Total Pageviews

Thursday, April 7, 2011

मैनपुरी मुशायरे की पूर्व संध्या-2

मैनपुरी के ऐतिहासिक श्रीदेवी मेला एवं ग्राम सुधार प्रदर्शनी 2011में आयोजित होने वाले में आने वाले मेहमान शायरों की परिचय श्रृंखला में कल मैंने आपको तीन ग़ज़लकारों से तआर्रुफ़ कराया था....इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए मैं आज उन चार शायरों के विषय में लिखने का प्रयास कर रहा हूँ जो इस मुशायरे को ख़ास बनाने के लिए अपनी आमद करेंगे....!

शुरूआत करता हूँ अपने प्रिय शायर वसीम बरेलवी साहब से- दरअसल इस मुशायरे की सदारत ज़नाब वसीम बरेलवी साहब ही करेंगे। वसीम साहब मौजूदा दौर के उन शायरों में से एक हैं जिन्होने संवेदनाओं को महत्व देते हुए अपना रचना संसार सजाया है. ‘फिक्र' की शायरी उनकी पहचान है. जीवन का दर्शन उनकी शायरी में लफ़्ज - लफ़्ज पगा हुआ है. मैं खुश किस्मत हूँ कि मुझे उनका बहुत प्यार मिला है. निहायत खूबसूरत और संजीदगी वाले इस इन्सान की मैं इसलिए बहुत इज्जत करता हूँ क्योंकि वसीम साहब एक अच्छे शायर तो हैं हीं--इन्सान उससे भी शानदार हैं. इस मुशायरे में वे ‘हैदराबाद‘ के उस मुशायरे को छोड़कर आ रहे हैं, जो शायद उनके लिए बेहतर प्लेटफार्म साबित हो सकता था पर उन्होने ‘मोहब्बत‘ का साथ दिया और हैदराबाद की बजाय मैनपुरी आना स्वीकार किया. वसीम साहब की गजलियात के विषय में तो कुछ भी लिखा ही नहीं जा सकता. कई शोध उन की शायरी पर हो चुके हैं. जगजीत सिंह, चन्दन दास और स्वर कोकिला लता जी तक वसीम साहब की शायरी के दीवाने हैं. 'आँखों आँखों रहे' और 'मौसम अन्दर बाहर के' जैसी कृतियों के सहारे उनकी रचनाएँ हम तक पहुँच चुकी हैं.... उनके बारे में लिख पाना मेरी औकात से बाहर है....फिलहाल मैं वसीम साहब वो ग़ज़ल पोस्ट कर रहा हूँ जो मुझे हमेशा जीने का रास्ता दिखाती है........-

उसूलों पे जहाँ आँच आये टकराना ज़रूरी है, जो ज़िन्दा हों तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है !! नई उम्रों की ख़ुदमुख़्तारियों को कौन समझाए कहाँ से बच के चलना है कहाँ जाना ज़रूरी है !! थके हारे परिन्दे जब बसेरे के लिये लौटे सलीक़ामन्द शाख़ों का लचक जाना ज़रूरी है !! बहुत बेबाक आँखों में त'अल्लुक़ टिक नहीं पाता मोहब्बत में कशिश रखने को शर्माना ज़रूरी है !! सलीका ही नहीं शायद उसे महसूस करने जो कहता है ख़ुदा है तो नज़र आना ज़रूरी है !!

वसीम साहब के बाद मुखातिब होते हैं अकील नोमानी की तरफ। अकील नोमानी भी मौजूदा दौर के उन शायरों में से एक है जिनके कंधो पर शायरी का भविष्य टिका हुआ है. हाल ही में उनका ‘रहगुजर‘ गजल संग्रह प्रकाशित हुआ है. अकील नोमानी एक खामोश शायर हैं. सच तो यह है कि वे जितने बड़े शायर हैं, उतनी मकबूलियत उनके हिस्से में नहीं आई. खैर...आज नहीं तो कल वक्त पहचानेगा उन्हेंऔर ज़रूर पहचानेगा....! वैसे अकील नोमानी इन सबसे बेखबर अपने सफर पर बढ़ते जा रहे हैं. उनका हर एक शेर उनके अहसासों में इंसानियत होने का सुबूत पेश करता है. अकील साहब ने इस मुशायरे में अव्वल दर्जे के शायरों को बुलाने में संयोजक का हाथ बंटाया है उसके लिए संयोजक उनके कर्जदार हैं. अकील तो सरकारी मुलाजिम हैं मगर उनकी शायरी में जो सोच है वो ऐसी है जो उन्हें कुछ ख़ास बनाती है। वे स्वयं ही अपने बारे में कहते हैं कि ‘‘मैने शेर कहते वक्त हमेशा फ़ितरी तकाजों और जबानो- बयान के सेहतमंद उसूलों का ही एहतराम किया है‘‘ तो कहीं से गलत नहीं लगता. उनकी इस बात को ये गज़ल और भी पुख्ता करती है-

