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Thursday, March 5, 2015

आप सभी को होली हार्दिक शुभकामनायें .....!

सिंघसदन की होली है
रंगों की रंगोली है
रंगो की इस रंगोली में
हर रंग बड़ा निराला है
दिल से दिल का रिश्ता सब का
पिया प्रेम का प्याला है |
सिंघसदन मतवाला है |
........सिंघसदन मतवाला है |

इस बगिया के बगवान के
 बारे में मैं क्या बतलाऊं
कंठ रुँधा है शब्द है छोटे
उन चरणों  में बलि बलि जाऊँ
मातृ प्रेम को शीश झुकाऊं |

हो छतनार बृक्ष बगिया का
 सबको छाया देते हो
और हजारों तुफानो को
आप अकेले सहते हो
सिंघसदन के आँगन में
बन प्रेम की सरिता बहते हो |

होली के पावन रंगों में
आओ हम सब रंग जाएँ
भूल के सारी बीती बातें
एक दूजे के हो जाएँ
एक रंग हम सब हो जाएँ  |

अक्षत संग उड़ावें रंग
इशिका, लीची, शेरू, कान्हा,निक्की ,गौरी,अंशु
सूरत कितनी भोली है
रंगों की रंगोली है
सिंघसदन की होली है |

Pushpendra Singh

Monday, November 24, 2014

                                    खुशीयां  ही खुशीयां 

इन दिनों घर में कुछ अलग ही  माहौल  नजर आ रहा  है कोई अपने डांस की तैयारी कर रहा  है ,तो कोई अपने गाने  का  रियाज कर रहा है, कोई  अपने  ड्रामा  की  तयारी  कर  रहा  है , तो  कोई  अपने  स्टेज  पर  एंकरिंग  के  डायलॉग   दुहरा  रहा  है, बहुत  ही  उत्सुकता  भरा  माहौल है , आखिर  ये सब  हो  क्यों  रहा है आइये में  आपको  बताता  हूँ ,
इन दिनों  घर  में जो माहौल है बो  है शादी  का , और  बो  शादी  है ऐसे सख्स की  जिन्हे  बच्चे  मामा व्  चाचा कह  कर बुलाते है उनके हम उम्र उन्हें  श्यामकान्त  या श्याम भैया ,उनसे बड़े - बेटा और  घर के सबसे  बड़े    बुजुर्ग लला  कह  कर बुलाते है  जी  हां  अब  तो  आप  समझ  ही  गए  होंगे   की   ये  शादी  घर  के  सबसे  चहेते  सदस्य  श्यामकान्त  की  है. 
               इसे मेरा  एहसास  कहें या  अनुभब जहां श्याम मामा का नाम आता  है  वहां  माहौल ही कुछ अलग  होता है, घर में  श्यामकान्त के आते ही सभी  सदस्य  प्रफुल्लित  हो  उठते है उनके आते ही हम  सभी  लोगों  का  जिसमे  संदीप , दिलीप , बिट्टू, चिंटू ,टिंकू , जॉनी , सहजाद , अलोक  एबम  अन्य  लड़कों का  गुट सा  बन  जाता  है और फिर  हम  सब  बहुत  मस्ती करते  है . श्यामकान्त का  साथ  हो तो  हम  बेतुकी बातों में हंसी  ढूढ़ ही लेते  है. अब  सोचिये  जरा , जब श्यामकान्त इतने  खास  है तो  उनकी  शादी कितनी  खास  होगी . जी हा  इन  दिनों  घर के  सदस्यों  में  एक  बेचैनी, उत्त्सुकता , चिंता , प्रफुल्लता  सभी भावनाओ को  देखा  जा रहा  है, तो  क्यों  न  इस उत्त्सुकता  भरे  माहौल के  सदस्यों  के आपसी  संवादों को एक जीबन्त  शैली  में  उकेरा   जाए. तो आइये  में आपको बताता  हूँ की घर  के  सदस्यों  में  आपसी  चर्चा  का  माहौल कैसा है . 
 शुरुआत   करते  है  नानी  से -.

नानी - प्रिया ओ प्रिया  जरा नीचे आओ मैंने श्यामू  की  शादी के  लिए  एक शानदार कोट ख़रीदा है देखो तो कैसा  लग  रहा  है. 
प्रिया मामी --अरे  मम्मी बहुत  ही सुन्दर  . 
नानी  - पुरे  पांच  हजार   का  है . 
प्रिया मामी - सच में  इतना  महंगा क्या बात है मम्मी अब  तो  शादी में आप  ही आप नजर आओगी   .
 प्रिया मामी - (अपने कमरे  में जाकर  ) मम्मी  का  तो  पांच  हजार  का  कोट है और मेरा तो तीन हजार  का ही है, अब  क्या  करू, मम्मी के सामने  में तो दिखूंगी भी नही  , 

 (तभी श्यामकान्त  आते  है, अरे   मम्मी  मेरी  शेरवानी  का  रंग  कैसा  है  ),कोई  जबाब  नही   आया सब अपने  में व्यस्त  है 

, (इधर  लड़कीयों की  टोली  ) -

 निक्की  फोन पे  – ऐ  गौरी आज मैंने  इयररिंग्स  खरीदे  गोल्डन  कलर  के 
 गौरी - सच में, ए  बहन  मेरे  लिए  भी  खरीद  लेती , कल  मुझे  भी  बहुत  सी  शॉपिंग  करनी  है ,  बैंगल्स , हार   कंगन  , इयररिंग्स , नकली  नेल्स , आई लाइनर, और भी  बहुत कुछ लेना है चल  अभी  में  फोन  रखती  हूँ  मुझे  मेंहदी  लगानी  है, बाद  में  बात  करती हूँ , 
                         

   इधर  श्यामकान्त  घर में ,( कोई  मुझे  बताएगा की  मेरी  शेरवानी  का रंग कैसा  है ,                                कोई  जबाब  नही  आया , सब  अपने  में   व्यस्त  है )


,( सम्बल    में )

इशी  - माँ में  ये  डिसाइड   नही  कर  पा  रही  हूँ  कि  में  श्यामू   चाचा  की   शादी  में  क्या  पहनू ,
 लीची - दीदी आप  न वही  सूट  पहनो   जो  आपने   जॉनी  चाचा   की  शादी   में  पहना  था ,
 ईशी  - वो  क्यों ?
 लीची  -( हस्ते   हुए , ) क्यों की  वो  भी  शादी  थी  और   ये  भी  शादी  है 
 बड़ी मामी  - अजी  सुनते  हो  में  श्यामू  की  शादी  के  लिए  कौन  सा  गाना  तैयार  करू , 
 बड़े  मामा  जी  – देखो  भाई   मैंने  तो  अपनी  सारी  गजलें  तैयार  कर  ली  है  उन्ही  में  से  तुम  भी  एक   दो गुनगुना   देना  ,
     

   इधर  श्यामकान्त  घर  पर ,( अरे कोई  मुझे  मेरी शादी  का  कार्ड   दिखाएगा --, अब  भी कोई जबाब  नही  आया, सभी अपने  में  व्यस्त  है, किसी को  थोड़ी  सी  फुर्सत नही   है .)


