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Thursday, November 17, 2011

COMPREHENSIVE PERSONALITY TEST REPORT CARD 2011


VOLUME--- 7

SRI VIMLESH KUMAR JI ....

मित्रों... आज हम आपके सामने पेश कर रहे हैं एक ऐसी  शख्सियत ...जो संघर्ष - जीवटता और अनन्य निष्ठा की स्वयं ही एक मिसाल है ! बड़े भैया श्री पवन कुमार यदि   उन्हें नियति से लड़ने वाला अदम्य योद्धा मानते हैं... तो गीतकार पुष्पेन्द्र सिंह उन्हें संघर्ष और साहस का प्रतीक मानते हैं !...  ये शख्सियत हैं ..श्री विमलेश कुमार जी !

...  हमारा मानना है कि उन्होंने वैवाहिक रीत- रिवाजों के संपादन में विशेषज्ञता हासिल कर रचनात्मकता के उच्च स्तर को छुआ है ! उनकी वजह से हम इस क्लिष्ट क्षेत्र में भी सम्पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर हो गए हैं !

 इनका निर्माता इकाइयों ( MANUFACTURING UNITS ) से लगाव वैसा ही है ...जैसा भक्त से भगवान् का !..  इस महान कर्मयोगी को चिमनियों से निकलता धुआं ...और कारखानों में मशीनों क़ी गडगडाहट से उतना ही प्रेम है... जितना देश के प्रथम प्रधान मंत्री नेहरु जी को था!

.... तो आइये करते  हैं ...नाप तौल इस बेजोड़  शख्सियत की ...

COMPREHENSIVE PERSONALITY TEST REPORT CARD OF SRI VIMLESH KUMAR JI ...

  • 1. व्यक्तित्व  * * 1.5
  • 2. रिश्तों में मर्यादा एवं उत्तरदायित्व की भावना * * 1.75
  • ३. जीवन मूल्यों के प्रति आग्रह * * 1.75
  • ४.  भौतिक उपलब्धियां * * 1.25
  • ५.  लोक जीवन एवं सार्वजनिक छवि * * 1.5
  • ६.  स्वास्थ्य एवं अनुशासन * * 1.25
  • ७. जीवन में आध्यात्मिकता एवं चिंतन शीलता *  1.75
  • ८ . सत्य का अनुश्रवण एवं सत्य का साथ देने की क्षमता *  1.5
  • ९.  जनहित एवं सेवा भावना * 1.5
  • १०.  आत्मविश्वास एवं प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझने की क्षमता * * 1.75
  • ११. निर्विकार एवं निर्दोषता * *  1.5
  • १२. जिज्ञासु एवं नित नया सीखने की ललक *  1
  • १३. रचनात्मकता * 1.5
  • १४. वाक् निपुणता एवं भाषण शैली * * 1.25
  • १५ .आत्म द्रष्टि एवं दूरद्रष्टि * 1.25
  • १६. साहस एवं निर्भीकता *  1.25
  • १७. सिंह सदन के गौरव को बढ़ाने में योगदान * 1
  • १८. अन्य सदस्यों  को प्रेरित करने की नेतृत्व  क्षमता * 1
  • १९.  प्रगतिशील द्रष्टिकोण एवं निरंतर प्रगति की ललक * 1
  • २०. निस्वार्थ एवं कपट रहित जीवन * 2
        
                    TOTAL SCORE IS ... 28.25
 
PRESENTED BY PANKAJ - PUSHPENDRA

Wednesday, November 16, 2011

COMPREHENSIVE PERSONALITY TEST REPORT CARD 2011


COMPREHENSIVE PERSONALITY TEST RANKING 

.....अब तक पांच शख्सियत आपके सामने पेश हो चुकी हैं ....और उनके आप भली- भांति देख- परख चुके हैं ! हर शख्सियत  किसी न किसी मामले में अपनी विशेष छाप छोडती दिखाई पड़ती है !
..... तो एक नजर डालते हैं अब तक की TEST RANKING  पर ---


  •   RANK   PERSONALITY                  SCORE
  •   1            SRI KRISHNA ''BADE''        40.75
  •   2            SRI RAKESH CHAND          33.75
  •   3            SRI D. P. SINGH                    30.50
  •   4            SRI HARI KRISHNA              30.00
  •   5            SRI MAHESH CHANDRA      28.25
* * * * * PRESENTED BY PANKAJ K. SINGH

COMPREHENSIVE PERSONALITY TEST REPORT CARD 2011



  • VOLUME-- 6

    SRI MAHESH CHANDRA JI .....

