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Sunday, October 16, 2011

एक आला शायर का जन्म



...अभी हाल में मैनपुरी गया तो  देश के एक बेहतरीन उभरते हुए शायर से मुलाकात हो गयी ! वह युवा भी हैं ... और आदर्शवादी भी ! ..जोशीले भी हैं ...और जिज्ञाशु भी ! ...प्रतिभाशाली भी हैं ..और भावुक भी  ! 

.....फिलहाल उनके द्वारा पेश चंद लाइने हाज़िर कर रहा हूँ.... उनकी शख्शियत से आपका तार्रुफ़ अगली पोस्ट में कराऊंगा..

''.. यह हो ही नहीं सकता... कि मैं तुझे ना छेड़ूं, 
                               ऐ मौत ... तुझे भौजाई बना रखा है  !!


*****PANKAJ K. SINGH

आपका फेवरेट कौन है




.... जरा बताइए तो सही ....


.... इधर कई दिन हुए ब्लॉग पर कोई नई विचार श्रंखला नहीं आयी... अभी हम सब महान ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह की स्म्रतियों में सराबोर हैं... ऐसे मैं सभी सदस्यों से निवेदन करता हूँ .... कि वे एक एक लेख के माध्यम से हम सभी को यह जानने का अवसर दे कि वे किस एक सिंगर को सार्वाधिक पसंद करते हैं और क्यों  आप के लेख आज कल में ही आ जाए तो बहुत अच्छा रहेगा ... पूरे समाज में आपकी नाम्बड़ी होगी ..


***** PANKAJ K. SINGH.  

Monday, October 10, 2011

मेरी गुजारिश ......





काफी लम्बे समय बाद मै इस ब्लॉग पर अपनी पोस्ट डाल रहा हूँ ..........
इस बावत मुझे काफी ख़ुशी हो रही है, खास बात ये है की मै ये पोस्ट जम्मू यात्रा के बाद लिख रहा हूँ .......
लोगों को मैंने इस ब्लॉग पर सिर्फ अपना हित साधने के लिए दूसरों की तारीफ़ करते देखा है .............
लोगों को इस ब्लॉग पर बड़ी-बड़ी बातें करते देखा है जो अन्दर से खोखली हैं ................................
इसलिए मै लम्बे समय तक इस ब्लॉग से दूर रहा ............................
मैंने अपनी  साल की जिंदगी मै बहुत कुछ सीखा है ...................................
पर आज समय आगया है की मै कुछ अपने बारे मै भी लिखूं ....................................
मैंने इन 26 सालों में  जो जीवन जिया वो स्वाभिमान से भरा है जिसमे,
अपनी जबरदस्त मेहनत का सुहागा लगा हुआ है .................................
मैंने हमेशा घर में एकता को चाहा......................................
मैंने कभी अपने भाइयों से अपनी आवश्यकतायों   का जिक्र नहीं किया
पर उन्होंने जो दिया उसे लेने से कभी इनकार भी नहीं किया............
मैंने कभी ये आशाएं नहीं लगायीं की मुझे कुछ मिल जाय क्योंकि जब आशाएं टूटती हैं तो बड़ा दर्द होता है .......
मै बस इतना कहना चाहता हूँ की यदि सिंह सदन के किसी भी सदस्य को मुझसे दिक्कत है ,
तो इस बावत मुझसे जरूर संपर्क करे ............................
और एक बात और कहना चाहूंगा जिन लोगों को लगता है की मै नौकरी नहीं कर पाउँगा तो मै बता दूं
जहाँ मै अपनी पोस्टिंग लूं वहां आके एक बार देखना जरूर..............................
मैंने सदैव चुनौतियों से लड़ना सीखा है ................
और ये ज़ज्वा मै जीवन पर्यंत जारी रखूँगा .............................................
एक बार फिर विनम्र आवेदन है की मेरे पीछे किसी प्रकार की बातें न करें
और शादी को लेकर ख़ास तौर पर नहीं ....................................
और किसी का नाम मेरे साथ जोड़ कर किसी को बदनाम करने
की कृपा बिलकुल न करें जरा गंभीरता से सोचिये ये आपके साथ हो तो कैसा लगेगा