महाजे़-जंग पर अक्सर बहुत कुछ खोना पड़ता है किसी पत्थर से टकराने को पत्थर होना पड़ता है !! ख़ुशी ग़म से अलग रहकर मुकम्मल हो नहीं सकती मुसलसल हॅसने वालों को भी आखि़र रोना पड़ता है !! अभी तक नींद से पूरी तरह रिश्ता नहीं टूटा अभी आँखों को कुछ ख्वाबों की ख़ातिर सोना पड़ता है !! मैं जिन लोगो से खुद को मुख़तलिफ़ महसूस करता हूँ मुझे अक्सर उन्हीं लोगों में शामिल होना पड़ता है !! किसे आवाज़ दें यादों के तपते रेगज़ारों में यहॉ तो अपना-अपना बोझ खुद ही ढोना पड़ता है !!

बढ़ते हैं अगले नाम की तरफ....अगला नाम है मोहतरमा नुसरत मेहदी साहिबा का . नुसरत मेहदी भी उन शायरों में से एक हैं जिन्होंने पिछले दिनों में अपनी शायरी अपने कलाम की वज़ह से एक मुकम्मल जगह बनाई है. फिलहाल वे मध्यप्रदेश उर्दू अकादेमी के सचिव के पद का कार्य कर रही हैं........ वैसे मोहतरमा नुसरत मेहदी का उत्तर प्रदेश से पुराना नाता है. वे नगीना, ज़िला बिजनौर में इल्तिजा हुसैन रिज़वी के घर पैदा हुई, शुरुआती तालीम उत्तरप्रदेश में ही हुई इसके बाद वे भोपाल चलीगयीं.वे शिक्षा महकमे में वे अहम ओहदे पर रहीं हैं. उनके कलाम, कहानियांअक्सर इंग्लिश, हिन्दी और उर्दू अखबारों, मैग्ज़ीन और जरनल्स में छपती रहती है. टी.वी. और रेडियों के ज़रिये भी इनके कलाम को सुना व देखा जा सकता है. समाज सेवा के शौक के अलावा समाजी व अदबी तन्ज़ीमों से जुड़ी हुई है. घर का माहौल अदबी रहा है. इनके शौहर असद मेहदी भी कहानिया लिखतें है. वे हिन्दुस्तान के कई शहरों में मुशायरों और सेमीनारों के ज़रिये भोपाल शहर की नुमाइंदिगी कर चुकी है. मैनपुरी में वे पहली दफा अपने कलाम का परचम लहरायेगीं.

इनके साथ ही एक और आमंत्रित शायर का ज़िक्र करना चाहूँगा . वे भी युवा शायर हैं और अदब के शायर हैं. नाम है मनीष शुक्ल. मनीष सरकारी मुलाजिम हैं...वैसे अगर वे सरकारी मुलाजिम न होते तो शायद उनके लिए बहुत बेहतर होता क्योंकि तब वे निश्चित ही नामवर बड़े शायरों की फेहरिस्त में होते... खैर ! मेरा और मनीष कासाथ गत 12 बरस से है. मनीष से मेरा साथ तब से है जब हमारी नयी नयी नौकरी लगी थी . हम ट्रेनिंग में लखनऊ में थे और फिनान्सियल इंस्टिट्यूट में ट्रेनिंग ले रहे थे तभी शेर ओ शायरी के शौक ने हम को एक दूसरे के करीब ला दिया . हम लोग नैनीताल में भी ट्रेनिंग साथ साथ कर रहे थे ....तब ये शौक और परवान चढा. हम दोनों घंटो एक दूसरे को शेर ओ शायरी को शेयर करते. बहरहाल मनीष के साथ रिश्ते दिन ब दिन मजबूत हुए, मुझे ये कहने में कोई हिचक नही कि मनीष आज मेरे सबसे अच्छे दोस्तों में से एक है. मेरी पत्नी अंजू के वे मुंहबोले भाई भी हैं. उम्र में 5 बरस बड़ा होने के कारण मनीष मेरे बड़े भाई के रूप में भी है. उनकी सबसे ख़ास बात ये है की अच्छे अधिकारी होने के साथ साथ वे एक अच्छे शायर भी हैं। बड़ी खामोशी के साथ वे अपना साहित्य सृजन में लगे हुए हैं और मज़े की बात ये है की उनकी शायरी में अदब तो है ही जीवन के मूल्यों की गहरी समझ भी है. मेरे अन्य शायर दोस्तों की तरह वे भी दिखावे और मंच की शायरी से दूर रहते हैं . उनको पहली बार मंच पर लाने का काम मैंने तब किया जब मैं मीरगंज में उप जिलाधिकारी था और एक मुशायरा वहां आयोजित कराया था. 1970को उन्नाव में जन्मे मनीष शुक्ला की एक ग़ज़ल यहाँ पेश है ............निश्चित रूप से अच्छी लगेगी -