    मित्रों हमें  बेहद ख़ुशी है कि हमारे प्रयासों को आप के द्वारा पसंद किया जा रहा है आज हम आपके सामने पेश कर रहे हैं इस श्रंखला की पांचवीं शख्सियत.... 

    ....सिंह सदन के सदस्यों की परिचय श्रृंखला में इस बार हम परिचय करा रहे हैं, अपने प्रिय मौसा महेश चन्द्र जी से।

    महेश चन्द्र जी अत्यन्त सरल, सहज और कर्मठ व्यक्ति हैं। वे ऐसे व्यक्ति हैं , जिन्होंने जीवन की सच्चाईयों से कभी मुँह नहीं मोड़ा। जीवन की आरम्भिक कठिनाईयों से लड़ते हुए उन्होने अपने जीवन को नयी दिशा दी और आज वे अपने जीवन से निष्चित रूप से संतुष्ट नज़र आते हैं। महेश चन्द्र जी का जन्म फिरोजाबाद (तत्कालीन मैनपुरी) जिले के सराय शेख ग्राम में 1958 में हुआ था। अपने तीन भाईयों में सबसे बड़े महेश चन्द्र का आरम्भिक जीवन काफी कठिनाईयों से गुज़रा। उनके पिता श्री पुत्तूलाल कृषि और कुटीर उद्योग से जुड़े हुए थे। पिता पुत्तूलाल सिरसागंज में रहकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। अब तो यह गाँव इटावा आगरा राष्ट्रिय राजमार्ग से जुड़ गया है, लेकिन अब से 40 साल पूर्व यह गाँव अत्यन्त पिछड़ा गाँव था जहाँ बुनियादी सेवाएं भी न थीं। न सड़क, न विद्युत, न विद्यालय, न अस्पताल............आदि। शिक्षा के प्रति ललक भी बहुत ज़्यादा न थी। अधिकांश बच्चे जब 10-12 साल के हो जाते थे तो गाँव में ही अपने पारिवारिक कार्यो में हाथ बटाने लगते थे। महेश चन्द्र को भी अंततः इसी परम्परा का निर्वहन करना था। गाँव के प्राइमरी स्कूल से आरम्भिक पढ़ाई के बाद उन्हें भी खेती-किसानी का कार्य करना था। लेकिन बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे महेश चन्द्र को पढ़-लिखकर सरकारी नौकरी में जाने की धुन सवार हो गयी।

    गाँव की प्राइमरी शिक्षा के बाद भी वे रूके नहीं..........जूनियर हाईस्कूल किया। हाईस्कूल, इण्टर समीपवर्ती कस्बे सिरसागंज से किया। अपने परिवार की वास्तविकता से भागे बिना अपने पिता के कार्यो में हाथ बटाते रहे। खेतों में हल चलाने से लेकर घरेलू पशु भी चराये मगर ध्येय बरकरार रहा...............सरकारी नौकरी।

    जब 10वीं कक्षा पास हुए तो मौसी शीतला देवी से उनका विवाह (1975) में हो गया। 17 वर्ष की आयु में वैवाहिक जीवन प्रारम्भ करने के बाद ज़िम्मेदारियां बढ़ने लगीं मगर इसके बावजूद वे अध्ययन में लगे रहे। सिरसागंज के जैन इण्टर कालेज से इण्टरमीडिएट, नरायण डिग्री कालेज से बी0ए0 और इसके बाद एन0डी0 कालेज भोगांव से राजनीति शास्त्र में एम0ए0 की डिग्री हासिल की।1982 में एम0ए0 करने के बाद भी वे नौकरी पाने का प्रयास करते रहे...................1984 में उनका प्रयास सफल हुआ। रेलवे में चयनित हुए।

    विगत 25 वर्षों में रेलवे की नौकरी में उनका सफर काफी सफल रहा है । जालंधर, शाहकोट , जिन्दल पिण्डी, जमशेर खास तथा चिहडु रेलवे स्टेशनों पर उनकी पोस्टिंग रही। उनके तीन बच्चे भी हैं - रंजीत, संदीप और रानी। तीनों बच्चे उनकी तरह सीधे-सज्जन हैं। बनावट और अहंकार से दूर...........। अभी चार माह पूर्व फरवरी माह में रंजीत का विवाह भी हो गया है। फिलहाल वे पंजाब में हैं, लेकिन जैसे ही मौका मिलता है वे मैनपुरी चले आते हैं। परिवार में उत्सव का कोई भी अवसर हो............ महेश मौसा शायद ही कभी अनुपस्थित रहे हों। प्रत्येक शादी -विवाह शुभ अवसर पर वे हाजिर रहते हैं। इधर कुछ सालों से उनका रूझान आध्यात्म की ओर बढ़ा है....... पंजाबी डेरों का प्रभाव उनके दिमाग पर हावी हुआ है, सो वे जब भी गाँव आते हैं, तो आध्यात्म के किस्सों को सुनाते हैं। इन किस्सों को सुनने में गाँव वासी पर्याप्त रूचि लेते हैं। वे अब चौकी भी लगाते हैं। उनका दावा है कि वे किसी भी व्यक्ति का भविष्य -भूत बता सकते हैं। गाँव वालों के लिए वैसे भी इस तरह के व्यक्ति हमेशा ही श्रद्धा-कौतूहल और आश्चर्य का दूसरा रूप होते हैं............. सो उनके आस-पास ग्रामीणों की काफी भीड़ रहती है।