 मैनपुरी   में   (दिलीप , संदीप  ,चिंटू  , जॉनी   , सहजाद  )

 चिंटू  मामा-  अरे  बिटिया  मेरी   मुल्ल्तानी मिटटी  नहीं  मिल  रही है  कहाँ  रख दी  
बिटिया -परसों  से  आप  12  बार  लगा  चुके  हो , 6 पैकेट  खर्च  कर  दीये  है , अब  बस  भी  करो , शादी  मेरी  हो  रही  है   य  तुम्हारी , 
 चिंटू  मामा - अरे  पागल  शादी  तो  तुम्हारी  है  लेकिन लडकियां  तो  मुझे  ही  देखेंगी , इसीलिए  ही तो  में  इतना  स्लिम   हो  गया   हू ,

( जॉनी - दिलीप ),

 दिलीप - अरे  यार जॉनी  ये  चेहरे  पर एक  पिम्पल   निकल  आया   है , क्या  करू ,
 जॉनी - अरे  ये   पिम्पल  नही   ये  फोड़ा  है , तुम्हे  तो डॉक्टर  को  दिखाना  चाहिए ,
 दिलीप  - अभी  जाता  हूँ 
 जॉनी - रुको  जरा   में  भी  चलता  हूँ, मेरी  दोनों  बगलों में  बालतोड़  निकल  आया  है  
संदीप - अरे  यार इन फ़ुन्सीयों  को  भी अभी  ही  निकलना  था ,में  तो   चल  भी  नही  पा रहा  हूँ , दिलीप  भी  दिल्ली   में  है  दुकान  कौन  चलाएगा, 
शहजाद  भैया  फोन से --- अरे  भाई  संदीप  दिल्ली  कब  जा  रहे  हो , जाओ  तो  मेरी  दूकान  के  लिए  भी  कपड़े ले  आना  ,
 संदीप - ऐसा  है  चुप्पां   चले  जाओ  और  ले  आओ , हम  अपनी  दूकान   नाय  खोल  पाय  रहे  है ,  तुमाए  केले  कहा  से  ले   आएं वस्त्र  ,  
  

इधर  श्यामकान्त  अपने घर पर , (अरे कोई  बताएगा की बैंड  कौन सा किया है) ,फिर  से  कोई  जबाब  नही  आया  , 

नाना  जी -  ओये  टेंट  अभी तुझे  किसी   सामान  की  जरूरत  हो तो  बता   देना  बाद   में  अगर  तूने  चें चें   पें पें   की  तो  मार  के  हिरन  बना   दूंगा , शहनाई  सा  बजता  फिरेगा , शादी  में किसी  भी  बात  की  कमी  नहीं  होनी  चाहिए , 

इधर  दिल्ली  में - ( फोन  पर  दिलीप  और   पंकज मामा जी )-

पंकज  मामा जी -  किताब  छप रही  है  तुम्हे  कुछ  खबर  है , 
दिलीप - जी मामा जी  आपने  बताया  था ,
 पंकज मामा  जी - तो  फिर  आज  शाम  को  घर  निकल  आओ और   उसकी  प्रूफ  रीडिंग  कर  दो , और   श्यामू  की  शादी  के  लिए  कुछ  गाने  भी  तैयार  करने  है ,  
 दिलीप -  मामा  जी  आज  मेरी क्लास है ,  
पंकज मामा  जी - अरे  2 साल  से  तेरी   क्लास  ही  चल  रही  है , आजा  में  पढ़ा  दूंगा , 
दिलीप  ( चुपचाप  से  )- जी  मामा जी ,
           

  इधर  श्यामकान्त  घर पर ,( अरे  कोई    मुझे  बताएगा  की  में  शादी  में  कितने  दिन  की  छुट्टी लू ,)               सब   अपने  में  व्यस्त  है  फिर   से  कोई   जबाब   नही  आया ,

( इधर   कानपुर     में  )-

फोन  पर  -  पिंटू  मामा  – अरे  भाई  दिलीप   क्या   हाल  है ,
 दिलीप - जी  मामा जी  ठीक  हूँ , और  क्या   क्या   खरीद  लिया   है   आपने    शादी  के  लिए ,
 पिंटू  मामा - अरे  का  बताएं  आठ हजार  की  शॉपिंग कल्लई  और  अभेऊ  बाक़ी  है , अरे  सुनो जरा  दिल्ली  से   आते  वक्त   मेरे  लिए सदरी ले   आना  आखिर  श्यामकान्त  की  शादी  में   सिंह साहब   दिखने   चाहिए  
 पिंटू  मामा ,- लेकिन  यार   एक  टेंसन  है ,
 दिलीप - क्या  मामा जी 
 पिंटू  मामा  -  शादी  की  शॉपिंग  तो  हो  गई  लेकिन   कार्ड   अभी तक  नहीं  आया , हा  हा हा हा   हा  हा 

             
 इधर  श्यामकान्त  घर  पर -( ऐसा  है,कि  खुद  ही  कर लो  शादी  में  चला ,                              मेरी  छुट्टी  केंसल  हो गई है , अब  में  सीधा  4 तारीख  को ही आऊंगा )                                                                  हा हा हा हा हा हा हा , ,,,,,,,,



                                                                                                   ****** dilip 

                                                                                           

     

Wednesday, May 28, 2014

श्यामू बनेंगे दूल्हे राजा....

… खुशियाँ सिंह सदन में आने का रास्ता खोज ही लेतीं है.…ईशी.… लीची .... शेरू …कान्हा …तो कभी चीकू  बन कर … अक्टूबर में और एक ख़ुशी आने वाली है.… श्यामू की दुल्हन के रूप में .... एक नया मेहमान  हमारे छोटे से परिवार का हिस्सा बन जायेगा … सोच कर है मन खुश हो जाता है.....सिंह सदन को सँवारने और बनाने में महिलाओ की भूमिका बेहद अहम रही है.… बचपन में माँ की.… अब अंजू भाभी और प्रिया इस घर को निखारने में जुटी रहती हैँ.… अब इस घर को चारचाँद लगाने एक और नया मेहमान आ रहा है.… उसके आगमन को लेकर तैयारियाँ शुरू हो चुकीं हैं.…ईशी.… लीची .... शेरू …कान्हा तो अभी से उत्साहित हैं.… डांस की ऐसी प्रक्टिस हो रही है मनो कल ही शादी हो.… श्यामू घर का सबसे छोटा और लाडला है..... उसकी ख़ुशी के आगे हम सब लोगों ने कभी कुछ नहीं सोचा…  हमेशा उसकी ख़ुशी में हम सब ने खुशियां तलाशी…  अब  जब वह जिंदगी की नई शुरुआत करने जा रहा है तो हमसब बहुत खुश  हैं.…श्यामू के दूल्हा बनने का इंतज़ार कर रहे हैं.....श्यामू की जीवनसंगनी घर को लेकर चले.… हर रिश्ते को समझे …अपनी समझदारी से घरवालों का दिल जीते न की होशियारी से …सब को साथ लेकर चले छोटों और  बड़ो की भावनाओं को समझे और हक़ से अपनी बात और  विचार रखे.... ऐसे नए मेहमान का सिंह सदन पलकें बिछा कर इंतज़ार कर रहा है.…
हृदेश सिंह 