कागजों पर मुफलिसी के मोर्चे सर हो गए, और कहने के लिए हालात बेहतर हो गए !! प्यास के शिद्दत के मारों की अजियत देखिये , खुश्क आखों में नदी के ख्वाब पत्थर हो गए ज़र्रा ज़र्रा खौफ में है गोशा गोशा जल रहे, अब के मौसम के न जाने कैसे तेवर हो गए !! सबके सब सुलझा रहे हैं आसमाँ की गुत्थियां, मस'अले सारे ज़मी के हाशिये पर हो गए !! फूल अब करने लगे हैं खुदकुशी का फैसला, बाग़ के हालात देखो कितने बदतर हो गए !! क्रमश:

Wednesday, April 6, 2011

WELCOME TO MUSHAYRA - E - MAINPURI



....आइये हुज़ूर ....मुशायरा -ए- मैनपुरी में आपका स्वागत है !

...मुशायरा तो सभी मेलों- महफ़िलों -नुमयिशों की जान होता है ! ...मैनपुरी नुमायश में हमेशा से ही मुशायरा सबसे दिलकश प्रोग्राम रहा है ..... जिसका आनंद हम सभी भाई बचपन से ही उठाते रहे हैं !

बड़ी ख़ुशी की बात है की आज यह मुशायरा खुद हम लोग ही कराने जा रहे हैं ! इस जबरदस्त प्रोग्राम के लिए दो महीने से धुआधार तैयारियां की जा रही हैं... और अगली ९ अप्रैल को जो प्रोग्राम पेश होगा ...वो प्रोग्राम तारिखसाज़ होगा ! यकीन मानिये इस कदर बेहतरीन मुशायरा आपने ताउम्र नहीं देखा होगा !

दुनिया भर के नामचीन शायरों की महफ़िल ९ अप्रैल को मैनपुरी में सजेगी ! इन शायरों के किरदार और कारकर्दगी से आपका तार्रुफ़ कराने के लिए अलग से एक्सक्लूसिव पोस्ट शाया की जा रही हैं !

ORGANISING COMMITTEE की जानिब से मैं आप सभी शामयिन और शायतीन का मैं इस्तकबाल करता हूँ और ''सिंह सदन'' के सभी चाहने वालों को इस मुशायरे की दावत देता हूँ !

.... तो दोस्तों मैनपुरी आइये और एक बेहतरीन शाम का आनंद लीजिये !!

* * * * * PANKAJ K. SINGH

मैनपुरी मुशायरे की पूर्व संध्या.....! (PART-1)



मैनपुरी की ऐतिहासिक श्रीदेवी मेला एवं ग्राम सुधार प्रदर्शनी २०११ शुरू हो चुकी है.... इस नुमाइश में कादंबरी मंच पर हमेशा से बेहतरीन साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते रहे है. गत वर्ष से अपने हृदेश भी इस समिति में संयोजक मंडल में शामिल किये जा चुके हैं. गत वर्ष उन्होंने युवा महोत्सव का शानदार संयोजन किया था, संभवत: उनकी मेहनत और उनकी जीवटता को मद्देनज़र रखते हुए इस बार उन्हें आल इण्डिया मुशायरे की कमान सौंपी गयी गयी है.... ! इस बार के मुशायरे में जो शायर जुट रहे हैं वे सारे के सारे अव्वल दर्जे के शायर हैं, सोचा की मुशायरे से पूर्व इन सब हुनरमंदों से आप सबका राब्ता करा दूं..... दो-तीन कड़ियों की इस पोस्ट का पहला अंक आज पेश कर रहा हूँ।