    मौसा का मन अब पंजाब में नही लगता..................वे नौकरी समाप्त कर वापस अपने जिले मैनपुरी या फिरोजाबाद आना चाहता हैं , वे यह भी चाहते हैं कि उनके बच्चों का कैरियर भी यू0पी0 में ही कहीं बन जाय.............।

    कई यादें उनसे जुड़ी हुई हैं.............जब हम उन्नाव-अचलगंज में थे तो वे हमारे घर आया करते थे। जब भी शादी -संस्कार होते थे.................महिलाओं के मजाक के प्रिय पात्र भी वही होते थे।

    बहरहाल सिंह सदन के प्रत्येक सदस्य का सम्मान उन्हें प्राप्त है। उनकी सरलता, सहजता, आडंबर हीनता, सहृदयता को सिंह सदन प्रणाम करता है।

  • COMPREHENSIVE PERSONALITY TEST REPORT CARD OF SRI MAHESH CHANDRA JI ....
  • 1. व्यक्तित्व  * * 1.75
  • 2. रिश्तों में मर्यादा एवं उत्तरदायित्व की भावना * * 1.5
  • ३. जीवन मूल्यों के प्रति आग्रह * * 1.5
  • ४.  भौतिक उपलब्धियां * * 1.75
  • ५.  लोक जीवन एवं सार्वजनिक छवि * * 1.75
  • ६.  स्वास्थ्य एवं अनुशासन * * 1.5
  • ७. जीवन में आध्यात्मिकता एवं चिंतन शीलता *  1.75
  • ८ . सत्य का अनुश्रवण एवं सत्य का साथ देने की क्षमता *  1.2.5
  • ९.  जनहित एवं सेवा भावना * 1.5
  • १०.  आत्मविश्वास एवं प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझने की क्षमता * * 1.5
  • ११. निर्विकार एवं निर्दोषता * *  1.5
  • १२. जिज्ञासु एवं नित नया सीखने की ललक *  1
  • १३. रचनात्मकता * 1.5
  • १४. वाक् निपुणता एवं भाषण शैली * * 1.75
  • १५ .आत्म द्रष्टि एवं दूरद्रष्टि * 1.25
  • १६. साहस एवं निर्भीकता *  1
  • १७. सिंह सदन के गौरव को बढ़ाने में योगदान * 1
  • १८. अन्य सदस्यों  को प्रेरित करने की नेतृत्व  क्षमता * 1
  • १९.  प्रगतिशील द्रष्टिकोण एवं निरंतर प्रगति की ललक * 1
  • २०. निस्वार्थ एवं कपट रहित जीवन * 1.50
TOTAL SCORE IS ---- 28.25

ARTICLE BY SRI PAWAN KUMAR & PRESENTED BY PANKAJ - PUSHPENDRA

Monday, November 14, 2011

COMPREHENSIVE PERSONALITY TEST REPORT CARD 2011



VOLUME - 5

  SRI RAKESH CHAND JI

......यह कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं है कि '' सिंह सदन '' के हर एक सदस्य में कुछ न कुछ खूबियाँ हैं. मगर इसके बाद भी कुछ लोगों में ऐसी खूबियाँ हैं कि उनका नाम उन खूबियों का पर्याय बन चुका है..... आज हम नजर डालेंगे ऐसे ही एक मिलनसार व्यक्तित्व से......... इससे पहले कि इस शख्स के बारे में और विस्तार से लिखा जाए आइए नज़र डालते उनके व्यक्तित्व के उजले पहलू पर........!