Sunday, February 16, 2014



यूपी पुलिस का बदलता स्वरूप 



 उत्तर प्रदेश राज्य जनसँख्या की दृष्टी से भारत का सबसे बड़ा राज्य है, वर्ष २०११ की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार लगभग १८ करोड़ आबादी जो कि पुरे भारत कि कुल आवादी का २६ प्रतिशत है,यहाँ निवास करती है,   वर्त मान में देश में विस्तरित उग्रवाद, नक्सलबाद, साम्प्रदायिक दंगे व् ,अन्य जघन्य अपराध से आंतरिक सुरक्षा एक चुनौती पूर्ण विषय बन गया है, इन बढ़ती उग्र वादी ताकतों का कारण प्रशासन में उत्पन्न दक्षता के अभाव को नकारा नहीं जा सकता, वैश्वीकरण के दौर में अपराधों की प्रकृति में                  ( अपराधों में तकनीकी का बढ़ता प्रयोग) तेजी से बदलाव आया है, वही इसके विपरीत पुलिस प्रशासन में तकनीकी ज्ञान के अभाव को सरलता से देखा जा सकता है, उदा. पंजाब में एक पुलिसअधिकारी द्वारा एक चोर को पकड़ने के उपरान्त उससे बरामद, आई पैड, और सैमसंग के एंड्राइड फोन, वरामद हुए, अतः इन फोन से जानकारी जुटाने में पुलिस विभाग  को खासी मसक्कत करनी पड़ी, इस घटना से पुलिस विभाग में तकनीक के ज्ञान के अभाव को सरलता से देखा जा सकता है, परिणामतः अपराधों के बदलते सवरूप को ध्यान में रखते हुए, यूपी सरकार ने पुलिस प्रशासन में कुछ बड़े बलाव किये है जिससे अपराधों कि बढ़ती संख्या पर अंकुश लगाया जा सके, जो निम्न है 
          दंगारोधियों से निपटने के लिया मिर्ची बम,_ राज्य सरकार ने दंगा रोधियों  से निपटने के लिए केंद्र सरकार से २०० करोड़ रु  कि मांग की है, जिससे प्रत्येक जिले  की कोतवाली परिसर में ३६०० मिर्ची बम पुलिस के असलाह खाने में मौजूद होंगे,
         पर्याप्त सबूतों के लिए वीडियो कैमरा- राज्य सरकार द्वारा सभी जिलों में पुलिस प्रभारियों को 2 2 लाख रूपए वीडीयो ग्राफी के लिए वीडियोकैमरा, थाना प्रभारी एवं पुलिस उप अधीक्षक को मुहैया कराए जाएंगे, जिससे घटना स्थल की वीडियो रिकॉर्डिंग करना अनिवार्य होगा  जिससे अपराधियों तक पहुँच बनाने में खासी मदद मिलेगी, 
   
          बकौल पुलिस उपाधीक्षक श्यामकांत के द्वारा-   देखा जाए तो यह कदम पुलिस प्रशासन में एक सकारात्मक पहल साबित होगी, यह विडियो कैमरा घटना स्थल की वीडियो ग्राफी के लिए तो है ही, साथ ही अपराधियों को अब यह ज्ञात हो जाएगा कि पुलिस वीडियो ग्राफी कर रही है अतः उनके पास अब पर्याप्त साक्ष्य भी मौजूद है अतः इससे उनकी भविस्य में अपराध करने कि मंशा को भी कम किया जा सकता है , 

        आधुनिक तकनीक से लैस होगा कंट्रोल रूम - अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस कंट्रोल रूम को तकनीक से लेस किया जा रहा है, जिसमे हर कंट्रोल रूम को GPS युक्त व्  GPS वाहन व् वाइक उपलब्ध कराई जाएगी, पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर यह व्यवस्था अभी कानपुर,लखनऊ, इलाहाबाद, में अत्याधुनिक कंट्रोल रूम कार्य अपने अंतिम चरण पर है,  इसके आलावा                      
          प्रत्येक जिले के कोतवाली परिसर व् थाना परिसर में कम्प्यूटर की व्यवस्था, जिसमे उस क्षेत्र के सभी अपराधियों का पूरा व्योरा, व् ऍफ़ आई आर  दर्ज होगा, जिससे अपराधियों के भागने पर उनकी पहचान की जा सके, 
     पुलिस जांच को और अधिक वैज्ञानिक तरीके से सम्भव बनाने के लिए फोरेंसिक लेब को आधुनिकीकृत व् सबूतो को ज्यादा गहनता से जानने के लिए बेहतर उपकरण मुहैया कराए जाएंगे, इसके अलावा प्रत्येक जिलों में चौराहों व् जिले के मुख्य मुख्य स्थानो पर सीसी टीवी कैमरे लगवाए जाएंगे  व् अन्य नए प्रावधान यूपी सरकार ने वर्ष २०१४ में पुलिस प्रशासन में दक्षता को बढ़ाने हेतु उपलब्ध कराए  जाएंगे, जो भविष्य में बढ़ते अपराधो पर नियंत्रण लगाने में सकारात्मक सिद्ध होंगे, 


                                                                                                             ******* dilip kumar 

Saturday, February 8, 2014

                                                   
                                                           अपील -;
             
                                                    ब्लॉग के सभी सदस्यों को सूचित किया जाता है, ब्लॉग की शिथिलता को ध्यान में रखते  सभी सदस्य अपनी उपस्थिती को समय समय पर दर्ज कराते रहें, जिससे ब्लॉग को एक बार पुनःसक्रीय बनाया जा सके, सभी  लेखकों से यह भी अपील है कि EDITORIAL BOARD द्वारा जो कॉलम्स लेखकों को पहले आवंटित किये गए थे उन्हें भी इसी माह यानि १ फ़रबरी २०१४ से पुनः active किया जा  है,  अब यह लेखकों की जिम्मेदारी है कि वे अपने लेखनधर्म का निर्वाह करें, पाठकों को बेहतर पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराएं,तथा ब्लॉग को पुनः उसी स्तर पर पहुंचाएं जिसके लिए वह विख्यात है।
                  आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है  कि ब्लॉग के सभी प्रमुख लेखक  श्री पवन कुमार ,श्यामकांत , हृदेश सिंह , पुष्पेन्द्र सिंह ,दिलीप कुमार , श्री मती शीला देवी ,४८ घंटे के भीतर अपनी उपस्थिती दर्ज करा देंगे।इस सन्दर्भ में कॉलम्स लेखकों को अलग से दूरभाष पर भी सूचित किया जा रहा है  


