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Wednesday, November 16, 2011

COMPREHENSIVE PERSONALITY TEST REPORT CARD 2011



  • VOLUME-- 6

    SRI MAHESH CHANDRA JI .....

    मित्रों हमें  बेहद ख़ुशी है कि हमारे प्रयासों को आप के द्वारा पसंद किया जा रहा है आज हम आपके सामने पेश कर रहे हैं इस श्रंखला की पांचवीं शख्सियत.... 

    ....सिंह सदन के सदस्यों की परिचय श्रृंखला में इस बार हम परिचय करा रहे हैं, अपने प्रिय मौसा महेश चन्द्र जी से।

    महेश चन्द्र जी अत्यन्त सरल, सहज और कर्मठ व्यक्ति हैं। वे ऐसे व्यक्ति हैं , जिन्होंने जीवन की सच्चाईयों से कभी मुँह नहीं मोड़ा। जीवन की आरम्भिक कठिनाईयों से लड़ते हुए उन्होने अपने जीवन को नयी दिशा दी और आज वे अपने जीवन से निष्चित रूप से संतुष्ट नज़र आते हैं। महेश चन्द्र जी का जन्म फिरोजाबाद (तत्कालीन मैनपुरी) जिले के सराय शेख ग्राम में 1958 में हुआ था। अपने तीन भाईयों में सबसे बड़े महेश चन्द्र का आरम्भिक जीवन काफी कठिनाईयों से गुज़रा। उनके पिता श्री पुत्तूलाल कृषि और कुटीर उद्योग से जुड़े हुए थे। पिता पुत्तूलाल सिरसागंज में रहकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। अब तो यह गाँव इटावा आगरा राष्ट्रिय राजमार्ग से जुड़ गया है, लेकिन अब से 40 साल पूर्व यह गाँव अत्यन्त पिछड़ा गाँव था जहाँ बुनियादी सेवाएं भी न थीं। न सड़क, न विद्युत, न विद्यालय, न अस्पताल............आदि। शिक्षा के प्रति ललक भी बहुत ज़्यादा न थी। अधिकांश बच्चे जब 10-12 साल के हो जाते थे तो गाँव में ही अपने पारिवारिक कार्यो में हाथ बटाने लगते थे। महेश चन्द्र को भी अंततः इसी परम्परा का निर्वहन करना था। गाँव के प्राइमरी स्कूल से आरम्भिक पढ़ाई के बाद उन्हें भी खेती-किसानी का कार्य करना था। लेकिन बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे महेश चन्द्र को पढ़-लिखकर सरकारी नौकरी में जाने की धुन सवार हो गयी।

    गाँव की प्राइमरी शिक्षा के बाद भी वे रूके नहीं..........जूनियर हाईस्कूल किया। हाईस्कूल, इण्टर समीपवर्ती कस्बे सिरसागंज से किया। अपने परिवार की वास्तविकता से भागे बिना अपने पिता के कार्यो में हाथ बटाते रहे। खेतों में हल चलाने से लेकर घरेलू पशु भी चराये मगर ध्येय बरकरार रहा...............सरकारी नौकरी।

    जब 10वीं कक्षा पास हुए तो मौसी शीतला देवी से उनका विवाह (1975) में हो गया। 17 वर्ष की आयु में वैवाहिक जीवन प्रारम्भ करने के बाद ज़िम्मेदारियां बढ़ने लगीं मगर इसके बावजूद वे अध्ययन में लगे रहे। सिरसागंज के जैन इण्टर कालेज से इण्टरमीडिएट, नरायण डिग्री कालेज से बी0ए0 और इसके बाद एन0डी0 कालेज भोगांव से राजनीति शास्त्र में एम0ए0 की डिग्री हासिल की।1982 में एम0ए0 करने के बाद भी वे नौकरी पाने का प्रयास करते रहे...................1984 में उनका प्रयास सफल हुआ। रेलवे में चयनित हुए।