" सामान्य परिवार में उनका जन्म हुआ......श्रम की महत्ता को उन्होंने पहचाना.......अपने बल पर सरकारी नौकरी पाई....... ...सामाजिक सरोकारों/रिश्तों को हर स्तर पर उन्होंने निभाया.......घर का हर त्यौहार चाहे वो दीवाली हो ,होली हो या कि रक्षा बंधन........हर त्यौहार उनके बिना अधूरा लगता है............हर घरेलू आयोजन उनके बिना अधूरा है..........अच्छे पति-भाई-पिता-मित्र के रूप में उनकी पहचान है..................परंपरागत व्यंजनों के सबसे बड़े शौकीन हैं............. अब इसके बाद उनकी शख्सियत के बारे में बताने को क्या कुछ बचता है........शायद नहीं. दावे के साथ कह सकता हूँ आप समझ ही गए होंगे कि मैं किसी और कि नहीं ...... अपने बड़े बहनोई/ जीजा श्री राकेश चंद की बात कर रहा हूँ.

1962 में जन्मे राकेश चंद (भगवान जाने उनका नाम राकेश चंद क्यों है.....राकेश चन्द्र क्यों नहीं ?) , नाम के उच्चारण की इस अपूर्णता के बावजूद उनका हर पहलू उनके पूर्ण होने की सहज उदघोषणा करता है. 1979 में आर्मी ज्वाईन की...........मुश्किल ठिकानों पर रहकर देश सेवा करते रहे.....

.... पंजाब,जम्मू-कश्मीर,नागालैंड, आसाम, उत्तरप्रदेश की विभिन्न रेजीमेंटों में अपनी नौकरी करने के बाद वे सम्प्रति मुम्बई में हैं. हर दम मुस्कुराने वाले इस शख्स का मैं इसलिए बहुत आदर करता हूँ कि उन्होंने अपने छोटे भाइयों को अपने सीमित संसाधनों के वाबजूद हर तरीके से संबल दिया, पढाया लिखाया............अपना परिवार भी उन्ही कम संसाधनों में चलाया. अपने बच्चों के पालन -पोषण में समझौता कर लिया मगर किसी सामाजिक उत्तरदायित्व में आंच न आने दी.........उनके इस आन्दोलन में उनकी पत्नी यानि उषा दी ने हर कदम साथ दिया. जब 1981 में उनकी शादी उषा दी से हुई थी तो मुझे याद है कि मैं बहुत छोटा था. जब भी मेरी उनसे मुलाकात होती थी तो वे मुझे बहुत छेड़ा करते थे........"मार गयी मुझे तेरी जुदाई....." वाला गाना जब वे अपनी ऊँगली से चुटकियाँ बजाते हुए सुनाते थे तो मैं अपने जीजा की इस अदा पर रीझ सा जाता था. खैर वक्त गुज़रता गया जीजा और हमारे सम्बन्ध मजबूत होते गए..........! आर्मी की कैंटीन से कुछ सामान जब वे हमारे लिए लाते थे और हमें गिफ्ट करते तो हमें बहुत अच्छा लगता था .......पहली बार रेडियम वाली टाटा की घड़ी जब वे लाये और रात के अँधेरे में उसकी चमक उन्होंने हमें दिखाई तो हमारा रोमांच किस पायदान पर था, शायद उसका वर्णन आज संभव नहीं है.......बस इतना समझ लीजिये कि हम सब भाई उस घडी की चमक को को रात में रजाई के नीचे घंटों देखा करते थे.........(हा... हा..... हा.......) !

जीजा के साथ हम सबके साथ जो सम्बन्ध थे वे धीरे धीरे दोस्ताना होते गए.........आज हम सब भाइयों चाहे मैं होऊं या पंकज या प्रमोद भैया या उमा, श्यामू, जोनी या पिंटू सभी से उनके रिश्ते मधुर, दोस्ताना और बहुत स्वाभाविक हैं . हर आदमी चाहे वो कितना ही बड़ा हो या कि छोटा सबको इज्ज़त देने की उनकी आदत उन्हें लोकप्रियता के शिखर पर स्थापित करती है........ !

मृदु भाषी जीजा कि एक अन्य पहचान उनकी कर्मठता भी है. उनकी कर्मठता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपनी छोटी नौकरी से न केवल अपना घर बनाया.......बल्कि अपने भाइयों को यथा संभव नौकरी पर लगवाया. मकान निर्माण का जज्बा तो शायद उनकी रगों में बहता है.........मकान बनवाने के वे इस हद तक क्रेजी हैं कि आज भी जब भी वे दो महीने कि छुट्टी आते हैं घर बनवाने का काम निर्बाध और अखंड रूप से करते हैं........इसके अलावा रिश्ते- नातेदारियों में जाकर मेहमानी का भी लुत्फ़ उठाते हैं. देशी व्यंजनों......जैसे सर्राटा, हलुआ, मालपुआ, एस्से, गुटेटा, गुना, रसिआउर,पुरी में तो समझ लीजिये उनकी जान बसती है.....! शादी हो या कोई रस्म .......मान होने के नाते उन्हें तवज्जो मिलना स्वाभाविक है........और वे इसका पूरा आनंद भी उठाते हैं.......

