया ! 
                         इसी वर्ष उनकी एक और फिल्म तेरे मेरे सपने पर्दर्शित हुई, जिसमें उनके साथ थीं मुमताज़, ये फिल्म ए.जे क्रोनिन के उपन्यास The Citadel पर आधारित थी, इस फिल्म को उनके भाई विजय आनंद द्वारा निर्देशित किया गया था! ज़ीनत अमान के बाद उनकी नयी खोज थी टीना मुनीम, जिनके साथ उन्होंने १९७८ में फिल्म देस परदेस का निर्माण किया, ये भी उनकी एक सफल फिल्म थी!
 एक सचेत हिन्दुस्तानी....                                   
                      १९७७ में उन्होंने एक राजनितिक दल नेशनल पार्टी ऑफ़ इंडिया का निर्माण किया, जो की तत्कालीन प्रधान मंत्री श्रीमति इंदिरा गाँधी के खिलाफ था ! लेकिन ये राजनितिक दल ज्यादा समय तक नहीं रहा!
  मौशिकी का बादशाह ...                                  
                         देव आनंद की फिल्में उनके संगीत के कारण भी प्रसिद्ध है, उनकी फिल्मों का संगीत आज भी लोगों को मंत्र मुग्ध करता है! उन्होंने अपने दौर के सभी बेहतरीन  संगीतकारों, लेखकों और गायकों के साथ काम किया !


जमाने से आगे ....
                            देव आनंद की फिल्में जमाने से आगे थीं हर फिल्म में उन्होंने समसामयिक मुद्दे उठाये ! ८० के दशक और उसके बाद की उनकी फ़िल्में भले बॉक्स ऑफिस पर उतनी कामयाब न रहीं हो पर उनके मुद्दे समसामयिक और जमाने से आगे थे ! अव्वल नंबर , सौ करोड़ , हीरा पन्ना , देश परदेश , प्राइम मिनिस्टर उनकी जमाने से आगे की सोच को बयान करती हैं !सैकड़ों नए कलाकारों का मौके देने का पुनीत कार्य वे जीवन भर करते रहे ! 

बेहतरीन कैमरा वर्क  ...
                                   देव आनंद की फिल्में अपने बेहतरीन कैमरा वर्क के लिए सदैव जानी जायेंगी !उनकी एडिटिंग कसी हुयी और दिलचस्प होती थी ! देव आनंद की फिल्में अपनी स्पीड और सोंग्स पिक्चारिजेसन के लिए अमर रहेंगी ! 
    
देव आनंद साहब और मैं.....                                     
                            मैं अपने निजी जीवन में देव आनंद साहब से बे इंतहा प्रभावित रहा हूँ! टीन एज से लेकर आज तक मैं उनकी वक्त से आगे की सोच उनकी स्टाइल उनके कर्मयोग उनके दर्शन  से  बे इंतहा प्रभावित रहा हूँ ! मेरी नज़र में वे एक असाधारण और सम्पूर्ण पुरुष थे ! ऐसे असाधारण और सम्पूर्ण पुरुष सदियों में कभी कभी प्रथ्वी पर अवतरित होते हैं !
                                    मैं ह्रदय से अपने आराध्य को सादर प्रणाम करता हूँ और सम्पूर्ण  सिंह सदन की और से उन्हें भाव भीनी श्रधांजलि अर्पित करता हूँ !

*****  PANKAJ K. SINGH 

5 comments:

psingh said...

वाह.........भैया
अभी तो श्यामू की बाउंसर का नाश नहीं उतरा था
की अपने इतनी नशीली पोस्ट प्रकाशित कर दी |
देव साहब की पूरी बिओग्राफी पेश कर दी
ये आप ही कर सकते थे हर पॉइंट पर
दिल दाद देता है आप की लेखनी की अदभुत जानकारी को
अदभुत तरीके से पेश किया है |
देव साहब एक महानायक थे |
जिनको अपने बहुत ही खूबसूरती से पेश किया है
प्रणाम स्वीकारें .........|

SACHIN SINGH said...

Dear chacha ji,
When I am reading this unique post,I feel that I have seen live telecast of legendary actor
DEV AANAND SAHAB Life.

Really......Incredible post !!

siddhant singh said...

चाचा जी चरण स्पर्श ....

बहुत ही उम्दा.....

आप ने देव साहब के पूरे जीवन
के हर पहलुओ को कुछ ही शब्दों
में वया कर दिया .........

Anonymous said...

चरण स्पर्श भाई जान
देव आनंद जी की जितनी तारीफ़ की जाये उतनी कम है
मैंने अब उनकी सारी फिल्मे देख ली हैं
मात्र एक फिल्म जो अब तक बची थी (दुनिया)
उस फिल्म को देखते ही देव आनंद श्रंखला मेरी पूरी हो गयी
सम्प्रति इस पोस्ट के बाद लगता है ये सिलसिला एक बार फिर शुरु किया जाये
आपने देव साहब की हर बात सलीके से बताई
हाँ एक बात और इमरान खान से इनके क्या सम्बन्ध थे इसके बारे में भी बताएं
धन्यवाद
श्यामकांत

Anonymous said...

एक शानदार कलाकार को उतनी ही शानदार श्रद्धांजलि !!!!


PK