इस मुशायरे की जान होंगी मोहतरमा इशरत आफरीन......! वे इस मुशायरे को इंटरनेशनल दर्ज़ा दिलाएंगी क्योंकि मोहतरमा पाकिस्तान की हैं और फिलहाल अमेरिका में शिफ्ट हो चुकी हैं.....! हमारी खुशकिस्मती होगी उन्हें सुनना. मोहतरमा इशरत आफरीन का नाम उर्दू अरब में बडी इज्ज़त के साथ लिया जाता है. वे मूलतः पाकिस्तानी हैं जो एक भारतीय वकील जनाब़ सैयद परवेज से विवाह करने के बाद अमेरिका में हयूस्टन टेक्सास में बस गयीं. मोहतरमा इशरत आफरीन उर्दू-अदब की उन नामचीन शायराओं में से एक हैं जिन्होने ‘‘नारीवादी आन्दोलन‘‘ को चलाने में मजबूत भूमिका निभाई है. अदा ज़ाफरी, जोहरा निगाह, फहमीदा रियाज़, किश्वर नाहीद, परवीन शाकिर की श्रृंखला में मोहतरमा इशरत आफरीन का नाम बड़े अदब के साथ शामिल किया जाता है. मोहतरमा आफरीन के दो गज़ल संग्रह ‘कुंज पीले फूलों का‘ (1985) तथा ‘धूप अपने हिस्से की‘ (2005) प्रकाशित हो चुके हैं. मुझे याद आ रहा है कि जगजीत सिंह ने मोहतरमा की एक गज़ल गाई है जो बहुत पॉपुलर हुयी.....

अपनी आग को जिन्दा रखना कितना मुश्किल है,

पत्थर बीच आईना रखना कितना मुश्किल है !!


चुल्लू में हो दर्द का दरिया ध्यान में उसके होंठ,

यू भी खुद को प्यासा रखना कितना मुश्किल है !!

आज कल मोहतरमा आफरीन टेक्सास यूनीवर्सिटी में उर्दू की हेड आफ डिपार्टमेण्ट हैं। भारत में उनका आगमन, और वो भी मैनपुरी मुशायरे में हमारे लिए शान की बात होगी। हम तो बस यही कहेंगे कि मोहतरमा इशरत आफरीन अपने नाम के मुताबिक ‘उपलब्धि की सकारात्मक प्रतिक्रिया‘ ही साबित होंगी.

अब चलते हैं मंच के अगले नामवर शायरों की जानिब.....! इधर कुछ समय से जिन युवा गज़लकारों ने बडी मजबूती से अपनी कलम से अपने होने का एहसास कराया है उनमें से ‘आलोक श्रीवास्तव‘ एक बडा नाम है। आलोक मेरे मित्र हैं और सच तो यह है कि मुझे फक्र है कि आलोक मेरे मित्र हैं. आलोक को उनके शानदार लेखन के लिए हाल ही में रूस का साहित्यिक ‘पुश्किन ‘ अवार्ड मिला है. युवावस्था में ही इस शायर की कृति ‘आमीन‘ धूम मचा चुकी है. गज़ल गायक जगजीत सिंह और शुभा मुदगल ने यदि इस युवा शायर की ग़ज़लें गाई है तो उसका चुनाव कहीं से गलत नहीं है. मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक नगर विदिशा में आलोक श्रीवास्तव का बचपन गुज़रा और वहीं से आपने हिंदी में स्नातकोत्तर तक शिक्षा ग्रहण की. बाद में वे पत्रकारिता से जुड़ गए. बेहद बारीक़ अहसासात को स्पर्श करती हुई आपकी ग़ज़लियात अपनी संवेदनाओं के लिये जानी जाती हैं. सलीक़े से कही गई कड़वी बातें भी आपकी रचनाधर्मिता की उंगली पकड़ कर अदब की महफ़िल में आ खड़ी होती हैं. जगजीत सिंह और शुभा मुद्गल जैसे फ़नक़ारों ने आपकी ग़ज़लियात को स्वर दिया है. इन दिनों आप दिल्ली में एक समाचार चैनल में कार्यरत हैं. यदि पुरस्कारों की फ़ेहरिस्त बनाई जाए तो ‘अभिनव शब्द शिल्पी सम्मान 2002′; ‘मप्र साहित्य अकादमी का दुष्यंत कुमार पुरस्कार-2007′; ‘भगवशरण चतुर्वेदी सम्मान 2008′; ‘परंपरा ऋतुराज सम्मान-2009′ और ‘विनोबा भावे पत्रकारिता सम्मान-2009′ आपके खाते में अभी तक आते हैं. कल ही वे अपनी नयी ग़ज़ल मुझे फ़ोन पर सुनकर एहसासों से तर बतर कर रहे थे.....फिलहाल मैं यहाँ उनकी उस ग़ज़ल को पोस्ट जकर रहा हूँ जिसने मुझे उनका मुरीद बना दिया.... मुलाहिजा फरमाएं -