......जीवन का आनंद का उठाना तो कोई उनसे सीखे. अब तो खैर मेले- नुमाइश नहीं रहे मगर अच्छी तरह याद है कि हमारे बचपन में जब हमारे शहर मैनपुरी में नुमाइश लगती थी तो वे हमें नुमाइश दिखने ले जाते थे और हमारी बहुत सी जिदों को पूरा भी करते थे. आज भी सारे सामाजिक सरोकारों को निभाते हुए बड़ी आसानी से अपने व्यक्तित्व की गंभीरता को बचाए हुए हैं वो अद्भुत तो है ही.........सराहनीय भी. ईश्वर से दुआ है कि जो परंपरा उन्होंने शुरू की है वो उनके तीनों बच्चे भी निभाते रहें............जीजा राकेश चंद के लिए हजारों हजार दुआएं और इस दुआओं में हम सबके हाथ खड़े हुए हैं......!

उनकी हरी वर्दी.....उजले मन और सुनहले जीवन सफ़र को सलाम करते हुए यह गीत जेहन में दस्तक दे रहा है.....

"हौसला न छोड़ कर सामना जहान का,
वो बदल रहा है देख रंग आसमान का
............यह शिकस्त का नहीं फतह का रंग है
जीत जायेंगे हम तू अगर संग है...................!"

COMPREHENSIVE PERSONALITY TEST REPORT CARD OF SRI RAKESH CHAND JI-----


  • 1. व्यक्तित्व  * * 2
  • 2. रिश्तों में मर्यादा एवं उत्तरदायित्व की भावना * * 2
  • ३. जीवन मूल्यों के प्रति आग्रह * * 2
  • ४.  भौतिक उपलब्धियां * * 2
  • ५.  लोक जीवन एवं सार्वजनिक छवि * * 2.5
  • ६.  स्वास्थ्य एवं अनुशासन * * 2.25
  • ७. जीवन में आध्यात्मिकता एवं चिंतन शीलता *  1.25
  • ८ . सत्य का अनुश्रवण एवं सत्य का साथ देने की क्षमता * * 1.7.5
  • ९.  जनहित एवं सेवा भावना * 1.5
  • १०.  आत्मविश्वास एवं प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझने की क्षमता * * 1.75
  • ११. निर्विकार एवं निर्दोषता * *  2
  • १२. जिज्ञासु एवं नित नया सीखने की ललक *  1
  • १३. रचनात्मकता * 1
  • १४. वाक् निपुणता एवं भाषण शैली * * 2
  • १५ .आत्म द्रष्टि एवं दूरद्रष्टि * 1.75
  • १६. साहस एवं निर्भीकता * * 1.75
  • १७. सिंह सदन के गौरव को बढ़ाने में योगदान * 1.25
  • १८. अन्य सदस्यों  को प्रेरित करने की नेतृत्व  क्षमता * 1
  • १९.  प्रगतिशील द्रष्टिकोण एवं निरंतर प्रगति की ललक * 1.25
  • २०. निस्वार्थ एवं कपट रहित जीवन * 1.50


TOTAL SCORE IS ..... 33.50

ARTICLE BY SRI PAWAN KUMAR & PRESENTED BY PANKAJ - PUSHPENDRA

Saturday, November 12, 2011

COMPREHENSIVE PERSONALITY TEST REPORT CARD

volume- 4

COMPREHENSIVE PERSONALITY TEST REPORT CARD OF BADE SHRI.....

....तो मित्रों आज हम एक बार फिर आपको इस बेजोड़ रिएलिटी शो की ओर लिए चलते हैं....

.... न जाने कितने दशकों का संघर्ष है...... हमारे अनेक पूर्वजों के संचित कर्मों , पुण्यों संस्कारों का प्रतिफल है ... कि '' सिंह सदन '' रूपी बाग़ लगातार शनै:- शनै: पुष्पित - पल्लवित हुआ है...... थोडा बहुत छायादार भी हुआ है .....

अपने पूर्वजों के दिखाए सदमार्गों पर आज भी '' सिंह सदन '' कि नई पीढियां चल रही हैं ...... और शीश झुकाकर श्रद्धा पूर्वक नमन करती हैं ......... अपने उन सभी '' पूर्वजों '' , '' अग्रजों '' , '' बड़ों '' को .... जिन्होंने अपने खून पसीने से बरसों सींचकर '' सिंह सदन कुटुंब '' रूपी विशाल बाग़ को उसको आज के आकार तक पहुँचाया है .... अपने अपूर्व त्याग और बलिदान से ...... आने वाली नस्लों को एक बेहतर ज़िन्दगी का रास्ता दिखाया है ..... !