                                                     *****PANKAJ.K. SINGH

Tuesday, February 4, 2014

अमेरिका  की वर्चस्वतावादी नीति ; देवयानी मामला                                                          


              पिछले कुछ दिनों से भारतीय  राजनयिक देवयानी खेबरागड़े का प्रकरण समाचार पत्रों के मुख्य अंश बने रहे, और हों भी क्यों न यह मामला भारत के सम्प्रभुता पर प्रसन्चिन्ह लगाता है ,
      विवाद कुछ इस प्रकार था, 
कि भारतीय राजनयिक देवयानी खेबरागड़े एक घरेलू नौकरानी को लेकर अमेरिका गई थी वहाँ  पर उसे वेतन  भारतीय परिस्थितीयों के अनुसार दिया जा रहा था, जो कि अमेरिका में लागू न्यूनतम वेतन से कम था, नौकरानी ने अपनी स्थति कि अनुसार सप्ताह के अंत में किसी अन्य के यहाँ काम करके पैसा कमाने की इच्छा खेबरागड़े से व्यक्त की, चूँकि नौकरानी को वीजा खेबरागड़े के घर में काम करने  के लिए ही मिला था इसलिए  खेबरागड़े ने इससे साफ़ इंकार कर दिया, इसी बीच वह नौकरी छोड़कर चली गई, खेबरागड़े ने हालांकि पुलिस में रपट भी लिखाई, लेकिन अमेरिकी पुलिस द्वारा इस पर कोई कार्यवाही नहीं कि गई, बाद में नौकरानी ने खेबरागड़े के खिलाफ न्यूनतम मजदूरी से कम वेतन देने के सम्बन्ध में आरोप लगा दिया, जिससे खेबरगड़ेको हिरासत में ले लिया गया, लेकिन हिरासत में लेने के बाद खेबरागड़े की निर्वस्त्र तलाशी, एवं जघन्य मामलों में शामिल अपराधीयों के साथ उनको वैरक में बंद रखा गया, यही पहलू भारत और अमेरिका के सम्बन्धों में आए दरार को प्रदर्शित  है, 
                                  ऐसा नहीं है कि अमेरिका द्वारा यह विवाद पहली बार सामने आया है, इससे पहले २००२,०३ में भारत के रक्षा मंत्री जॉर्जफर्नांडीस, एपीजे अब्दुल कलाम, रामदेव, व् अन्य फिल्मी हस्तीयां भी अमेरिका की इस वर्वरता का शिकार हो चुकी है, अमेरिका भारत को एक banana रिपब्लिक का दर्ज देता है, वह दक्षिण एशिया में अपने वर्चस्व को बनाए रखने के लिए तथा चीन की उभरती अर्थव्यवस्था  के साथ दक्षिण एशिया में उसके बढ़ते वर्चस्व को प्रति संतुलित करने के लिए भारत को रणनीतिक रूप में इस्तेमाल करता है,यह   अमेरिका है जो किसी भी देश में व्याप्त भ्रष्टाचार, मानवाधिकार,एवं आंतरिक अव्यवस्थाओं का हवाला देकर अपनी रिपोर्टों के माध्यम से उसकी स्थिती  को सुद्रण करने कीसलाह देता है,आज  वैश्वीकरण के दौर  में प्रत्येक देश की परस्थितीयां तेजी से बदल रही है, पहले जहाँ मिस्स्र अपनी आंतरिक समस्याओं से जूझ रहा था आज वह अपने मजबूत संबिधान की बुनियाद पर खड़ा है, नेपाल में जहाँ कभी राजतंत्र हुआ करता था, आज वहाँ पूर्णतः लोकतंत्र प्रभावी हो गया है आज विकासशील देशों के बदले हुए स्वरूप को कम नही आँका जा सकता, जो राष्ट्र कभी बीमारू राष्ट्र के नाम से जाने जाते थे वे आज विकासशील राष्ट्र की कतार में खड़े है,  इसलिए अमेरिका को अब विकासशील राष्ट्रों के प्रति banana रिपब्लिक का  दृष्टिकोण त्यागना होगा , और अपनी वर्चस्ववादी नीत को कम कर सम्रध एवं उदार व्यवहार अपनाना होगा,

 कुछ दिनों पहले अमेरिका nsa की खूफिया एजेंसी में कार्यरत एडवर्ड स्नोडेन नामक व्यक्ति ने कुछ अहम् खुलासे किये, इससे साफ़ जाहिर है, कि अमेरिका अपनी वर्चस्वता को सिद्ध करता रहता है, स्नोडेन का कहना था कि अमेरिका अपनी खूफिया एजेंसी प्रिज्म की  निगरानी के दायरे में आने बाले लोगो में भारतीय पांचवे नंबर पर आते है, और आज भारत ही नहीं अमेरिका अपने जासूसी कार्क्रम प्रिज्म के माध्यम से संसार से  ५अरब इंटरनेट एड्रेस पर लगातार नजर रखता है, वहीं इस विवाद का दूसरा पहलू  भारत को अपनी नीतियों के कारण कटघरे में खड़ा करता है     ,यहाँ मेरा मानना है कि , 
                         कि इससे पहले भी भारतीय राजनयिकों (उपर्लिखित) व्  फिल्मी हस्तीयों को रोकने के संबंद्ध में भारत ने कोई प्रतिक्रीया व्यक्त नही की, इसके आलावा कुछ दिन  पहले अमेरिका के निगरानी करने के सम्बन्ध  में भारतीय विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद का कमजोर सा वयान था कि'' भारत ऎसी कोई टिप्पड़ी तक नही करेगा जिससे अमेरिका को नाराजगी हो, इसके आलावा स्नोडेन ने भारत में शरण मांगने पर आवेदन किया तो भारत ने आवेदन ख़ारिज करने में कुछ ज्यादा ही तेजी दिखाई, ऐसे कुछ अन्य विवाद RAW के वरिष्ठ अधिकारी को सीआईए ने अपना गोपनीय एजेंट बना रखा था,ऐसे कई मामले है जो जनता के समक्ष लाए ही नहीं गए, और उनको दवा दिया गया, और जब आज देवयानी मामला सामने आया तो संप्रग सरकार ने संसदीय चुनाव को ध्यान में रखते हुए, जैसा रुख अपनाया है वैसा भारतीयों में कभी देखने को नहीं मिला, जिससे साफ़ जाहिर है कि दिवपक्षीय सम्बन्धों में राजनीति के हस्तक्षेप को अनदेखा नही किया जा सकता,
                           परिणामतः- भारत को आज अपनी अर्थव्यवस्था में सुधार लाने के  लिए विकसित राष्ट्रों के  सहयोग की जरूरत है, वहीं अमेरिका को अपने वर्चस्व वादी रवैये को छोड़ अपनी जनता में व्याप्त अशंतोस ( वढ़ती वेरोजगारी, घरेलू बाजार में चीनी उत्पादों कि बढ़ती संख्या,सिकुड़ती अर्थव्यवस्था ) को ध्यान में रखते हुए विकासशील देशों के प्रति उदार रवैया अपनाना चाहीये, जिससे वैश्विक स्तर पर विकास को संभव किया जा सके,                                               