चिंतन, दर्शन, जीवन, सर्जन, रूह, नज़र पर छाई अम्मा

सारे घर का शोर-शराबा, सूनापन, तन्हाई अम्मा !!

घर के झीने रिश्ते मैंने लाखों बार उधड़ते देखे

चुपके -चुपके कर देती है, जाने कब तुरपाई अम्मा !!

सारे रिश्ते- जेठ-दुपहरी, गर्म-हवा, आतिश, अंगारे,

झरना, दरिया, झील, समन्दर, भीनी-सी पुरवाई अम्मा !!

बाबूजी गुज़रे आपस में सब चीज़ें तक्सीम हुईं,

तो-मैं घर में सबसे छोटा था, मेरे हिस्से आई अम्मा !!


अब ज़रा आगे बढ़ते हैं....... आलोक श्रीवास्तव की ही उम्र के ही एक और शायर से तआर्रुफ़ करा रहा हूँ नाम है मदन मोहन 'दानिश'......वे सिर्फ नाम के ही नहीं वाकई 'दानिश' हैं। दानिश भी उन नौजवान शायरों में से हैं जिनकी शायरी उनकी उम्र से बड़ी लगती है।यदि उनके बारे में अगर आपको पता न हो तो उनकी शायरी पढने-सुनाने के बाद यही महसूस करेंफ्गे की दानिश ज़रूर ही कोई बुजुर्ग शायर होंगे. उनके बारे में राहत इन्दौरी जैसे नामचीन शायर अगर यह कहते हैं कि "शायरी पुलसरात पर नहीं तो कम अज़ कम रस्सिओं पर चलने का अमल ज़रूर है. आसमानों को पढ़ना, ख़लाओं को सुनना और मौत को जीने का हुनर है. बीसवीं सदी की आखिरी दहाई में जिन चंद नौजवानों ने मुझे मुतवज्जा किया उनमें एक नाम मदन मोहन दानिश का है." तो कत्तई गलत नहीं कहते. निदा फाजली तो यहाँ तक कहते हैं कि दानिश की ग़ज़ल अपने शख्सी दायरे में इस विधा के तकाजों का एहतराम भी करती है और इन्हीं पाबंदियों में अपने अंदाज़ संवारती है. वो आज के शायर हैं. आज की ज़िन्दगी से उनकी ग़ज़ल का रिश्ता है. इस रिश्ते को उन्होंने ग़ज़ल के तवील इतिहास के शऊर से ज़यादा पुख्ता बनाया है और जो जिया है उसे ग़ज़ल में दर्शाया है. उन्होंने अपने लिए जिस भाषा का इन्तखाब किया है वो सड़क पर चलती भी है, वक़्त के साथ बदलती भी है, चाँद के साथ ढलती भी है.

मुझे याद है जब उनकी ग़ज़ल की पुस्तक "अगर" छापी तो उसकी एक प्रति बड़े प्यार से उन्होंने मुझे भेजी थी... "अगर" आज तक मेरी शेल्फ में सहेजी हुयी है.....जब भी कुछ नया पढने का मन करता हूँ तुरंत उनकी किसी भी ग़ज़ल के दो तीन शेर पढता हूँ यकीं मानिये जिंदगी से जुदा हुआ महसूस करता हूँ। उनकी एक ग़ज़ल मुझे बेहद पसंद है यहाँ लगा रहा हूँ....... आप भी महसूस कीजिये-

जीते जी ये रोज़ का मरना ठीक नहीं,

अपने आप से इतना डरना ठीक नहीं।

मीठी झील का पानी पीने की खातिर,

इस जंगल से रोज़ गुज़रना ठीक नहीं।

कुछ मौजों ने मुझको भी पहचान लिया,

अब दरया के पार उतरना ठीक नहीं।

वरना तुझसे दुनिया बच के निकलेगी,

ख़ुद से इतनी बातें करना ठीक नहीं।

सीधे सच्चे बाशिंदे हैं बस्ती के,

दानिश, इन पर जादू करना ठीक नहीं.

