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Saturday, December 4, 2010

मेरी नज़र का एक मेमना......


सर्वप्रथम ब्लॉग पर सभी सदस्यों को मेरा नमस्कार
मै दिलीप कुमार आपके सामने उपस्थित हो रहा हूँ अपनी पोस्ट - मेरी नज़र का एक मेमना को लेकर इसमें त्रुटियाँ हों तो मुझे माफ़ करें.....................


मेरी नज़र का एक मेमना
देख कर ना था मै तूसना
उसकी नज़रों ने मुझे देखकर

किया है एक बार तूठना

ह्रदय में एक तृषा हुयी - और आवाज़ लगायी
हे मनुष्य ! मत हो निराश
वो है तुझसे पूर्ण तूसना
मेरी नज़र का एक मेमना

देखा था ना मैंने कभी उसे
इन ऊंची - नीची गलियारों में
था वो एक राहगीर नया

उन अनजानी पतवारों में
न था लौकिक भय उसे
ज़माने के उन अत्याचारों से
बस था उसे अहंकार ईतना
कि वो है एक स्वंतत्र मेमना
वह था मेरी नज़र का एक मेमना


मेरे ह्रदय ने बस इतना सोचा
है वो एक यतीम मेमना
बस फिर क्या था दो पल के लिए
आँखें हुयी नम मेमना
उसने अपनी हरकतों से

मुझसे बस इतना कहा

हे मनुष्य ! मत हो निराश - ख़त्म हुआ मेरा बंधन

मै हूँ तुझसे पूर्ण तूसना
ऐसा
था वह मेरी नज़र का एक मेमना


Dileep

4 comments:

SINGHSADAN said...

दिलीप कविता के भाव बहुत अच्छे हैं......///////
नए नए शब्दों का प्रयोग किया है.....
जैसे____तूसना, तूठना, तृषा, मेमना, अनजानी पतवारों,नज़र का एक मेमना इत्यादि .
ख्यालों को बढ़िया से पिरोने की कोशिश है यह कविता मगर कविता में भाव पारदर्शी न होकर उलझे से नज़र आते हैं जिससे मन के भाव स्पष्ट नहीं हो सके हैं....!!!!!
सफल कोशिश के लिए तुम निश्चित ही बधाई के पात्र हो.
PK

सत्यम न्यूज़ said...

तो इसमें दिमाग चल रहा है...... मेरे मेमना तुझे जाना है ''लाबशना'' जिसका हमेशा है ध्यान रखना...

pankaj said...

बाघ बहादुर लाइकन के वन से आ सकण है..
कोटक महिंद्रा में ...
सौंदर्य नज़ारा फिर ना देखा ..रेसेसान की खोई तन्द्रा में.!
आओ मिल कर... ऊपर उठे कोमंवेल्थ से..
ऐसे रहे प्रयास तुम्हारे अगला एशियाड होगा ..नगला रते में ..!
जब कोई तुम्हारे साथ ना होगा ..विक्टर साथ तुम्हारा देगा..!
पंचायती राज हमारा नारा .. प्रधानी से नहीं आएगा बम्बा में पानी खारा ..!
अलविदा निकोलस सरकोजी .. सलाम हमारा नेपोलियन को देना..!

psingh said...

kavita hai ya kahani pata nahi chal raha adarniy bade bhiya ki bat par gaur farmayen taki kuch accha likh saken.......
blog par likhne ke liye abhar