धन्यवाद........
श्यामकांत

Wednesday, August 31, 2011

नव पल्लव की तरह पवित्र हो आप


पूज्य चाचा- आपका दिव्य-दर्शन
मुझे फूलों की तरह
आत्म शांति देता है

आपके चरण
मेरी जिंदगी के सरोवर के कमल है
आप है मेरे जीवन का दिव्य-प्रकाश
जिसकी रोशनी में " मैं" चलता हूँ

आपकी बातें मेरे मानस- पटल पर
पीपल की पत्तियों की तरह हिलती है
साँस बन गए आप

जैसे उठाता है -आकाश
आकाश की तरह दोपहर की तेज धूप-तपिश
शाम का ठंडापन -सहा है आपने
मेरा साथ दिया है अटल विचार की तरह

नव पल्लव की तरह पवित्र हो आप
आपके स्पर्श से
जीवन भर के लिए-
पवित्र हो गया हूँ "मैं"



[मेरे मार्गदर्शक पूज्यनीय-
पवन चाचा जी के पावन चरणों में समर्पित.......]

-सचिन सिंह




Tuesday, July 5, 2011

परम आदरणीय भैया को गौतम बुद्ध नगर का सी . डी. ओ बनने पर बधाइयाँ .........

शनिवार दिनांक २ जुलाई को में जब में शाम को जब ऑफिस से निकला तो बड़े भैया का फ़ोन आया
की मै सी . डी. ओ गौतम बुद्ध नगर हो गया हूँ तो मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा बाकई ऑफिस की सारी थकान दूर
हो गई उसके बाद घर आकार मेने पेपर में भी देखा मन गदगद हो गया बड़े भैया आप यूँ ही ऊंचाइयों को छुते रहे
आप देश के सबसे प्रतिष्ठित व्यक्ति बने ऐसी मेरी शुभकामनायें है .............!
आपको ढेरों बधाइयाँ .........!
"आपको और भाभी को सादर प्रणाम"

............पिंटू

Tuesday, June 14, 2011

मेरी बदायूँ यात्रा........!!!!





मेरी बदायूँ यात्रा........!!!!

1-दिनाँक 12 जून, 2011 को बदायूँ आगमन. Sunday (सुबह लगभग 10.30 बजे)

2-मेरे बदायूँ आगमन के बाद हम सभी लोगो नेअचानक अलकनंदा रिसोर्ट, बरेली जाने का फैसला किया........हम लोगो का काफिला लगभग 12 .30 दोपहर बरेली के लिए निकल पडा. लगभग एक घण्टे की यात्रा के बाद हम लोग अलकनंदा रिसोर्ट पहुँचे........यहाँ पहुँचते ही हमारे साथ नीरज कौशल भैया,इशिका , लीची, मानसी, ब्रजेश भैया आदि सदस्यों नेइस रिसोर्ट की प्राकृतिक खूबसूरती का जमकर दीदार किया. इस रिसोर्ट में बने बेहतरीन पूल के स्वच्छ पानी में नहाकर सब लोगों ने एक दूसरे को आनन्द से सराबोर कर लिया. यहाँ प्रिंसी भी असीम आनन्द महसूस कर इधर-उधर दौड रही थी.