क्रमश:

Friday, April 1, 2011

SRILANKANS ARE THE BETTER SIDE


.... but indians are so unpredictable

However i dreamed last night that SRILANKA has won the WORLD CUP 2011 FINAL match by 34 runs against all time favourite INDIA , but even though i am not sure that my predictions are going to be true . Suddenly Indians got their grip and apart from some mistakes they played very good in their last two very important games.

i do believe that srilankans are much better side than us .srilankan skipper kumar sangkara is far- far better than our Dhoni. Everybody knows better that there is no comparison between living legendMurlitharan and Harbhajan. Dilshaan has been more consistent and solid than Sehwaag in ongoing worldcup. Tharanga is getting much more runs than Gambhir . Malinga is the top fast bowler of this era . he is the only fast bowler today who can bowl all six deliveries on yorker length with accuracy and speed , from indian side nobody has that kind of original talent and ability . However Zaheer khan has been the only indian bowler in this world cup so far who has created an impact and pressure on opponents .

Tendulkar and yuvraj looked absolutely calm in this world cup so far , these guys can create a huge difference between both sides . From indian side i would like to get a chance on Virat kohli and R. ashwin and from srilankan side mendis and samarveera could prove the match maker for their respective sides .

My prediction for WORLD CUP 2011 Man of match is DILSHAAN . So dear inmates of SINGHSADAN ...enjoy the grand finale of this great world cup and pray for indians because these are only 12 billion prayers who have get India playing in the world cup final, otherwise india was certainly no where in this world cup .

***** PANKAJ K. SINGH

इण्डिया......दे घुमा के.....!!!!


हम तो निपट लिए....... सोचा था कि ये विश्व कप साउथ अफ्रीका की झोली में जायेगा साउथ अफ्रीका मगर तो हमेशा की तरह चोकर्स ही निकले. न्यूजीलैंड से हारकर वे तो क्वार्टर में ही विदा हो लिए...... धोनी की कम्पनी धमाल मचाये है.......!


लीग मैचेज में भारतीय टीम का प्रदर्शन जितना अनपेक्षित था, वो काफी कष्टकारी था ......मगर हर मैच के बाद भारतीय लय पकड़ते गए.अब तो फ़ाइनल ही सामने है....भारतीयों की फार्म से तो लग रहा है कि श्रीलंका भी कहीं चित्त न हो जाये.....! पंकज के आर्टिकल WORLD CUP 2K11 CONTEST में सिंह सदन के सदस्यों की प्रतिक्रिया काफी रोचक रहीं . इस हिसाब से मेरे और पिंटू के अनुमान गलत निकले. श्यामू ने फ़ाइनल में पाकिस्तान की उम्मीद की थी सो भी गलत रहा....हाँ फ़ाइनल में अगर श्रीलंका जीती तो श्यामू और पंकज सही होंगे और अगर भारत जीती तो अंजू और जोनी का दांव सही बैठेगा.....!


अब वर्ल्ड कप कौन जीतेगा ये तो कल देखा जायेगा मगर फ़ाइनल अच्छा होगा इसमें कोई संदेह नहीं....सिंह सदन की और से भारतीयों को बहुत बहुत शुभकामनायें..... दुआ है सचिन अपनी वंडरफुल सेंचुरी कल पूरी करें और टर्बनेटर हरभजन सिंह 5 विकेट लें और धोनी 1983 का इतिहास दोहराएँ...........!

*****PK

Tuesday, March 22, 2011

PAY BACK TO SOCIETY


A LETTER TO LOVING ..SHAMMI
प्रिय शम्मी ...

....आशा है कि तुम स्वस्थ और प्रसन्न होगे ... इस होली पर तुम्हारे और हमारी नई डार्लिंग डॉल "लकी" के साथ समय गुजारना बेहद अच्छा लगा .. मुझे सबसे ज्यादा ख़ुशी इस बात से हुई कि अब तुम काफी समय बाद मौलिक शम्मी के रूप में वापस दिखे ..तुम से हमारी काफी खुशियाँ और आशाएं जुडी हैं ... इसलिए भी क्योंकि तुम सबसे छोटे और हम सभी के अति प्रिय हो ... और शायद इसलिए भी ...क्योंकि तुम संभवतः हमारी मौजूदा पीढी के आखिरी सबसे बड़े होनहार हो !

