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Thursday, February 9, 2012


प्रिय मित्रो  


हालाँकि आज मेरा दिन नहीं है किन्तु कुछ लेखक व्यस्ताओं के कारण उपस्थित नहीं हो सके इस लिए
आप आज राग दरबार का नया volume पढ़े और सिंह सदन के साथ इंजॉय करें .....!

 
जब भी लोग बड़े होते है |
ऊँचे उनके सर होते है ||


कितनी भी आवाज़ लगाओ |
शीशे के सब घर होते है ||


सच्चाई की कीमत है ये |
लोग जो अब बेघर होते है ||


खौफ जदा मंजर ही एसा |
आँखों में भी डर होते है || 


जिन्दा होकर मरे हुए है |
वो जो किसी के भर होते है  ||

                                       पुष्पेन्द्र सिंह "पुष्प"



राग दरबार – vol-3