                                                                                             ****** dilip kumar 

Monday, January 27, 2014

LAUNCH OF NEW SINGH SADAN CALENDAR FOR 2014

                          वर्ष 2014 की आप सभी को हार्दिक शुभ कामनाएँ

                                     नव वर्ष 2014 के नए सिंह सदन केलेण्डर को आज लॉन्च कर दिया गया है इस नव वर्ष 2014 के नए सिंह सदन केलेण्डर को दिग्गज फोटोग्राफ़र गौरव गंगवार (MINISTRY OF INFORMATION & BROADCASTING ,GOVT. OF INDIA) और डिजाइनर दीपक वर्मा ने तैयार कियाहै ! 

Sunday, January 19, 2014

 सर्वप्रथम ब्लॉग के सभी सदस्य गण या यूं कहें कि सभी दिग्गज लेखकों को मेरा नमस्कार, एवं नववर्ष की हार्दिक सुभकामनाएँ, संसाधनों के अभाव में इतने दिनों बाद ब्लॉग पर मेरी उपस्थिती को क्षमा करें, बेशक इतने दिनों से मैंने ब्लॉग पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन में हमेशा इससे जुड़ा रहा , इतने दिनों में अपने परिवार में जो घटनाएं हुई है उन सभी घटनाओं को सदस्यों ने अपने विचारों में इस प्रकार वर्णित किया है जो वाकई काबिले तारीफ़ है, लेकिन जैसा कि में जानता हूँ, सदस्यों की व्यस्तता को देखते हुए वर्तमान में ब्लॉग पर लेखों का सिलसिला थोडा सुस्त हो गया है, अतः कही न कही इसकी प्रासंगिकता खोती सी जा रही है, जैसा कि मेरा विषय है देश दुनिया इसकी सक्रीयता को बनाए रखते हुए, में दिलीप कुमार ब्लॉग पर अपनी उपस्थिती को दर्ज करते हुए, एक बार फिर आप सभी को वर्तमान  में चल रही महत्वपूर्ण घटनाओं से रूबरू कराऊंगा, अतः आगे भी में यह प्रयास  जारी रखूँगा,

                                      में जनता हूँ कि ब्लॉग के सभी दिग्ग्ज लेखकों के सामने  मेरी कलम लड़खड़ा सकती  है इसलीये मेरी त्रुटीयों के लिए मुझे क्षमा न करें बल्कि मुझे उचित सलाह दें,,,                                                                                                       
                       आगामी दिनों में मेरे कुछ लेख इस प्रकार है, 
                                     देवयानी मामला 
                                      बदलती राजनीत,[ आप मुझे अच्छे लगने लगे ]
                                      बांग्लादेश में आवामी लीग का आगमन 
                                      समलैंगिकता                                 

                                                                                      ******dilip kumar 

 विश्व  व्यापार  संगठन  में खाद्य सुरक्षा विधेयक 



                                                             हाल ही में ६ दिस 2013 को  इंडोनेसीया में  विस्व व्यापार संगठन की मंत्री स्तरीय  बैठक विकासशील तथा विकसित देशों  के बीच कुछ अहम् फैसलों  के बीच संपन्न  हुई ,बैठक के कुछ पहलूओं से जाहिर होता है की हम एक  बार फिर  पूंजी राष्ट्रों  की  कूटनीतिक चालों के सामने झुक गए है इस मंत्री स्तरीय  सम्मेल्लन में एक तरफ जहाँ भारत ने अपने हितों को ध्यान में रखते हुए  कृषि  सब्सिडी जारी  रखने की  बात की, वहीं  विकसित राष्ट्रों  ने इस  सब्सिडी का पुरजोर विरोध किया,और साथ ही वे भारत पर यह समझौता  करने  के  लिए  दबाव बना रहे है,कारण है कि इसके पहले  की  विश्व व्यापार संगठन की मंत्री स्तरीय  बैठकें बिना  किसी  समझौते  के  संपन्न होती रही  है,यदि यह  बैठक भी बिना किसी  फैसले के संपन्न होती है तो, वैस्विक  कारोबार में  बर्चस्व रखने वाले इस मंच  के अस्तित्व पर प्रस्नचिन्ह  लगना संभव  है 
 विकसित  राष्ट्रों का  कहना  है कि जैसा की विश्व व्यापार संगठन के नियमानुसार कोई भी सदस्य राष्ट्र कृषि उत्पादों पर 10 फीसदी से ज्यादा सब्सिडी  नही देगा जिससे व्यापार में  संतुलन बना  रहे, लेकिन  भारत सब्सिडी  की सीमा  का उल्लंघन करते हुए अपने  कृषि  उत्पादों  को  कम  कीमत पर जनता को मुहैया करा  रहा  है, जो व्यापार की स्वस्थ  प्रतिस्पर्धा  के  विपरीत  है,अतः विकसित  देशों  का  कहना  है  कि  भारत सरकार कृषि  सब्सिडी  तथा  सस्ता अनाज  देना बंद  करे, जिससे व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े  और  कम्पनीयां  उचित  मुनाफा कमा सकें , 
 ज्ञातव्य  हो कि 1995 में  अमेरिका का व्यापार घाटा 16 अरव डॉलर था. वहीं 2013 में बढ़कर 730 अरब डॉलर  हो गया  है ,कारण है  कि  चीन  एवं अन्य  देशों ने  वैश्विक  व्यापार में अपनी  भूमिका को  सुनिश्चित  किया हैं. अतः इससे  साफ़  जाहिर  है  कि  विकासशील  देशों  के  बाजारों में  पहुंच बनाकर अमेरिका अपने  व्यापार घाटे  को  संतुलित  करने  का  प्रयास कर रहा  है ,
 इसके  अलावा एक तथ्य  यह  और  है कि अमेरिकी जनता भारत की एक चौथाई है , और  वह  45 खरब रूपए  खर्च  कर  अतिरिक्त  पोषण सहायता  कार्यक्रम  चलाकर 470 करोड़  लोगो पर  प्रति  96,280 रूपए  व्यय कर 240 किलो अनाज  मुहैया कराता है, वहीं भारत  77 फीसदी  लोगों को  30 रूपए प्रतिदिन  खर्च  करने  वालों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत  47 करोड़  लोगो पर 1620 रूपए व्यय कर  सालाना  58 किलो सस्ता  अनाज  मुहैया  कराती  हैं, जिससे  विकसित  देशो  को  दिक्कत होना स्वाभाविक है 
,ध्यातव्य हो कि अमेरिका  कृषि पर  सब्सिडी  1995 में 34 अरब  रूपए  थी , वहीं अब बढ़कर  79 अरब रूपए  हो गई  है ,अतः  सभी  देश मिलकर 244 खरब रूपए की  सब्सिडी दे रहे है ,अतः वे चाहते है कि विकासशील  रास्ट्र अपने नागरिकों  को  सब्सिडी  के माध्यम से मदद ना करें , ताकि  विकसित देशों के उत्पादों को विकाशशील देशों में  माकूल वातावरण मिलता  रहे और उनके  बाजारों  पर कब्ज़ा  बना  रहे,