................आज इस अवसर पर हम सिंह सदन के ऐसे ही एक स्नेही..... त्यागी ..... शिल्पकार ..... हमारे '' मामा श्री '' श्रीकृष्ण के प्रति अपनी अपार श्रद्धा प्रकट करते हैं......... मामा श्री अपने नाम की सार्थकता सिद्ध करते हुए कुटुंब में स्नेह प्रेम और सहकार के अदभुत प्रतीक हैं ........ बड़ों से लेकर छोटों तक उनकी लोकप्रियता सिद्ध है !


उनके हंसमुख ...... प्रसन्नचित ..... आध्यात्मिक ..... और संतुष्ट स्वभाव के सभी कायल हैं ! मामा श्री ..... यही कोई छ: दशक पहले मैनपुरी के पावन '' मेदेपुर '' ग्राम में जन्मे ... बचपन से ही वे सहकारी ..... सामाजिक प्रवृत्ति के धनी हैं ...... हर सामाजिक - पारिवारिक दायित्व को .... उन्होंने पूरी शिद्दत.... पूरी जिम्मेदारी से निभाया है ... !

...................... उनके पिता ... यानी हमारे परम पूज्य नाना श्री एक महान आध्यात्मिक संत थे ...... मैनपुरी और आस पास के कई जनपदों में उनके संत स्वभाव ........ और '' आध्यात्मिक चिंतन '' की बड़ी गूँज थी ... वे सच्चे '' सिद्ध पुरुष '' थे ........... मामा श्री में एक '' महान आध्यात्मिक परंपरा के सिद्ध ऋषि के अंश '' होना .......... स्पष्टत: परिलक्षित होता है .. वे बच्चों बड़ों सभी के साथ बेहद आत्मीय और स्नेही हैं......... हमारे ऊपर तो उनके बड़े उपकार हैं वे बचपन से ही सही मायनों में हमारे '' संरक्षक '' रहे हैं ..........आज '' सिंह सदन '' की इमारत जो खड़ी है ........ उसकी बुनियाद हमारे मामाश्री के खून पसीने ......और उनके अथक परिश्रम से निर्मित है ........!


........हमारे लिए मीलों मील से ...... रोजाना कई कई बार साइकिल से आना - जाना हमे आज भी याद आता है...... आज भी हमे जब भी ....... जहाँ भी जरूरत हो ..... वे दौड़े चले आते हैं ..........! उनसे जुडी हजारों यादें आज भी हमारी आँखें नम कर देती हैं .. कैसे और किन शब्दों में उनको धन्यवाद दूं .............. मेरे पास शब्द नहीं है ......... सिर्फ भावनाएं हैं ................ उनके निर्दोष , निर्मल , कल्याणकारी व्यक्तित्व ने मेरी रूह को कितना प्रभावित और आकर्षित किया है ......... मैं बता नहीं सकता....... क्योंकि वाणी और शब्दों की अपनी सीमायें हैं........ और कुछ विषय वर्णनातीत होते हैं ....... !

..... बचपन में हम भाइयों के बाल मन पर........... तो मामाश्री के व्यक्तित्व का इतना गहरा प्रभाव था कि हमे पुरानी हिंदी फिल्मों के शानदार चरित्र अभिनेताओं - '' बलराज सहनी '' और '' नज़ीर हुसैन '' में बस अपने ...... प्यारे मामा ही नजर आते थे ........... आज भी हम भाई ''जोनी वाकर '' को अपने मामा के ही रूप में देखते हैं ........ मामाश्री का ऐसा '' अद्वितीय प्रभाव '' हम भाइयों पर बचपन से लेकर आज तक कायम है .....!

....... मामाश्री को बचपन से ही हम अनेकानेक रूपों में देखते रहे हैं ........ कभी वे मुझे एक बेहतरीन '' डिजाईनर दर्जी '' लगते थे तो कभी '' रिश्तों के गूढ़ ज्ञाता '' , '' कट्टर परम्परावादी '' ........... कभी वे '' प्यार का सागर '' लगते तो कभी '' वैरागी सन्यासी ''... मामाश्री ने हर रूप को पूरी शिद्दत से जिया है ....... हर इंसानी धर्म और पारिवारिक जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है .......... वे महान पिता ..... आज्ञाकारी पुत्र ...... अच्छे और सच्चे नागरिक के रूप में मीलों तक ...... एक '' उदाहरण '' के रूप में यूँ ही नहीं प्रस्तुत किये जाते हैं ...... कुदरत ने भी मानो उन पर कृपा बरसाई है ...... तभी तो उन्होंने एक '' महान माता - पिता '' के यहाँ जन्म लिया ...... और समाज को अगली पीढ़ी के रूप में चार अति संस्कार वान मर्यादित संताने दी .......!


