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Monday, April 12, 2010

वेल डन अम्मा.......

सिंह सदन की खूबसूरती और क़ाबलियत हमारी अम्मा की दुआओं से ही महफूज़ है.अम्मा घर और कुनबे में सबसे बड़ी हैं .घर के पुरुष और महिलाओं पर अम्मा का रसूख साफ देखा जा सकता है .

घर के बच्चों के लिए अम्मा सबसे खूबसूरत चीज़ हैं.घर के बच्चे उनके दीवाने हैं .अम्मा भी बच्चों पर जान छिड़कती हैं.मजाल है कि अम्मा की मौजूदगी में भला कोई बच्चों को तिरछी नजर देख भी ले....बच्चे कितनी भी शैतानी करें अम्मा के रहते सब माफ़.अम्मा घर पर हों तो हर बच्चा उनके पास सोना चाहता है. इस पर बच्चों में जंग भी छिड़ जाती है...लेकिन अम्मा सब सम्भाल लेती हैं. घर में अम्मा का मैं सबसे चहेता हूँ. मैं भी उनको बहुत प्यार करता हूँ........उनसे जुड़े कई संस्मरण है जो आज भी जेहन में तारो-ताज़ा हैं.


अम्मा की बौद्धिक क्षमता का मैं बचपन से ही कयाल हूँ. अम्मा ने इन अस्सी सालों में हर रिश्ता जिया है....जीवन के बहुत से उतार-चढ़ाव देखे हैं. सबमें अम्मा सफल नज़र आती हैं. घर में उनकी स्थिति अंग्रेजी लेखक रस्किन बोंड की कहानियों में "बरगद के पेड़" की तरह है. बदलते दौर में भी अम्मा सब पर भारी नजर आती हैं. अम्मा हर उम्र के बीच चुटकी में सेट हो जाती हैं. एक बार मैं सूफी संत बुल्ले शाह का सूफियाना कलाम सुन रहा था. कलाम मुल्तानी पंजाबी में था. सुनते ही अम्मा ने उसके मायने मुझे समझाए. मैं उनकी इस क़ाबलियत पर दंग रह गया.

..... अम्मा इस उम्र पर अनुभवों से लबरेज है. घर के अन्य सदस्य अम्मा के अनुभवों से लाभ लेते रहते हैं .अम्मा को धर्म और दर्शन को समझने की गज़ब की क्षमता है. अब आप लोग समझते होगें की अम्मा बेहद पढ़ी -लिखी होगीं.... ऐसा बिलकुल भी नहीं है.

उनकी स्कूली तालीम सिफ़र है..................ये बात अलग है की वे अपना और घर के सदस्यों का नाम लिख लेती हैं . अखबार की हेडिंग पढ़ लेती हैं. बचपन में अम्मा मुझ से चोरी छिपे छोटे भाई श्यामू की हिंदी की ओलम की किताब लेकर मुझ से पढ़ती थी. तब कुछ भी मुझे समझ नहीं आता था.....लेकिन अब सब समझ में आता है.

अम्मा की इस उम्र में भी सीखने और कुछ करने का जूनून मेरे लिए हमेशा प्रेरणा का कारण रहा है. अम्मा ने मुझ से पढना-लिखना सिखा ये मेरे जिंदगी के सबसे खुबसूरत अनुभवों में एक है. अम्मा के हौसले और जूनून को सलाम....

***** HRADESH K. SINGH '' JONY ''

3 comments:

स्वप्निल कुमार 'आतिश' said...

amma ki baaten padh kar....munavvar rana saab ke kitne hi sher yad ho aaye..kya kya likhun .... :)

pankaj said...

well done ..jony . we love you....pankaj k. singh

pankaj said...

splendid piece of writing... every word shows the attachment , love , affection & heartiest imotion for '' AMMA''.GOD BLESS YOU ...