 परिणामतः वार्ता  के अंत में भारत का पक्ष था,  कि हम कृषि उत्पादों में सब्सिडी  ज़ारी  रखेंगे, जबकि  wto  का कहना था,  कि वर्तमान में आप सब्सिडी जारी रखेगे। अतः इससे साफ़ जाहिर है कि भविस्य में  कृषि  सब्सिडी  ख़त्म होने  कि  सम्भावनाओं को  नकारा  नहीं जा सकता ,!



******* ***** DILIP KUMAR 






                                                   HAPPY NEW YEAR  2014
                                 
                                         TO ALL SINGH SADAN FAMILY &FRIENDS

**** PANKAJ K. SINGH 

Wednesday, October 30, 2013

कृष 3 के इस गीत के सहारे पेट्रा की सैर



  कृष 3 के एक गाने ने इतिहास के पन्नो में दबे जॉर्डन के ऐतिहासिक शहर पेट्रा की याद ताज़ा कर दी है। दुनिया के सात अजूबों में शुमार ये शहर इस फ़िल्म के गाने से याद आ गया। इस फ़िल्म का एक गीत है दिल तू ही बता ....इस फ़िल्म को पेट्रा में फिल्माया गया है .बेहद खूबसूरत ढंग से. ऋतिक रोशन भी इस गाने में  बेहद खूबसूरत नज़र आ रहे  हैं.

जॉर्डन का पेट्रा  शहर जहाँ पहली बार अरबी लिपि लिखी गयी .जहाँ मेसोपोटामिया सभ्यता ने अंगड़ाई ली . चूने और बलुई पत्थर पर बसा एक शानदार शहर . 312 ईसा पूर्व बसाया गया यह शहर किसी रहस्य से कम नहीं है.रेगिस्तानी तुफानो के बीच ये इतिहासिक शहर आज भी शान से खड़ा है और जॉर्डन की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाये रखने में मदद कर रहा है। पेट्रा शहर एक डोरा नाम कीपहाड़ी पर बसा हुआ है .

इस गीत में झीले भी दिखाई दे रही है.जो इस शहर की खास पहचान है .यही नहीं उस ज़माने में पेट्रा में रहने वालों के पास जल निकासी और आपूर्ति की बेहद उन्नत तकनीक थी . ये तकनीक यहाँ के लोगों ने कैसे विकसित की इस पर आज तक रहस्य बरक़रार है. इस पुराने शहर का भारत से नाता था .यहाँ के व्यापारी भारत आते जाते रहते थे .कृष के इस गीत को देखकर एक बार फिर इस मायावी शहर को जानने और पढ़ने की ललक हुयी। रहस्य.रोमांच. उन्नत तकनीक और विकसित सभ्यता से भरे पेट्रा के अवशेष अब देखने की चीज़ भर रह गए है.लेकिन एक सवाल कि आखिर इतनी भरी पूरी सभ्यताएं कैसे नष्ट हो गयीं। क्या विकसित सभ्यतायों का यही हश्र होता है? 

ह्रदेश सिंह

Wednesday, September 25, 2013



   मामा ने हरी नाम को सार्थक कर दिया




छोटे मामा बेहद प्रगतिशील थे. उस ज़माने मे जब संचार के साधन आज की तरह इतने विकसित नहीं थे. लोग देश दुनिया की जानकारी के लिए शहर का रुख करते थे लेकिन हम गाँव की तरफ भागते थे. बजह थी मामा. जिनको लोग हरी ...वैधजी ...और डायरेक्टर साब के नाम से पुकारते थे
दर्शन ...तर्क शास्त्र ...नाट्य ...संगीत ...चिकित्सा ...विज्ञान ...फिल्म ..राजनीति  और साहित्य जैसी तमाम क्षेत्रों मे उनका बड़ा दखल था ...श्रीमद्भागवत गीता और श्री रामचरित मानस  पर तो जैसे मामा ने पी एच डी की हो ...उनकी पैदाइश मेदेपुर की थी .मैनपुरी का बेहद छोटा गाँव .आवादी यही कोई हज़ार बारहा सौ की होगी .मामा चाहते तो अधिकारी बन सकते थे ...पुराने ज़माने के पढ़े लिखे थे .उस समय नौकरी के लिए आज की तरह मारा मारी नहीं होती थी ...तहसीलदार की नौकरी नहीं की ...नाना ने सिफारिश कर मास्टरी की नौकरी दिलवा दी... लेकिन मामा का मन नहीं लगा ...वह तो गाँव के सेवा करना चाहते थे ...अनपढ़ ..शोषित ...बीमारों की सेवा करना चाहते थे ....मामा ने किया भी ...डॉक्टरी सीखी ...लोगों का इलाज करना शुरू किया ..अन्धविश्वास और अशिक्षा मे जकड़े गाँव को कैसे मुक्त कराया जाये इस पर हमेशा उनका चिंतन जारी रहता .ग्रीक के दार्शनिको के तरह बंद कच्चे कमरे मे दीये की लौ को घंटो निहारते जैसे वे दूसरी दुनिया के लोगो से सम्पर्क कर गाँव की दिक्कतों का हल निकाल रहे हो ..उन्हें हल मिला भी ...
मामा रेडियो लाये .मेदेपुर का पहला रेडियो था ये .अब गाँव के लोगों को दुनिया की खबरे मिलने लगीं ...सरकार क्या कर रही लोगो को पता चलने लगा ....अब मामा को लोगों को जागरूक बनाना था ...उन्होंने गाँव में रामलीला का मंचन शुरू किया ..रामलीला को मामा निर्देशित करते थे .रामलीला मंचन के पीछे ग्रामीणों का नैतिक स्तर उठाना था ...इस रामलीला मे बाहरी कलाकारों नहीं बुलाया जाता था गाँव के युवा इसमें भाग लेते थे ...मामा के घर का बड़ा आँगन जिसे हमसब लोग आबादी कहते थे रामलीला का अभ्यास किया जाता था .. पूरा गाँव इस अभ्यास को देखने आता ..मामा के प्रयोग असर दिखा रहे थे गाँव तरक्की कर रहा था ...मेदेपुर आदर्श गाँव बन रहा था गाँव की लड़कियां स्कूल जा रही थीं ...मामा ने जो सोचा वो कर दिखाया उन्होंने हरी नाम को सार्थक कर दिया था ....भगवान् हरी भी तो ऐसा ही करते थे भटके हुए लोगों को राह दिखाते थे ....मामा कहा करते थे आत्मा अजर अमर है देह नष्ट हो सकती है आत्मा नहीं . मामा आपकी बात कितनी सच लगती है ....