.....'' सिंह सदन '' के इस ..... '' महान ट्रस्टी ''.... '' कर्मयोगी संरक्षक '' .... और '' सिंह सदन कुटुंब '' रुपी बगिया के त्यागी - तपस्वी ....'' धर्मनिष्ठ माली '' को हमारा सादर नमन ! !
............तो मित्रों आज हम पेश कर रहे हैं ... ऐसे ही  बड़े मामा श्री श्रीकृष्ण का  COMPREHENSIVE PERSONALITY TEST REPORT CARD...




COMPREHENSIVE PERSONALITY TEST REPORT CARD OF BADE SHRI.....


  • 1. व्यक्तित्व  * * 2
  • 2. रिश्तों में मर्यादा एवं उत्तरदायित्व की भावना * * 2.5
  • ३. जीवन मूल्यों के प्रति आग्रह * * 1.75
  • ४.  भौतिक उपलब्धियां * * 1.25
  • ५.  लोक जीवन एवं सार्वजनिक छवि *2.25
  • ६.  स्वास्थ्य एवं अनुशासन * * 1.75
  • ७. जीवन में आध्यात्मिकता एवं चिंतन शीलता * * 2.25
  • ८ . सत्य का अनुश्रवण एवं सत्य का साथ देने की क्षमता * *2.5
  • ९.  जनहित एवं सेवा भावना * 3
  • १०.  आत्मविश्वास एवं प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझने की क्षमता * * 2.5
  • ११. निर्विकार एवं निर्दोषता * 2.25
  • १२. जिज्ञासु एवं नित नया सीखने की ललक * * 1.25
  • १३. रचनात्मकता * *1.75
  • १४. वाक् निपुणता एवं भाषण शैली * * 1.5
  • १५ .आत्म द्रष्टि एवं दूरद्रष्टि * 2
  • १६. साहस एवं निर्भीकता * * 2
  • १७. सिंह सदन के गौरव को बढ़ाने में योगदान * 2.5
  • १८. अन्य सदस्यों  को प्रेरित करने की नेतृत्व  क्षमता * 1.75
  • १९.  प्रगतिशील द्रष्टिकोण एवं निरंतर प्रगति की ललक * 1.5
  • २०. निस्वार्थ एवं कपट रहित जीवन * 2.25

TOTAL SCORE IS ..... 40.75
   
***** PANKAJ- PUSHPENDRA

Thursday, November 10, 2011

COMPREHENSIVE PERSONALITY TEST REPORT CARD 2011



VOLUME -2 

विख्यात आलोचक और तर्कशास्त्री .... डॉक्टर  श्री हरि कृष्ण जी ''छोटे'' 

आज हम पेश कर रहे हैं सर्वत्र छोटे के नाम से विख्यात दीन बन्धु डॉक्टर  श्री हरि कृष्ण जी का COMPREHENSIVE PERSONALITY TEST REPORT CARD .... यूँ तो ये पेशे से चिकित्सक हैं पर उतने ही अच्छे नाट्य कर्मी ...और हिन्दू पौराणिक शास्त्र के जानकार भी हैं !

... विख्यात आलोचक और तर्कशास्त्री के रूप में सर्वत्र  इनकी प्रतिष्ठा सिद्ध है ! अपनी कुछ मानवीय सीमाओं के बावजूद वे एक बेहतरीन इंसान हैं ! .... उन्हें सादर प्रणाम सहित पेश है उनका COMPREHENSIVE PERSONALITY TEST REPORT CARD ...

SRI HARI KRISHNA JI ...


  • 1. व्यक्तित्व  * * 2
  • 2. रिश्तों में मर्यादा एवं उत्तरदायित्व की भावना * * 2
  • ३. जीवन मूल्यों के प्रति आग्रह * * 1.5
  • ४.  भौतिक उपलब्धियां * * 1
  • ५.  लोक जीवन एवं सार्वजनिक छवि *1
  • ६.  स्वास्थ्य एवं अनुशासन * * 1.5
  • ७. जीवन में आध्यात्मिकता एवं चिंतन शीलता * * 2
  • ८ . सत्य का अनुश्रवण एवं सत्य का साथ देने की क्षमता * *1.5
  • ९.  जनहित एवं सेवा भावना * 1.5
  • १०.  आत्मविश्वास एवं प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझने की क्षमता * * 1.5
  • ११. निर्विकार एवं निर्दोषता * 1
  • १२. जिज्ञासु एवं नित नया सीखने की ललक * * 2
  • १३. रचनात्मकता * * 2
  • १४. वाक् निपुणता एवं भाषण शैली * * 2.5
  • १५ .आत्म द्रष्टि एवं दूरद्रष्टि * 1
  • १६. साहस एवं निर्भीकता * * 1.5
  • १७. सिंह सदन के गौरव को बढ़ाने में योगदान * 1.5
  • १८. अन्य सदस्यों  को प्रेरित करने की नेतृत्व  क्षमता * 1
  • १९.  प्रगतिशील द्रष्टिकोण एवं निरंतर प्रगति की ललक * 1
  • २०. निस्वार्थ एवं कपट रहित जीवन * 1