.. बीते दिनों ... दिन शायद उतने अच्छे न थे ...कई मोड़ों पर तुम्हारा कड़ा इम्तिहान नियति ने लिया .. पर जीत अंततः सदैव निर्दोष और निर्विकार लोगों के हाथ लगी है !

.. भौतिक सफलताएं इस संसार और कर्मक्षेत्र के लिए अपरिहार्य हैं ... पर तुम मुझे इस पृथ्वी पर सबसे अधिक प्रिय हो ... तो मात्र इसलिए क्योंकि मैंने इस पृथ्वी पर तुमसे अधिक प्रिय .. साफ़ ..और नेक -दिल ...परोपकारी ...सच्चाई पसंद.... निर्दोष और पापरहित बच्चा कभी कोई नहीं देखा .. तुम प्राय: सहज मानवीय गलतियां करते हो और समय आने पर उन गलतियों को स्वीकारने में हिचकते नहीं .. यह इतना ताकतवर गुण है जो एक इंसान को जीते जी असाधारण बना देता है !

....हारना कोई बड़ी बात नहीं होती .. बुरा वक्त ही भविष्य में हमारा सबसे अच्छा गुरु और मित्र सिद्ध होता है ..ईश्वर करे तुम और सफलताएं प्राप्त करो और समाज के लिए एक मिसाल बन जाओ ... पर मुझे इस सबसे भी ज्यादा ख़ुशी तभी होगी ....जब मैं यह यकीन कर पाऊंगा कि तुमने एक प्रसन्न ,आत्म पुरुषार्थ संपन्न ,गौरव शाली ,परोपकारी, त्यागपरक जीवन चुन लिया है !

...मैं तुम्हे उन साधारण... तुच्छ ...अधिसंख्य अधिकारीयों की फ़ौज का हिस्सा बनते कदापि नहीं देखना चाहता जिनके लिए जीवन का अर्थ मात्र कमाना ,तफरीह करना, औरतों की नाजायज़ ख्वाहिशें पूरी करना है.... यह वो लोग हैं जिन्होंने अपनी जड़ों को भुला दिया... और समाज को कुछ भी वापस नहीं किया ! ऐसे ही लोगों को बाबा साहेब आंबेडकर ने कलंक और मान्यवर कांशीराम ने ढोंगी करार दिया था ! ऐसे ही ढोंगी अफसर केवल अपने ही घर ,समाज और परिवार को लूटते हैं.... और अपने ही कमजोर भाइयों का शोषण करते हैं ! ''सिंह सदन'' ऐसी घटिया सोच का बहिष्कार करता है !

.... सिंह सदन ऊँचे आदर्शों वाली विरासत की थाती को आगे ले जाने के लिए संकल्पबद्ध है ... भैया के नेतृत्व में मैं, जोनी और तुम्हे इस संकल्प को आगे बढ़ाना है ...आमीन ... !

*****PANKAJ K. SINGH

Thursday, March 10, 2011

WORLD CUP 2K11 CONTEST


Dear members of SINGH SADAN ,

.......I hope all of you will be enjoying a brand new success script written by dear SHAMMI. Apart from this glory ... let me permit to take you in a new field ... ICC CRICKET WORLD CUP 2011.

...World knows better that SINGH SADAN is a CRICKET CRAZY FAMILY. SINGH SADAN has a lot of great cricketers itself. Now it's Time for your predictions for ICC CRICKET WORLD CUP 2011's quarter finals , semi finals & Grand finale... just pick your choices ... and if your choices come true you will get great prizes ... so rush your entries within next 24 hours... good luck & love.

TAKE A LOOK AT MY CHOICES HERE...

QUARTER FINALS...

1. AUSTRALIA vs WEST INDIES
2. SRI LANKA vs ENGLAND
3. NEW ZEALAND vs INDIA
4. PAKISTAN vs SOUTH AFRICA

SEMI FINALS ...

1. AUSTRALIA vs SRI LANKA
2. INDIA vs SOUTH AFRICA

FINAL...

SRI LANKA vs SOUTH AFRICA

WINNER... SRI LANKA

***** PANKAJ K. SINGH