हम बच्चों की जान है माँ
मेरी नींदों का सपना माँ
तुम बिन कौन है अपना माँ
ग़र ज़रूरत पडे तो दुर्गा भी बन जाती माँ
ऐ ईश्वर धन्यवाद है तेरा दी मुझे जो ऐसी माँ
है विनती एक यही तुमसे हर बार बने ये हमारी माँ
सुनहरी यादें-- यह कालम मेरे द्वारा लिखा जायेगा जिसमे सिंह सदन से जुड़े हुए हर पहलू को उकेरा जाएगा.
ताना बाना -- घर सिर्फ घर के सदस्यों से ही नहीं बनता....वो बनता है आस-पास के लोगों से, सिंह-सदन से जुड़े उन तमाम लोगों के विषय में इस कालम में लिखा जायेगा, इस कोलम को लिखने का जिम्मा टाइगर पंकज सिंह और मैं निभाएंगे।
आर्काइव -- खुशनुमा लम्हों को फोटो और वीडीओ में कैद करने की जिम्मेदारी और आप तक पहुँचाने की जिम्मेदारी ली है इस ब्लॉग के संपादक हृदेश ने.
तार्रुफ़--सिंह सदन के पारिवारिक सदस्यों के बारे में तफसील से लिखने की जिम्मेदारी ली है हृदेश, पंकज और ब्लॉग के उप संपादक पुष्पेन्द्र ने।
गतिविधियाँ-- घर की हर गतिविधि को ब्लॉग पर लाने की जिम्मेदारी ली है संपादक हृदेश ने। इसमें सामाजिक सारोकारों और त्योहारों के उल्लास को समेटा जायेगा.
दूसरा पहलू--घर के सदस्यों के छुपे हुए हुनर और उनके राजों को रोचक तरीके से पेश करने की जिम्मेदारी ली है अंजू और श्यामकांत ने.......जरा संभल कर रहिएगा.....!
फुलवारी-- बच्चों की प्यारी प्यारी गतिविधियों को आप तक पहुंचाएंगी प्रिया।
कतरन-- सिंह सदन के लोगों का पुराना शगल लेखन रहा है.....तो पुराने पत्र -पत्रिकाओं से कतरन पेश करेंगे उप संपादक पुष्पेन्द्र
फलक-- घर महज़ एक स्थानीय भौगोलिक इकाई नहीं होती...इसका विस्तार होता है वहां तक जहाँ तक घर के सदस्य रहते हैं......कसौली-गाजीपुर-मेदेपुर-गोरखपुर-नगला रते यह सब भी सिंह सदन के विस्तार हैं......नए फलक हैं, यहाँ की गतिविधियों को सामने लाने का जिम्मा उठाएंगे उप संपादक पुष्पेन्द्र......!