       
                TOTAL SCORE IS ....... 30.0

***** PANKAJ-PUSHPENDRA

Wednesday, November 9, 2011

COMPREHENSIVE TEST REPORT CARD 2011



VOLUME-1


first result of COMPREHENSIVE TEST REPORT CARD 2011 is on air ...

मित्रों... पहला COMPREHENSIVE TEST REPORT CARD 2011 तैयार है... और आज हम इसे आपके लिए पेश कर रहे हैं ... और शुरुआत हमने सिंह सदन सुप्रीमो श्री डी पी सिंह से की है ! ये COMPREHENSIVE TEST REPORT CARD तैयार करने में हमारे विशेष सहयोगी रहे हैं ... जाने- माने चिन्तक ,समाज शास्त्री एवं कवि ...हमारे पुष्पेन्द्र सिंह यानि भैया पिंटू !


....एक विनम्र  निवेदन और आपसे करना चाहूँगा ...कि ये COMPREHENSIVE TEST REPORT CARD किसी को बड़ा या छोटा आगे या पीछे साबित कदापि नहीं करेगा ! सिंह सदन में ईश्वर प्रदत्त वरिष्ठता सूची ही मान्य है ... जिसे किसी भी प्रकार की न्यायिक चुनौती से पूर्ण संरक्षण प्राप्त है !

... वास्तव में हम जैसे भी हैं... ईश्वर निर्मित हैं और हमारे दोष या गुण भी उसी की इच्छा मात्र ही हैं ! इसलिए हर व्यक्ति अच्छा है ..महान है ... और इस प्रथ्वी पर अपना रोल मात्र प्ले कर रहा है ! उसी प्रकार जैसे  नाटक में हर पात्र का अपना महत्त्व होता है ... कोई पात्र छोटा - बड़ा नहीं होता उसे .... कैसे निभाया गया ये अवश्य  महत्वपूर्ण हो सकता है !

.... इसलिए उसी क्रम में हमारे COMPREHENSIVE TEST REPORT CARD को उसी स्पोर्टिंग स्पिरिट से लेने की जरुरत है ...हाँ कुछ सीखने की इच्छा हो तो वो काम तो इससे भी बखूबी किया जा सकता है ....तो पेश है...

COMPREHENSIVE TEST REPORT CARD OF SHRI D. P. SINGH

  •  1. व्यक्तित्व  * 1.5
  • 2. रिश्तों में मर्यादा एवं उत्तरदायित्व की भावना * 1.5
  • ३. जीवन मूल्यों के प्रति आग्रह * * 1.5
  • ४.  भौतिक उपलब्धियां * * 1.5
  • ५.  लोक जीवन एवं सार्वजनिक छवि *1.5
  • ६.  स्वास्थ्य एवं अनुशासन * * 2
  • ७. जीवन में आध्यात्मिकता एवं चिंतन शीलता * 1
  • ८ . सत्य का अनुश्रवण एवं सत्य का साथ देने की क्षमता * *1.5
  • ९.  जनहित एवं सेवा भावना * 2.5
  • १०.  आत्मविश्वास एवं प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझने की क्षमता * *2.5
  • ११. निर्विकार एवं निर्दोषता * 1
  • १२. जिज्ञासु एवं नित नया सीखने की ललक * 1.5
  • १३. रचनात्मकता * 1
  • १४. वाक् निपुणता एवं भाषण शैली * 1.5
  • १५ .आत्म द्रष्टि एवं दूरद्रष्टि * 1
  • १६. साहस एवं निर्भीकता * * 2.5
  • १७. सिंह सदन के गौरव को बढ़ाने में योगदान * 1.5
  • १८. अन्य सदस्यों  को प्रेरित करने की नेतृत्व  क्षमता * 1
  • १९.  प्रगतिशील द्रष्टिकोण एवं निरंतर प्रगति की ललक * 1
  • २०. निस्वार्थ एवं कपट रहित जीवन * 1.5
TOTAL SCORE  IS 30.5 

***** PANKAJ K. SINGH & PUSHPENDRA SINGH PINTU