हृदेश सिंह

Wednesday, August 21, 2013

"हरीकृष्ण"...... बल्कि स्व0 हरीकृष्ण.........।


....... हमें छोड़ के ये सब क्यो छोड़ गए हो....?

अभी तक दिमाग से 16/1 7  अगस्त की वह रात निकल नहीं रही जब अचानक रात करीब 01 बजे मेरा फोन बजा . फोन उठाया, दूसरी तरफ मम्मी थीं........बदहवासी में बोली - "छोटे मामा की तबीयत खराब है......सांस लेने  में तकलीफ हो रही है, हम लोग ईसन नदी के पुल के पास हैं, प्रमोद डॉक्टर की तलाश में गए हैं......." उन्होंने ये साड़ी बात रुंधे गले से एक ही सांस में कह डालीं .मैं समझ गया कि वाकई हाल मुश्किल हैं . मैंने मम्मी से कहा ‘‘मेरी बात कराओं।‘‘ मम्मी ने फोन मामा को दिया। मामा बोले - ‘‘ बेटा बात करने में तकलीफ हो रही है‘‘। मैं उनकी आवाज से समझ गया कि उनकी हालत नाजुक है। मैं रात में ही निकल पड़ा। फर्रूखाबाद से मैनपुरी का रास्ता लगभग एक-सवा घण्टे का है.....रास्ते भर मैं चीजें मैनेज करता रहा। कभी सी0एम0ओ0 को फोन लगाकर उससे तत्काल इलाज करने की दरख्वास्त की तो कभी जोनी को जगाकर व्यवस्था करने को कहा.....मगर ये सब उपाय दस मिनट के अन्तराल में ही बेमानी साबित हो गए। 

‘‘मामा नहीं रहे .....‘‘ यह वाक्य जब मम्मी ने बोला तो लगा कि सिंह सदन के हिस्से का एक दैरीव्यमान सितारा बुझ गया।

हरीकृष्ण ... अब स्व0 हरीकृष्ण हो गए थे। वैद्य जी, चच्चू, डाइरेक्टर साहब, डॉ  साहब, मामा और फिर छोटे.....जाने कितने सम्बोधन उनके खाते में थे। हम सब अपनी सहूलियत से उन्हें सम्बोधित करते थे। जब से हम लोगों ने होश संभाला तब से छोटे मामा हमारे लिये एक बौद्धिक प्रकाश पुंज की तरह थे। मेदेपुर जैसे नितान्त छोटे से गांव में पहले शख्स थे जिसने ‘सूचना और ज्ञान‘ की शक्ति को समझा। जाने कहां-कहां से सोवियत संघ, नवनीत, धर्मयुग, साप्ताहिक हिन्दुस्तान जैसी नामचीन पत्रिकाओं से लेकर बाजारू साहित्य का एक बड़ा संकलन चैपाल में रहता था। पौराणिक साहित्य का संकलन तो हमारे घर में पूर्व से ही चला आ रहा था। रेडियो, घड़ी, टेप रिकार्डर जैसे तत्कालीन गैजेट भी उनके पास रहा करते थे। यह उनकी जिजीविषा और उत्कंठा का ही परिणाम था कि वे इतिहस, स्वतंत्रता संग्राम, साहित्य, खेल, राजनीति, कूटनीति, संगीत, कला जैसे विविध विषयों पर भरपूर जानकारी रखते और हमारी पीढ़ी को अवगत कराते । मुझे आज भी आश्चर्य होता था कि कैसे उन्होंने आयुर्वेद और ऐलोपैथ के क्षेत्र में स्वाध्याय और अनुभव से अपना लोहा मनवाया। कोई मान्यता प्राप्त डिग्री उनके खाते में नहीं थी किन्तु उनके इलाज के मुरीद आस पास के गांवों में सहजता से मिल जाते हैं। छोटे मामा ने गांव में रामायण के मंचन की परम्परा डाली। छन्दबद्ध संवाद के माध्यम से लगभग पन्द्रह दिन चलने वाली इस रामायण के मंचन ने उन्हें एक निर्देशक  के रूप में स्थापित किया, वे ‘डाइरेक्टर सा'ब ‘ के नाम से प्रसिद्ध हो गए। इसके अलावा सूचनाएं/जानकारी एकत्र करने का जुनून और वाद-विवाद-बहस की परम्परा को जन्म देने के लिए उन्हें श्रेय दिया जाना चाहिए।

1995 के आस-पास बच्चन की मधुशाला के छन्दों की रिकार्डिंग के लिए मैंने और पंकज ने उनकी आवाज में कई छंद रिकार्ड किए। अब वह रिकार्ड तो गुम हो गया है किन्तु उनकी प्रस्तुति का तरीका आज तक मैं विस्तृत नहीं कर सका।

बहुत कुछ लिखने को है... मगर सब कुछ थम सा गया है, उनके जाने के बाद। अन्याय हुआ है हमारे साथ। कुछ दिन उन्हें और ठहरना चाहिए था। मगर नियति से न कोई लड़ सका है न लड़ पाना संभव है।

बहुत कुछ छोड़ गए हो मामा आप हम सब के लिए ...लेकिन हमें छोड़ के ये सब क्यो छोड़ गए हो....?

***** PK

Tuesday, August 20, 2013

मेरे मामा ....