    विगत 25 वर्षों में रेलवे की नौकरी में उनका सफर काफी सफल रहा है । जालंधर, शाहकोट , जिन्दल पिण्डी, जमशेर खास तथा चिहडु रेलवे स्टेशनों पर उनकी पोस्टिंग रही। उनके तीन बच्चे भी हैं - रंजीत, संदीप और रानी। तीनों बच्चे उनकी तरह सीधे-सज्जन हैं। बनावट और अहंकार से दूर...........। अभी चार माह पूर्व फरवरी माह में रंजीत का विवाह भी हो गया है। फिलहाल वे पंजाब में हैं, लेकिन जैसे ही मौका मिलता है वे मैनपुरी चले आते हैं। परिवार में उत्सव का कोई भी अवसर हो............ महेश मौसा शायद ही कभी अनुपस्थित रहे हों। प्रत्येक शादी -विवाह शुभ अवसर पर वे हाजिर रहते हैं। इधर कुछ सालों से उनका रूझान आध्यात्म की ओर बढ़ा है....... पंजाबी डेरों का प्रभाव उनके दिमाग पर हावी हुआ है, सो वे जब भी गाँव आते हैं, तो आध्यात्म के किस्सों को सुनाते हैं। इन किस्सों को सुनने में गाँव वासी पर्याप्त रूचि लेते हैं। वे अब चौकी भी लगाते हैं। उनका दावा है कि वे किसी भी व्यक्ति का भविष्य -भूत बता सकते हैं। गाँव वालों के लिए वैसे भी इस तरह के व्यक्ति हमेशा ही श्रद्धा-कौतूहल और आश्चर्य का दूसरा रूप होते हैं............. सो उनके आस-पास ग्रामीणों की काफी भीड़ रहती है।

    मौसा का मन अब पंजाब में नही लगता..................वे नौकरी समाप्त कर वापस अपने जिले मैनपुरी या फिरोजाबाद आना चाहता हैं , वे यह भी चाहते हैं कि उनके बच्चों का कैरियर भी यू0पी0 में ही कहीं बन जाय.............।

    कई यादें उनसे जुड़ी हुई हैं.............जब हम उन्नाव-अचलगंज में थे तो वे हमारे घर आया करते थे। जब भी शादी -संस्कार होते थे.................महिलाओं के मजाक के प्रिय पात्र भी वही होते थे।

    बहरहाल सिंह सदन के प्रत्येक सदस्य का सम्मान उन्हें प्राप्त है। उनकी सरलता, सहजता, आडंबर हीनता, सहृदयता को सिंह सदन प्रणाम करता है।

  • COMPREHENSIVE PERSONALITY TEST REPORT CARD OF SRI MAHESH CHANDRA JI ....
  • 1. व्यक्तित्व  * * 1.75
  • 2. रिश्तों में मर्यादा एवं उत्तरदायित्व की भावना * * 1.5
  • ३. जीवन मूल्यों के प्रति आग्रह * * 1.5
  • ४.  भौतिक उपलब्धियां * * 1.75
  • ५.  लोक जीवन एवं सार्वजनिक छवि * * 1.75
  • ६.  स्वास्थ्य एवं अनुशासन * * 1.5
  • ७. जीवन में आध्यात्मिकता एवं चिंतन शीलता *  1.75
  • ८ . सत्य का अनुश्रवण एवं सत्य का साथ देने की क्षमता *  1.2.5
  • ९.  जनहित एवं सेवा भावना * 1.5
  • १०.  आत्मविश्वास एवं प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझने की क्षमता * * 1.5
  • ११. निर्विकार एवं निर्दोषता * *  1.5
  • १२. जिज्ञासु एवं नित नया सीखने की ललक *  1
  • १३. रचनात्मकता * 1.5
  • १४. वाक् निपुणता एवं भाषण शैली * * 1.75
  • १५ .आत्म द्रष्टि एवं दूरद्रष्टि * 1.25
  • १६. साहस एवं निर्भीकता *  1
  • १७. सिंह सदन के गौरव को बढ़ाने में योगदान * 1
  • १८. अन्य सदस्यों  को प्रेरित करने की नेतृत्व  क्षमता * 1
  • १९.  प्रगतिशील द्रष्टिकोण एवं निरंतर प्रगति की ललक * 1
  • २०. निस्वार्थ एवं कपट रहित जीवन * 1.50
TOTAL SCORE IS ---- 28.25

ARTICLE BY SRI PAWAN KUMAR & PRESENTED BY PANKAJ - PUSHPENDRA

2 comments:

Anonymous said...

वाह वाह .... सिंह सदन के एक और नायाब हीरे का परीक्षण.... जिस तरह कड़ी कसौटी पर व्यक्तिवों को कसा जा रहा है वो वाकई तारीफ के काबिल है..... एक सुझाव है जो देना चाहूँगा.... व्यक्तित्वों के विषय में पुराने लेखों से 50-100 शब्द ही लिए जाएँ साथ ही कुछ लोगों की दो एक टिप्पणी भी साथ में दी जा सकती हैं, इससे दोहराव से बचा जा सकेगा और कुछ नए विचार भी सामने आ सकेंगे....!!!

PK

psingh said...

आदरणीय भैया
बहुत खूब बहुत अच्छा
परिक्षण पुरे जीवन को आपने बहुत
खूबसूरती से बयां किया है
अप कोटि कोटि बधाई के पात्र है
और जो इस कसौटी पर खरे उतरे है उन्हें भी
मेरा प्रणाम