"........मैं ईंट गारे वाले घर का तलबगार नहीं,
तू मेरे नाम मुहब्बत का एक घर कर दे !.................."
कन्हैया लाल नंदन ने यह शेर जिस भी परिस्थिति में लिखा हो....मगर "सिंह सदन" के लिए यह मुकम्मल शेर है. रिश्ते सिर्फ संबोधन के लिए ही नहीं होते.....वे दरअसल जीने के लिए होते है......हर आदमी कभी किसी देहलीज़ पर भाई है तो किसी दर पर पति....हर औरत कहीं बहन है तो कहीं माँ......इन्ही रिश्तों में रची बसी कायनात को एक छत के अन्दर जिए जाने की कवायद ही है घर......."सिंह सदन" भी इसी कवायद का एक हिस्सा है........."सिंह सदन " से जुड़े हर एक शख्स और हर एक गतिविधि से परिचय करने के लिए ही ब्लॉग का सहारा लिया गया है ताकि जो भी लिखा जाए वो दिल से लिखा जाये.....और दिल से ही पढ़ा भी जाए.......!
चंदौली को पूर्वी उत्तर प्रदेश का 'धान का कटोरा' (Bowl of Rice) कहा जाता है. इस क्षेत्र में धान की पैदावार काफी होती है. जनसंख्या का बहुत बड़ा हिस्सा कृषि कार्यों से जुड़ा हुआ है, ज़ाहिर है इसमें महिला श्रम शक्ति का बहुत बड़ा योगदान है. इसी योगदान की कहानी कहती हैं यह तस्वीरें .....!
1 comment:
PANKAJ K. SINGH
said...
beautifull.. we want to know some more about chandauli pls
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beautifull.. we want to know some more about chandauli pls
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