मामा अपने समय से कई गुना आगे थे
वे इतिहास, राजनीति, धर्म, साहित्य, संगीत के जोरदार वक्ता थे.
इन विषयों पर उनकी जानकारी अत्यंत गहरी थी
वे विषयों पर गहन चर्चाएँ करते थे
जिस पक्ष  को वे सकारात्मक तौर पर पेश करते थे
निश्चय ही कई बार उसी का वे पुरजोर विरोध भी प्रस्तुत कर देते थे
वे कभी किसी निश्चित धारणा से नहीं जुड़े
वे कभी तो अज्ञेयवादी  तो कभी छडभंगुरवादी नज़र आये
सच्चाई तो ये है की वे विचारधाराओं के जादूगर थे
जहाँ तक धर्म का प्रश्न है वे महिमा मंडन और खंडन दोनों के पछधर थे
 वे हमारे लिए एक खगोलीय पहेली के समान थे
जिनको  हल करना  शायद हम से परे हो
पर एक बात तय है आप हमारे लिए बापू जी से कम नहीं थे
चरण स्पर्श

श्यामकांत

Monday, August 19, 2013


प्यारे मामा श्री हरी कृष्ण जी की याद में 
                                         
                                          ये जीवन कुछ अजीब सा है। 


ये जीवन कुछ अजीब सा है।
 थोडा सा ज्ञान  सिखाता है और ढेर सारा रह जाता है ,
थोडा सा ही वक्त अपनों को दे पाते  हैं और ढेर सारा वक्त ये रोजी- रोटी ले जाती है ,
झगड़ों और क्लेश में पूरा जीवन हम गवां देते हैं और रोते तब हैं जब पूरा इंसान ही हमसे दूर चला जाता है ,
अंधी राह पर दौड़ते जाते हैं और पलट कर देखते हैं तो मुट्ठी में रेत भर  तक शेष  नहीं रह जाती है,
जिन चीज़ों के लिए दीवानों की तरह पागल रहते हैं एक झटके में वो हमसे दूर हो जाती हैं...  उनके होने न होने के कोई मायने तक नहीं रह जाते हैं !
एक ही पल में सब मंज़र बदल जाता है लेकिन उस पल की आहट  पूरी जिंदगी सुनाई नहीं देती !
हर बार वही गलतियाँ ,  हर बार वही अफ़सोस  पर कुछ नहीं बदलता कुछ् नहीं सुधरता !
हर अपने को गंवाने के साथ हम अपने शरीर  का एक - एक अंग गंवाते चलते हैं,,
आओ इसे कुछ् रोकें  कुछ सुधारें जो बचे हैं उनके साथ कुछ् यादगार पल बिता ले 
गुजर रहा हर पल लौट के न आएगा . जाने वाला वो "अपना " फिर बुलाने पर भी लौट के न आएगा !

**** PANKAJ K. SINGH



प्यारे मामा..... WE ARE MISSING YOU LOT ,,,

WHY YOU LEFT SO EARLY ...
NOTHING SEEMS GOOD WITHOUT YOU ....




***** PANKAJ K.SINGH
                              श्रद्धांजलि 
             
                           प्यारे मामा श्री हरी कृष्ण जी...... 
                                 
          एक   विलक्षण निर्दोष दीनबन्धु  की असमय  विदाई  ...         

                                   एक झटके में लगा  मानो  वक्त  रुक गया है.. ..  और जिंदगी का एक खूबसूरत अध्याय समाप्त हो गया है ! ...... "सिंह सदन" के अतिप्रिय और हम भाईओं  के दुलारे हमारे छोटे  मामा  श्री हरी कृष्ण जी हमारे बीच नहीं रहे ! अचानक ही ईश्वर  ने उन्हें अपने पास बुला लिया और एक झटके में हमारे प्यारे मामा हमसे बहुत दूर चले गए !
                                      रह - रह के दिल से एक हूक  सी उठती है कि काश कुछ् वक्त और मिल जाता तो सब कुछ छोड़ - छाड़ के अपने छोटे  मामा , प्यारे मामा श्री हरी कृष्ण जी के साथ एक लम्बी चर्चा में खो जाते और उनके निश्छल और निर्विकार शब्दों को शहद की तरह अपने कानो में पिघल जाने देते  !आज जिंदगी के छोटे होने का फिर अहसास हुआ है .... लग रहा है जैसे हमारा सब कुछ छीन लिया गया है चारों तरफ उदासी है. कुहासा है रुदन और क्रंदन है !  
                                       प्यारे मामा श्री हरी कृष्ण जी एक  नायब प्रतिभाशाली व्यक्ति थे ! उत्तर प्रदेश के  मैनपुरी जिले के एक  छोटे से गाँव मेदेपुर में उनका जन्म १९५३ में हुआ था ! उन्होंने आयुर्वेद की शिक्षा प्राप्त की और अपने पुरे जीवन को निर्धनों और ग्रामीणों  की सेवा में लगा दिया ! चिकित्सक का जीवन उनके लिए एक मिशन था ना कि  कैरियर !
                                         उन्होंने निर्धनों और ग्रामीणों से इलाज का कभी शुल्क न लिया बीमार और उनके परिजन कई बार स्वयं ही बहुत जोर जबरदस्ती कर उन्हें कुछ सहयोग राशी दे देते थे जिसे वे बड़े संकोच के साथ लेते थे ! मैंने अपने जीवन में ऐसा विलक्षण निर्दोष दीनबन्धु दूसरा नहीं देखा !
                                          छोटे  मामा , प्यारे मामा श्री हरी कृष्ण जी एक निपट कर्मयोगी थे सुबह ब्रह्ममुहूर्त ४ बजे उठने से लेकर रात १०.३० बजे सोने तक वे निरंतर एक कर्मयोगी  की भांति अपने कर्त्तव्य निर्वहन  में रत रहते थे ! उन्हें न ही कोई महत्वाकांक्षा थी और न ही कोई लालच जैसे दुनियावी गन्दगी और क्लेशों ने उनको छुआ तक न था सीमित आवश्यकताओं के साथ उन्होंने बिना किसी को दुःख दिए अपना जीवन संयम और कर्मठता के कड़े अनुशाशन में गुज़ारा !
                                          हम जैसी नयी पीढ़ी के लिए तो वे सदैव एक मार्गदर्शी ही रहे ! भैया और मैं उनके सबसे बड़े फैन थे और हम दोनों ने उनको बचपन से ही अपना बौद्धिक साथी माना था उनसे हमारा वार्तालाप  लम्बा , सुरुचिपूर्ण और गंभीर विषयों पर रहता था ! वे एक गज़ब के वक्ता ,मंच संचालक और  प्रकांड रंगकर्मी थे उन्होंने मेदेपुर  की रामलीला के मंचन को अमर बना डाला चार दशक तक मेदेपुर  की रामलीला रंगकर्म की थाती रही जो आज इतिहास की धरोहर है ! उनका सुरुचिपूर्ण और गंभीर मंच संचालन देखते ही बनता था !
                                          ..... प्यारे मामा श्री हरी कृष्ण जी का  जाना एक अपूर्णीय पारिवारिक ,सामाजिक ,क्षेत्रीय और पौराणिक -साहित्यिक-सांस्कृतिक  क्षति है जिससे हम शायद कभी उबार नहीं पायेंगे... आपके जाने के बाद हम समझ पा रहे हैं छोटे  मामा , प्यारे मामा श्री हरी कृष्ण जी  कि  आप क्या थे.....  हम  आपसे बहुत कुछ् पाने से  रह गए अब कोई नहीं है जिससे हम इतना सारा शास्त्रार्थ कर पायेंगे आप अपने साथ वैचारिकता का एक पूरा युग ले गए हैं !  

*****PANKAJ K. SINGH