13 जनवरी-
मेरी बदायूँ यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण दिन 13 जनवरी था. इस दिन मैने आम-जनता से मिलक बदायूँ शहर में प्रशसनिक कार्यो के बारे में जानकारी लेने का प्रयास किया. मैने सदर बाजार, विभिन्न चैराहों पर जाकर ट्रैफिक व्यवस्था व लोगो की आम समस्याऐं जानने की कोशिश की।
बदायूँ शहर में लोगो से पूछने पर जो एक चीज सबके मुँह से सुनने को मिल रही है.....यहॉ के एसडीएम सदर के कार्यो की प्रशंसा . कुछ लोगो का तो कहना है कि साहब के आने से हमें जाम, भ्रष्टाचार, लूट-पाट, शिक्षा , स्वास्थ्य......सहित सभी क्षेत्रों में अप्रत्याशित प्रगति देखने को मिली है. शहर के निवासी रघुनन्दन जी केशब्दों में कहें तो शहर को नवजीवन प्रदान करने में पवन जी के योगदान को भुलाना मुमकिन नहीं है.
13जनवरी की सुबह 09.50 बजे ऑफिस आने पर मैंने सबसे पहले जिन मानवीय मूल्यों को बहुत ही प्रयोगात्मक रूप से देखा.....धैर्य, कर्तव्य के पति समर्पण, उचित लोगों को न्याय.......साथ ही आधुनिक तकनीकी के इस्तेमाल (e-governance) से जन समस्याओं का हाथों-हाथ निस्तारण.
तहसील में घूमने पर विभिन्न लोगों से बातचीत से पता लगा कि यहाँ पर कोई भी अतिरिक्त पैसा नहीं लिया जाता है एवम् सभी काम समय पर सम्पन्न कराये जाते हैं. लोकवाणी केन्द्र के बाहर खडे युवा वर्ग से जाति प्रमाण-पत्र, मूल निवास, आय प्रमाण-पत्र आदि के बारे में पूछने पर पता लगा कि यहाँ पर साहब के द्वारा हर समस्या का तुरन्त निस्तारण किया जाता है, जिससे हम लोगों का कीमती समय बच जाता है और हम इससे अपने अध्ययन को सुचारू रूप से कम पाते हैं. यहाँ (तहसील) पर जाति प्रमाण-पत्र बनवाने आए राहुल कुमार से बात करनेपर उन्होनें बताया कि साहब हमारे लिए रोल-माँडल की तरह है.
एसडीएम साहब के साथ मान्यवर कांशीराम आवास के निरीक्षण के दौरान मुझे यह देखने का सुअवसर प्राप्त हुआ कि जन समस्याओं का किस तरह से निस्तारण किया जाता है. प्रत्येक आवास पर खुद जाकर लोगो से पूछना, पानी-बिजली आदि की कोई समस्या तो नहीं............यहाँ के लोगों से बातचीत से मालूम हुआ कि सरकारी योजनाओं का उचित क्रियान्वयन कैसे होता है.
मेरी जिन्दगी के लिए मेरी बदायूँ यात्रा के दौरान गुजारा गया प्रत्येक लम्हा एक खूबसूरत एहसास बन गया.......मुझे बदायूं से क्या कुछ सीखनें को मिला ये शब्दों में बयाँ करना मुमकिन नहीं, लेकिन कुछ ऐसा मिला जो जीवन भर मागदर्शक के रूप में हाथ थामें मेरे साथ चलता रहेगा........


Pawan chacha

A genious saint,

Himself Happy with a bicycle

But A passionate human

Who want every person

Must have a Ferrari------

Thank for your timeless wisdom,


**** सचिन बदायूं से....!!!!

Thursday, May 19, 2011

विजेंद्र को हार्दिक बधाई .



देश की शान मशहूर बॉक्सर विजेंद्र सिंह को परिणय सूत्र में बंधने की हार्दिक बधाई . दिल्ली निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर व ब्रिटिश उच्चयुक्त में कार्यरत अर्चना सिंह के साथ विवाह बंधन में बंधने पर उन्हें शुभकामनायें. बेहद खूबसूरत चेहरे मोहरे वाले विजेंद्र ने बीते कुछ समय में बहुत नाम कमाया है...... !

उल्लेखनीय है कि भारतीय मुक्केबाज़ विजेंदर बीजिंग ओलंपिक का सेमीफ़ाइनल मुक़ाबला क्यूबा के एमिलियो कोरिया से हार गए थे, और उन्हें कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा था, इस हार के बावजूद विजेंदर की यह उपलब्धि इस मायने में अहम मानी जाती है कि ओलंपिक इतिहास में पहली बार भारत को मुक्केबाज़ी में कोई पदक प्राप्त हुआ .

विजेंदर से मेरी मुलाकात मसूरी अकादमी में ही हुयी थी जब वे हमारे खेल सप्ताह का उद्घाटन करने आये थे. ..... सरल स्वभाव के विजेंदर को पुनश्च विवाह की बहुत बहुत बधाईयाँ .